शिर्डी के साँई बाबा जी की समाधी और बूटी वाड़ा मंदिर में दर्शनों एंव आरतियों का समय....

"ॐ श्री साँई राम जी
समाधी मंदिर के रोज़ाना के कार्यक्रम

मंदिर के कपाट खुलने का समय प्रात: 4:00 बजे

कांकड़ आरती प्रात: 4:30 बजे

मंगल स्नान प्रात: 5:00 बजे
छोटी आरती प्रात: 5:40 बजे

दर्शन प्रारम्भ प्रात: 6:00 बजे
अभिषेक प्रात: 9:00 बजे
मध्यान आरती दोपहर: 12:00 बजे
धूप आरती साँयकाल: 7:00 बजे
शेज आरती रात्री काल: 10:30 बजे

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निर्देशित आरतियों के समय से आधा घंटा पह्ले से ले कर आधा घंटा बाद तक दर्शनों की कतारे रोक ली जाती है। यदि आप दर्शनों के लिये जा रहे है तो इन समयों को ध्यान में रखें।

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Saturday, 9 March 2013

श्री साईं लीलाएं- गौली बुवा की कथा

ॐ सांई राम


कल हमने पढ़ा था.. बाबा जी का अमृतोपदेश   


श्री साईं लीलाएं






गौली बुवा की कथा  

95 वर्षीय वृद्ध गौली बुवा विठोवा के परमभक्त थे| वे पंढरी के बारकरी में थे| गौली बुवा पूरे वर्षभर में 8 महीने वे पंढरपुर रहते थे और 4 महीने यानी आषाढ़ से कार्तिक मास तक गंगा के किनारे रहा करते थे| गौली बुवा का यह नियम था कि वे प्रत्येक वर्ष सवारी लेकर पंढरपुर जाया करते थे और वहां से वापस लौटते समय साईं बाबा के दर्शन करने के लिए शिरडी भी अवश्य जाया करते थे| सवारी के नाम पर उनके पास एक गधा था जिस पर वे अपना सामान रखा करते थे और एक शिष्य भी उनकी सेवा करने के लिये सदैव उनके साथ रहा करता था|

Friday, 8 March 2013

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय - 12

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 12. भक्तियोग
भक्ति की श्रेष्ठता (अध्याय 12 शलोक 1 से 12)

अर्जुन उवाच :
एवं सततयुक्ता ये भक्तास्त्वां पर्युपासते।
ये चाप्यक्षरमव्यक्तं तेषां के योगवित्तमाः॥१२- १॥
दोनों में से कौन उत्तम हैं - जो भक्त सदा आपकी भक्ति युक्त रह कर आप की उपासना करते हैं, और जो अक्षर और अव्यक्त की उपासना करते हैं।

Thursday, 7 March 2013

श्री साई सच्चरित्र - अध्याय 3


ॐ सांई राम
आप सभी को शिर्डी के साईं बाबा ग्रुप की ओर से साईं-वार की हार्दिक शुभ कामनाएं |
 
हम प्रत्येक साईं-वार के दिन आप के समक्ष बाबा जी की जीवनी पर आधारित श्री साईं सच्चित्र का एक अध्याय प्रस्तुत करने के लिए श्री साईं जी से अनुमति चाहते है |
 
हमें आशा है की हमारा यह कदम घर घर तक श्री साईं सच्चित्र का सन्देश पंहुचा कर हमें सुख और शान्ति का अनुभव करवाएगा| किसी भी प्रकार की त्रुटी के लिए हम सर्वप्रथम श्री साईं चरणों में क्षमा याचना करते है|


श्री साई सच्चरित्र - अध्याय 3
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श्री साईंबाबा की स्वीकृति, आज्ञा और प्रतीज्ञा, भक्तों को कार्य समर्पण, बाबा की लीलाएँ ज्योतिस्तंभ स्वरुप, मातृप्रेम–रोहिला की कथा, उनके मधुर अमृतोपदेश ।
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श्री साईंबाबा की स्वीकृति और वचन देना
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Wednesday, 6 March 2013

श्री साईं लीलाएं- बाबा जी का अमृतोपदेश

ॐ सांई राम


कल हमने पढ़ा था.. रोहिला के प्रति प्रेम  


श्री साईं लीलाएं






बाबा जी का अमृतोपदेश

Tuesday, 5 March 2013

श्री साईं लीलाएं- रोहिला के प्रति प्रेम

ॐ सांई राम


कल हमने पढ़ा था.. जब बाबा जी जोहर अली के चेले बने 

श्री साईं लीलाएं






रोहिला के प्रति प्रेम 

साईं बाबा का प्रेम सभी लोगों के प्रति एकसमान था| बाबा सभी वर्णों के लोगों से समान रूप से प्रेम करते थे| बाबा की दृष्टि में ऊंच-नीच, जाति-पाति, छोटे-बड़े, अमीर-गरीब का कोई भेदभाव नहीं थक| सभी एकसमान थे| एक बार रोहिला (मुस्लिम) फकीर शिरडी में आया| वहां वह बाबा के साथ द्वारिकामाई मस्जिद में ठहरा था| वह सदैव साईं बाबा के साथ रहता था| रोहिला लम्बे-चौड़े और गठे हुए शरीर का व्यक्ति था| साईं बाबा के प्रति उसके मन में बहुत श्रद्धा-भाव था| वह पवित्र कुरान के कलमें दिन-रात बड़ी ऊंची आवाज में पढ़ता और 'अल्लाहो-अकबर' के नारे लगाया करता था|

Monday, 4 March 2013

श्री साईं लीलाएं- जब जौहर अली बाबा जी के चेले बने

ॐ सांई राम


कल हमने पढ़ा था.. कुश्ती के बाद बाबा में बदलाव 

श्री साईं लीलाएं






जब जौहर अली बाबा जी के चेले बने

साईं बाबा और मोहिद्दीन की कुश्ती के कुछ वर्षों के बाद जौहर अली नाम का एक मुस्लिम फकीर रहाता में अपने शिष्यों के साथ रहने आया| वह हनुमान मंदिर के पास एक मकान में डेरा जमाकर रहने लगा| वह अहमदनगर का रहने वाला था| जौहर अली बड़ा विद्वान था| कुरान शरीफ की आयातें उसे मुंहजुबानी याद थीं| मीठी बोली उसकी अन्य विशेषता थी| धीरे-धीरे रहाता के श्रद्धालु जन उससे प्रभावित होकर उसके पास आने लगे| उसके पास आने वाला व्यक्ति उसका बड़ा सम्मान करता था| पूरे रहाता में उसकी वाहवाही होने लगी थी| धीरे-धीरे उसने रहाता के लोगों का विश्वास प्राप्त कर बहुत सारी आर्थिक मदद भी हासिल कर ली थी|

Sunday, 3 March 2013

Garlands and flowers to be banned inside Shirdi Temple

Garlands and flowers to be banned inside Shirdi Temple

Place : Shirdi
News Date : 03/03/2013

Carrying garlands and flowers inside the Sai Baba Temple at Shirdi will soon be banned as the temple trust feels it is a safety risk. Having received countless threats from terror organisations, they believe terrorists could sneak in explosives by hiding them in garlands.

Kishore More, chief officer of the Shirdi Sai Sansthan Trust, said on Saturday, “We have taken an in principle decision of not allowing garlands. Devotees carry garlands into the temple in plastic bags. There is a risk of explosives being carried in these bags.”

The decision was also taken keeping in mind the fact that the recent twin blasts at Disukhnagar, Hyderabad, had also occurred close to a Sai Baba temple, which had also been targeted in a 2002 blast. “We will take a final decision after a meeting of the committee.

The date from which this rule will be implemented will be announced soon,” he added.

Security concerns

The Shirdi Temple has been on the radar of several terror outfits in the past few years, due to which the state has decided to beef up security with more guards and a police station inside the complex. In 2007, carrying cell phones into the temple was banned.

At present, 730 private security guards protect the 7-acre premises, funded by the Shirdi Sansthan which earned Rs 345 crore in donations last year. Fifty policemen, a sub-inspector and a bomb detection and disposal squad had also been deployed.

According to a senior IPS officer, the state has sanctioned 190 constables, two sub-inspectors and one inspector for the police station.

Talks are also on for the appointment of an IAS and IPS officer for the temple’s security and management.

श्री साईं लीलाएं - कुश्ती के बाद बाबा में बदलाव

ॐ सांई राम


कल हमने पढ़ा था.. संकटहरण श्री साईं 

श्री साईं लीलाएं




कुश्ती के बाद बाबा में बदलाव
अपने शुरूआती जीवन में साईं बाबा भी पहलवान की तरह रहते थे| शिरडी में मोहिद्दीन तंबोली नाम का एक पहलवान रहा करता था| बाबा से एक बार किसी बात पर कहा-सुनी हो गई| जिसके फलस्वरूप उसने बाबा को कुश्ती लड़ने कि चुनौती दे डाली| बाबा अंतर्मुखी थे, फिर भी उन्होंने उसकी चुनौती को स्वीकार कर लिया|

For Donation

For donation of Fund/ Food/ Clothes (New/ Used), for needy people specially leprosy patients' society and for the marriage of orphan girls, as they are totally depended on us.

For Donations, Our bank Details are as follows :

A/c - Title -Shirdi Ke Sai Baba Group

A/c. No - 200003513754 / IFSC - INDB0000036

IndusInd Bank Ltd, N - 10 / 11, Sec - 18, Noida - 201301,

Gautam Budh Nagar, Uttar Pradesh. INDIA.