शिर्डी के साँई बाबा जी की समाधी और बूटी वाड़ा मंदिर में दर्शनों एंव आरतियों का समय....

"ॐ श्री साँई राम जी
समाधी मंदिर के रोज़ाना के कार्यक्रम

मंदिर के कपाट खुलने का समय प्रात: 4:00 बजे

कांकड़ आरती प्रात: 4:30 बजे

मंगल स्नान प्रात: 5:00 बजे
छोटी आरती प्रात: 5:40 बजे

दर्शन प्रारम्भ प्रात: 6:00 बजे
अभिषेक प्रात: 9:00 बजे
मध्यान आरती दोपहर: 12:00 बजे
धूप आरती साँयकाल: 7:00 बजे
शेज आरती रात्री काल: 10:30 बजे

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निर्देशित आरतियों के समय से आधा घंटा पह्ले से ले कर आधा घंटा बाद तक दर्शनों की कतारे रोक ली जाती है। यदि आप दर्शनों के लिये जा रहे है तो इन समयों को ध्यान में रखें।

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Wednesday, 18 July 2018

श्री साईं लीलाएं - साईं बाबा द्वारा भिक्षा माँगना

ॐ सांई राम



कल हमने पढ़ा था.. मुझे पंढरपुर जा कर रहना है 

श्री साईं लीलाएं

साईं बाबा द्वारा भिक्षा माँगना


साईं बाबा ईशावतार थेसिद्धियां उनके आगे हाथ जोड़कर खड़ी रहती थींपर बाबा को इन बातों से कोई मतलब नहीं थाबाबा सदैव अपनी फकीरी में अलमस्त रहते थेबाबाजिनकी एक ही नजर में दरिद्र को बादशाहत देने की शक्ति थीफिर भी वे भिक्षा मांगकर स्वयं का पेट भरते थेभिक्षा मांगते समय बाबा कहा करते थे - "ओ माई ! एक रोटी का टुकड़ा मुझे मिले|" बाबा सदैव हाथ फैलाकर भिक्षा मांगा करते थेबाबा के एक हाथ में टमरेल और दूसरे हाथ में झोली हुआ करती थीबाबा रोजाना पांच घरों से भिक्षा मांगते थे तथा कभी-कभी कुछ अन्य घरों में भी फेली लगाया करते थेबाबा रोटीचावल झोली में लेते और तरल पदार्थ - "सब्जीछाछदालदहीदूध आदि टमरेल (टिन के बने हुए पात्र) में लेते थेइस तरह से वह सब एक हो जातासाधु-संत कभी भी जीभ के स्वाद के लिए भोजन नहीं करतेवे समस्त सामग्री को एक जगह मिलाकर उसका सेवन करते हैं और सदा संतुष्ट रहते हैंबाबा ने भी कभी जीभ के स्वाद के लिए भोजन नहीं किया|



साईं बाबा का भिक्षा मांगने का कोई समय निश्चित नहीं थाकभी-कभी सुबह ही 8-9 बजे भिक्षा मांगने निकल जाते थेइस तरह गांव में घूमने के बाद मस्जिद लौट आतेयह भी उनका नित्य क्रम नहीं थायदि मन हुआ तो जाते और जहां चाहते वहां मांगतेजो भी मिलतावह ले आतेउसी में खुश रहते|



मस्जिद में लौटकर आने के बाद भिक्षा में उन्हें जो कुछ भी मिलता थावह सब एक कुंडी में डाल देतेउस कुंडी में से मस्जिद की साफ़-सफाई करने वालाकौवेचिड़ियाकुत्तेबिल्ली आदि आकर अपना हिस्सा ले जातायदि कोई गरीब या भिखारी आया तो उसे भी उसमें से प्रसाद अवश्य मिलताबाबा सब जीवों के प्रति समान रूप से प्रेमभाव रखते थेइसलिए बाबा ने कभी किसी को मना नहीं कियाबाबा उस भिक्षा पर कभी अपना हक नहीं मानते थे|


परसों  चर्चा करेंगे..बाइजाबाई द्वारा साईं सेवा

ॐ सांई राम
===ॐ साईं श्री साईं जय जय साईं ===

बाबा के श्री चरणों में विनती है कि बाबा अपनी कृपा की वर्षा सदा सब पर बरसाते रहें ।

Tuesday, 17 July 2018

श्री साईं लीलाएं- साईं बाबा की दयालुता

ॐ सांई राम




कल हमने पढ़ा था.. बालक खापर्डे को प्लेग-मुक्ति     

श्री साईं लीलाएं
साईं बाबा की दयालुता
साईं बाबा की अद्भुत चिकित्सा की चारों ओर प्रसिद्धि फैल चुकी थीलोग बहुत दूर-दूर से उनसे अपना इलाज कराने के लिए आया करते थेबाबा स्वयं कष्ट उठाकर दूसरों का कल्याण किया करते थेबाबा की दयालुता और सर्वव्यापकता की चारों ओर चर्चा थी|यह घटना सन् 1910 की हैजब धनतेरस के दिन बाबा अपनी धूनी के पास बैठे आग ताप रहे थे और धूनी को अधिक प्रज्जवलित करने के लिए उसमें लकड़ियां भी डालते जा रहे थेधूनी अपनी पूरी प्रचंडता पर थीकि एकाएक साईं बाबा ने अपने हाथ धूनी में डाल दियेतभी बाबा के भक्त माधवराव देशपांडे (शामा) ने बाबा को धूनी में हाथ डालते देखा तो वह दौड़कर बाबा के पास पहुंचा और बलपूर्वक बाबा को पकड़कर पीछे खींच लियावहां उपस्थित किसी भी भक्त की समझ में बाबा की यह लीला नहीं आयीबाबा के हाथों को देखकर शामा रोता हुआ बोला - "देवा ! यह आपने क्या किया ?" तब बाबा बोले - "यहां से कुछ दूर एक लुहारिन अपनी बच्ची को गोद में लेकर भट्ठी झोंक रही थी तभी पति के बुलाने पर वह उसके पास चली गयीउसकी जरा-सी असावधानी के कारण वह बची फिसलकर भट्ठी में गिर गयीपरमैंने उसे तत्काल भट्ठी में हाथ डालकर निकाल लियाखैरहाथ जला तो मुझे इसकी जरा भी चिंता नहींलेकिन मुझे तसल्ली है कि उस बच्ची के प्राण तो बच गए|" यह सारी घटना शामा ने चाँदोरकर को खत के माध्यम से लिखकर भेजीचाँदोरकर को बाबा के हाथ जलने की घटना का पता चला तो वह मुम्बई के प्रसिद्ध डॉक्टर परमानंद को साईं बाबा की चिकित्सा करने के लिए शिरडी लाएडॉक्टर परमानंद अपने साथ सभी आवश्यक दवाईलेपइंजेक्शन आदि लेकर आये थेमस्जिद पहुंचकर चाँदोरकर ने बाबा के चरण स्पर्श करने के बाद बाबा से विनती की कि वह अपने हाथ का इलाज डॉक्टर परमानंद को करने की अनुमति देंपर बाबा ने स्पष्ट रूप से इलाज कराने से इंकार कर दिया|फिर भी बाबा के परम भक्त भागोजी शिंदे उनके जले हुए हाथ पर घी लगाकर एक पत्ता रखते और पट्टी बांधते थेजिससे बाबा के घाव जल्दी भर जायें और हाथ ठीक हो जाएइसके लिए चाँदोरकर ने बाबा से कई बार विनती की कि वो डॉक्टर परमानंद से अपनी चिकित्सा करवा लेंस्वयं डॉक्टर परमानंद ने भी बाबा से बार-बार आग्रह कियापर बाबा ने चिकित्सा करवाने से यह कहते हुए इंकार कर दिया कि मेरा डॉक्टर तो अल्लाह ही हैइस तरह डॉक्टर परमानंद को बाबा की चिकित्सा करने का मौका न मिल सका|लेकिन कुष्ठ रोगी होने पर भी भागोजी शिंदे का यह अहोभाग्य (अत्यन्त सौभाग्य) था कि बाबा ने उन्हें पट्टी बांधने की अनुमति दे रखी थीवे अपने इस कार्य को पूरी श्रद्धा के साथ कर रहे थेकुछ दिनों में जब घाव भर गया और हाथ पूरी तरह से ठीक हो गयातब सभी भक्तों को अत्यन्त प्रसन्नता हुईफिर भी भागोजी शिंदे द्वारा बाबा के उस हाथ पर घी मलने व पट्टी बांधने का सिलसिला बाबा की महासमाधि लेने तक नियमित रूप से जारी रहावैसे साईं बाबा पूर्ण सिद्ध थेउन्हें किसी भी तरह की चिकित्सा की कोई आवश्यकता न थीफिर भी अपने भक्तों की प्रसन्नता और प्रेमवश उन्होंने भागोजी शिंदे को सेवा करने का अवसर दिया|
कल चर्चा करेंगे..मुझे पंढरपुर जा के रहना है 


ॐ सांई राम
===ॐ साईं श्री साईं जय जय साईं ===
बाबा के श्री चरणों में विनती है कि बाबा अपनी कृपा की वर्षा सदा सब पर बरसाते रहें ।

Monday, 16 July 2018

श्री साईं लीलाएं- बालक खापर्डे को प्लेग-मुक्ति

ॐ सांई राम



कल हमने पढ़ा था.. बाबा द्वारा अद्भुत नेत्र चिकित्सा       

श्री साईं लीलाएं
बालक खापर्डे को प्लेग-मुक्ति
अमरासवती जिले के रहनेवाले दादा साहब खापर्डे की पत्नी श्रीमती खापर्डे अपने छोटे पुत्र के साथ शिरडी में साईं बाबा के दर्शन करने आयी थींउन्हें वहां रहते हुए कई दिन हो गये थेइस बीच एक दिन उनके पुत्र को तेज बुखार चढ़ गयातभी आसपास के गांव में प्लेग भी फैल गया थाइससे श्रीमती खापर्डे अत्यन्त भयभीत हो उठीं - और कहीं उनके पुत्र को प्लेग तो नहीं हो गयाकिसी अनिष्ट की आशंका से उनका समुचित अस्तित्व ही हिल गयाइन बातों को मन में विचारकर उन्होंने तुरंत ही अमरावती लौटने का मन बनाया|संध्या के समय जब साईं बाबा वायु सेवन करने के लिए समाधि मंदिर के पास से होकर जा रहे थेउसी समय श्रीमती खापर्डे बाबा को वहां पर मिलीं और उनसे घर लौटने की अनुमति मांगते हुएआँखों में आँसू लिए हाथ जोड़कर कांपते हुए स्वर में बोलीं - "बाबामेरा प्रिय पुत्र प्लेग रोग से पीड़ित हैइसलिए मैं घर जाना चाहती हूं|"तब बाबा ने श्रीमती खापर्डे से प्रेमपूर्वक कहा कि आकाश में बादल घिर आये हैंबादल हटते ही आसपास पहले की तरफ साफ हो जायेगाऐसा कहते हुए बाबा ने अपनी कफनी कमर तक उठाकर वहां उपस्थित भक्तों को अपनी जांघों पर अंडे की आकार की चार गिल्टियां दिखाते हुए कहा कि देखोमुझे अपने भक्तों का कितना कष्ट उठाना पड़ता हैउनके कष्ट मेरे ही कष्ट हैंमैं उन्हें दु:खी नहीं देख सकता हूंसाईं बाबा की ऐसी विचित्र व असामान्य लीला देखकर लोगों का यह विश्वास और भी दृढ़ हो गया कि सद्गुरु को अपने भक्तों के लिए कितने कष्ट उठाने पड़ते हैं|

कल चर्चा करेंगे..साईं बाबा की दयालुता    


ॐ सांई राम
===ॐ साईं श्री साईं जय जय साईं ===
बाबा के श्री चरणों में विनती है कि बाबा अपनी कृपा की वर्षा सदा सब पर बरसाते रहें ।

Sunday, 15 July 2018

श्री साईं लीलाएं- बाबा द्वारा अद्भुत नेत्र चिकित्सा

ॐ सांई राम



कल हमने पढ़ा था.. मस्जिद का पुनः निर्माण और बाबा का गुस्सा       

श्री साईं लीलाएं
बाबा द्वारा अद्भुत नेत्र चिकित्सा
साईं बाबा अपने जीवन के पूर्वाध्र्द में शिरडीवासियों की चिकित्सा भी किया करते थेउनके द्वारा दी जाने वाली औषधि से रोगी शीघ्र ही रोगमुक्त हो जाया करते थेइसी वजह से साईं बाबा एक कुशल चिकित्सक के रूप में भी प्रसिद्ध हो गएबाबा की चिकित्सा करने की पद्धति भी अद्भुत थी|

एक बार साईं बाबा के एक भक्त की आँखें लाल हो गयीं और उनमें सूजन भी पैदा हो गयीशिरडी जैसे छोटे-से गांव में आँखों की चिकित्सा करने वाला कोई चिकित्सक न था और उसकी आर्थिक स्थिति ऐसी न थी कि वह किसी बड़े शहर में जाकर अपनी चिकित्सा करातातब उसकी हालात देखकर बाबा के अन्य भक्तों ने उसे बाबा के पास जाने को कहाफिर वह साईं बाबा के पास गया और उन्हें अपनी समस्या के बारे में बताया|तब बाबा ने भिलावा को पीसकर उसके दो गोले बनाये और उन्हें उसकी आँखों पर रखकर ऊपर से पट्टी बांध दीफिर अगले दिन पट्टी खोलकर आँखों पर ताजे पानी की छींटे मारेबाबा की इस अद्भुत चिकित्सा से उसकी सूजन मिट गयी और आँखें भी ठीक हो गयींइस तरह से बाबा ने अपनी अनोखी चिकित्सा पद्धति से अनेक रोगियों को स्वस्थ किया|


कल चर्चा करेंगे..
बालक खापर्डे को प्लेग मुक्ति


ॐ सांई राम
===ॐ साईं श्री साईं जय जय साईं ===
बाबा के श्री चरणों में विनती है कि बाबा अपनी कृपा की वर्षा सदा सब पर बरसाते रहें ।

Saturday, 14 July 2018

श्री साईं लीलाएं- मस्जिद का पुनः निर्माण और बाबा का गुस्सा

ॐ सांई राम




कल हमने पढ़ा था.. रामनवमी के दिन शिरडी का मेला       

श्री साईं लीलाएं

मस्जिद का पुनः निर्माण और बाबा का गुस्सा

गोपालराव गुंड की एक इच्छा तो पूर्ण हो गई थीउसी तरह उनकी एक और इच्छा भी थी कि मस्जिद का पुनर्निर्माण का कार्य भी कराना चाहिएअपने इस विचार को साकार रूप देने के लिए उन्होंने पत्थर इकट्टा करके उन्हें वर्गाकार बनवाया थालेकिन इस कार्य का श्रेय उन्हें प्राप्त नहीं हुआशायद बाबा की इच्छा न थीमस्जिद के पुनर्निर्माण का श्रेय नाना साहब चाँदोरकर को मिला और आंगन के कार्य का श्रेय काका साहब दीक्षित को मिलाबाबा की शायद यही इच्छा थी कि यह कार्य इन कार्यों को अनुमति नहीं दी थी|
बाबा से अनुमति प्राप्त करने के पश्चात् देखते-ही-देखते एक ही रात में मस्जिद का पूरा आंगन बनकर तैयार हो गयाफिर भी साईं बाबा अपने उसी टाट के टुकड़े के आसन पर ही बैठते थेबाद में टाट के टुकड़े को वहां से हटाकर उसकी जगह पर एक छोटी-सी गद्दी बिच्छा दी गयी| 1911 में बाबा के भक्तों ने भरपूर मेहनत करके सभामंडप को भी बना दिया थाक्योंकि मस्जिद का आंगन छोटा था और भक्तों की संख्या अधिक होने पर असुविधा होती थीकाका साहब दीक्षित आंगन को विस्तार देकर छप्पर बनवाने की इच्छा रखते थेइसलिए उन्होंने आवश्यकतानुसार धन खर्च करके लोहे की बल्लियां आदि खरीद लींउस समय बाबा एक रात मस्जिद चावड़ी में बिताते और सुबह को मस्जिद में लौट आते थेयह बात सबको पता थीभक्तों ने घोर परिश्रम करके लोहे के खम्बों को गाड़ापर अगले दिन सुबह को चावड़ी से लौटते साईं बाबा ने उन खम्बों को उखाड़कर फेंक दिया और क्रोधित हो गए|गुस्से में बाबा एक हाथ से लोहे के खम्बे उखाड़ने लगे और दूसरे हाथ से तात्या के सिर पर से कपड़ा उतारकर उसमें आग लगाकर गड्ढे में फेंक दियाबाद में उन्होंने अपनी जेब से एक रुपये का सिक्का निकालकर उसे भी गड्ढे में डाल दियाउस समय बाबा के क्रोध के मारे नेत्र अंगारे की तरह लाल सुर्ख हो रहे थेबाबा का ऐसा विकराल रूप देखकर कोई भी उनके सामने आंख उठाकर देखने का साहस ने जुटा सकासभी उपस्थित लोग बड़े भयभीत होकर मन ही मन में बहुत घबरा रहे थे कि अब क्या होने वाला है बाबा के इस रूप को देखकर कोई भी कुछ पूछने अथवा बाबा को मनाने की हिम्मत न जुटा सका|आखिर में बाबा का एक भक्त भागोजी शिंदे जो कुष्ठ रोग से ग्रस्त थेबाबा को मनाने के लिए साहस करके आगे बढ़े तो बाबा ने उसकी जमकर पिटाई कीमाधवराव देशपांड़े (शामा) उन्हें समझाने गये तो उसके साथ भी कुछ ऐसा ही हुआक्रोधावेश में बाबा ईंट के टुकड़े उठाकर फेंकने लगेजो भी बाबा को मनाने के लिए आगे बढ़ा उसी की दुर्गति हुई|कुछ देर बाद साईं बाबा का क्रोध स्वयं ही शांत हो गयातब बाबा ने वहां खड़े भक्तों में से एक दुकानदार को बुलाया और एक जरी वाला रूमाल खरीदकर उसे खुद अपने हाथों से तात्या के सिर पर बांधाबाबा का ऐसा विचित्र व्यवहार देखकर उपस्थित भक्तों को बड़ा अचम्भा हुआउन्हें बाबा के एकाएक गुस्सा होने और तात्या को पीट डालने तथा फिर क्रोध के शांत हो जाने पर तात्या का प्यार दर्शाना कुछ भी समझ में नहीं आयाउसके बाद बाबा की कृपा से सभागृह के निर्माण का कार्य शीघ्र ही पूरा हो गया|कई बार ऐसा देखने आया था कि बाबा कभी-कभी बिना किसी कारण के एकाएक क्रोधित हो जाते थेतो पल भर में ही शांत भी हो जाया करते थे|
कल चर्चा करेंगे..बाबा द्वारा अद्भुत नेत्र चिकित्सा   


ॐ सांई राम
===ॐ साईं श्री साईं जय जय साईं ===
बाबा के श्री चरणों में विनती है कि बाबा अपनी कृपा की वर्षा सदा सब पर बरसाते रहें ।

Friday, 13 July 2018

श्री साईं लीलाएं- रामनवमी के दिन शिरडी का मेला

ॐ सांई राम



परसों हमने पढ़ा था.. श्री साईं विट्ठल का दर्शन देना      

श्री साईं लीलाएं

रामनवमी के दिन शिरडी का मेला
     

साईं बाबा के एक भक्त कोपर गांव में रहते थेउनका नाम गोपालराव गुंड थाउन्होंने संतान न होने के कारण तीन-तीन विवाह कियेफिर भी उन्हें संतान सुख प्राप्त न हुआअपनी साईं भक्ति के परिणामस्वरूप उन्हें साईं बाबा के आशीर्वाद से एक पुत्र संतान की प्राप्ति हुईपुत्र संतान पाकर उनकी खुशी का कोई ठिकाना न रहा|


गोपालराव गुंड को सन् 1897 में पुत्र की प्राप्ति हुई थीपुत्र-प्राप्ति की खुशी में उनके मन में यह विचार आया कि शिरडी में उन्हें कोई मेला या उर्स अवश्य लगवाना चाहिएअपने इस विचार के बारे में उन्होंने शिरडी में रहने वाले साईं भक्त तात्या पाटिलदादा कोते पाटिलमाधवराज आदि से मिलकर उन्हें अपने विचारों से अगवत करायाउन सभी को यह विचार बड़ा पसंद आयाफिर उन्हें इस बारे में साईं बाबा की अनुमति और आश्वासन भी मिल गयालेकिन मेला लगाने के लिए सरकारी अनुमति प्राप्त करना भी आवश्यक थाफिर इसके लिए एक पत्र कलेक्टर को भेजा गयापरन्तु गांव के पटवारी ने उस पर अपनी आपत्ति जता दीइसलिए अनुमति नहीं मिल सकी|

इसके बारे में साईं बाबा की अनुमति पहले ही प्राप्त हो चुकी थीअत: इसके बारे में एक बार फिर से कोशिश की गयीइस बार सरकारी अनुमति बिना किसी परेशानी के मिल गयीइस तरह से साईं बाबा की आज्ञा से रामनवमी वाले दिन उर्स भरने का निर्णय हुआरामनवमी के दिन उर्स भरना हिन्दू-मुस्लिम एकता का प्रतीक थायह अद्देश्य पूर्ण रूप से सफल रहाइस अवसर पर कच्ची दुकानें बनाई गईं और कुश्तियां भी आयोजित की गईंरामनवमी वाले दिन साईं बाबा का पूजनभजनगायनवाद्य यंत्रों की मधुर ध्वनि के साथ ध्वजों को लहराते हुए संचालन किया गयाउस दिन शिरडी में सभी दिशाओं से तीर्थयात्रा इस उत्सव को मनाने के लिए शिरडी में आये|

गोपालराव गुंड के एक मित्र घमूअण्णा कासार जो अहमदनगर में रहा करते थेवे भी नि:संतान थेउन्हें भी साईं बाबा के आशीर्वाद से पुत्ररत्न की प्राप्ति हुई थीइसलिए गोपालराव ने उनसे भी उर्स के लिए एक ध्वज देने को कहाएक अन्य ध्वज जागीरदार नाना साहब निमोलकर ने दियादोनों ध्वजों को बड़े धूमधाम के साथ पूरे गांव से निकालने के बाद मस्जिद तक पहुंचा दिया गयाफिर उन्हें मस्जिद के दोनों कोनों पर फहरा दिया गयातब से लेकर यह परम्परा आज तक उसी तरह से चली आ रही हैसन् 1911 से इस मेले में राम-जन्म का उत्सव भी मनाया जाने लगा है|



कल चर्चा करेंगे..मस्जिद का पुनः निर्माण और बाबा का गुस्सा   


ॐ सांई राम
===ॐ साईं श्री साईं जय जय साईं ===
बाबा के श्री चरणों में विनती है कि बाबा अपनी कृपा की वर्षा सदा सब पर बरसाते रहें ।

For Donation

For donation of Fund/ Food/ Clothes (New/ Used), for needy people specially leprosy patients' society and for the marriage of orphan girls, as they are totally depended on us.

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A/c. No - 200003513754 / IFSC - INDB0000036

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Gautam Budh Nagar, Uttar Pradesh. INDIA.