शिर्डी के साँई बाबा जी की समाधी और बूटी वाड़ा मंदिर में दर्शनों एंव आरतियों का समय....

"ॐ श्री साँई राम जी
समाधी मंदिर के रोज़ाना के कार्यक्रम

मंदिर के कपाट खुलने का समय प्रात: 4:00 बजे

कांकड़ आरती प्रात: 4:30 बजे

मंगल स्नान प्रात: 5:00 बजे
छोटी आरती प्रात: 5:40 बजे

दर्शन प्रारम्भ प्रात: 6:00 बजे
अभिषेक प्रात: 9:00 बजे
मध्यान आरती दोपहर: 12:00 बजे
धूप आरती साँयकाल: 5:45 बजे
शेज आरती रात्री काल: 10:30 बजे

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निर्देशित आरतियों के समय से आधा घंटा पह्ले से ले कर आधा घंटा बाद तक दर्शनों की कतारे रोक ली जाती है। यदि आप दर्शनों के लिये जा रहे है तो इन समयों को ध्यान में रखें।

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Monday, 4 April 2016

साँई इस मन में बस तू ही तू

हजार महफिले है लाख मेले है,
पर "तू" जहाँ नहीं हम अकेले ही अकेले है !!

एक कदम भी चलता हूँ तन्हा तो
साँई तेरे होने का एहसास होता हैं
और जब तुम साथ में चलते हो तो
मीलों लंबा सफर पल में पार होता हैं

सिर पर हाथ दया का रख दो मेरे साँई
तो एक पल में सौ जीवन जी जाता हूँ
खजाने भरे हुए हो तो भिखारी लगता हूँ
तेरी उदी से ही बादशाहत पा जाता हूँ

महफिल की रंगत कैसी होनी चाहिए
वो तेरे दरबार की शान ब्यान करती हैं
कशिश तुमको देख भर लेने की बाबा
रग रग में इक नया जोश सा भरती हैं

शहंशाह भी आ कर दर पर तेरे झुकते हैं
सूरज-चाँद-तारे भी तेरे इशारे पर चलते हैं
जाने क्यों बेताब रहते हैं हर पल मन में
आँखे बंद कर के भी तेरा दीदार करते हैं

हमारे सपनों में आया कीजिये

ॐ साईं राम




हमारे सपनों में आया कीजिये,
हमें ऐसे न भुलाया कीजिये,
अपने चरणों में बिठाया कीजिये,
बाबा हमें शिर्डी बुलाया कीजिये ।
छोड़ दें जब मुझे मेरे अपने और पराये,
तब अपना पावन हाथ बढ़ाया कीजिये,
मुझे गले से लगाया कीजिये,
अपनी रहमत का एहसास दिलाया कीजिये,
बाबा हमे शिर्डी बुलाया कीजिये ।


मैं जीवन भर सोता रहा,
बस यूँ ही पल खोता रहा,
मेरी जिव्हा को अपना नाम रटाया कीजिये,
मेरी आँखों में हरदम समाया कीजिये,
बाबा हमें शिर्डी बुलाया कीजिये ।
इतने बड़े जहान में मैं इक अनजान मुसाफिर,
न कोई जाने न पहचाने कम से कम इक बार,
मेरा नाम पुकारा कीजिये मुझे आपने बुलाया,
ऐसा स्वपन दिखाया कीजिये,
बाबा हमें शिर्डी बुलाया कीजिये ।

हमारे सपनों में आया कीजिये,
हमें ऐसे न भुलाया कीजिये,
अपने चरणों में बिठाया कीजिये,
बाबा हमें शिर्डी बुलाया कीजिये ।


-: आज का साईं सन्देश :-

हाथ जोड़ विनती करें,
ईश्वर करो सहाय ।
बाबाजी की कृपा हो,
साईं चरित लिखाय ।।

पहले भी रचना हुई,
कई भक्त लिख जाय ।
ऐसे ही इक दास गणु,
भजनों में गा जाय ।।

Sunday, 3 April 2016

साईं सच्चरित्र सार

ॐ साईं राम



जिस तरह कीड़ा कपड़ो को कुतर डालता है,
उसी तरह इर्ष्या मनुष्य को

क्रोध मुर्खता से शुरू होता है और पश्चाताप पर खत्म होता है

नम्रता से देवता भी मनुष्य के वश में हो जाते है

सम्पन्नता मित्रता बढाती है, विपदा उनकी परख करती है

एक बार निकले बोल वापस नहीं आ सकते, इसलिए सोच कर बोलो

तलवार की धार उतनी तेज नहीं होती, जितनी जिव्हा की

धीरज के सामने भयंकर संकट भी धूएं के बादलों की तरह उड़ जाते है

तीन सचे मित्र है - बूढी पत्नी, पुराना कुत्ता और पास का धन

मनुष्य के तीन सद्गुण है - आशा, विश्वास और दान

घर में मेल होना पृथ्वी पर स्वर्ग के सामान है

मनुष्य की महत्ता उसके कपड़ो से नहीं वरण उसके आचरण से जानी जाती है

दूसरों के हित के लिए अपने सुख का भी त्याग करना सच्ची सेवा है

भूत से प्रेरणा लेकर वर्त्तमान में भविष्य का चिंतन करना चाहिए
जब तुम किसी की सेवा करो तब उसकी त्रुटियों को देख कर उससे घृणा नहीं करनी चाहिए

मनुष्य के रूप में परमात्मा सदा हमारे साथ सामने है, उनकी सेवा करो

अँधा वह नहीं जिसकी आंखे नहीं है, अँधा वह है जो अपने दोषों को ढकता है

चिंता से रूप, बल और ज्ञान का नाश होता है

दूसरों को गिराने की कोशिश में तुम स्वयं गिर जाओगे

प्रेम मनुष्य को अपनी तरफ खींचने वाला चुम्बक है
 



-: आज का साईं सन्देश :-

शंकित मन हेमांड जी,
कैसे हो ये काम ।
मेरी बुद्धि अल्प है,
दीर्घ साईं नाम ।।

वेद सभी न कर सकें,
जब वर्णन अवतार ।
लिखने में साईं चरित,
पन्त होय लाचार ।।

Saturday, 2 April 2016

श्री साईं कष्ट निवारण मंत्र

ॐ साईं राम


कष्टों की काली छाया दुखदायी है, जीवन में घोर उदासी लाई है ।
संकट को टालो सांई दुहाई है, तेरे सिवा ना कोई सहाई है ।
मेरे मन तेरी मूरत समाई है, हर पल हर क्षण महिमा गाई है ।
घर मेरे कष्टों की आँधी आई है, आपने क्यों मेरी सुध भुलाई है ।
तुम भोले नाथ हो दया निधान हो, तुम हनुमान हो महा बलवान हो ।
तुम्ही हो राम और तुम्ही श्याम हो, सारे जगत में तुम सबसे महान हो ।

Friday, 1 April 2016

चले साईं के देस

ॐ साईं राम


 हम मतवाले हैं
चले साईं के देस
यहाँ सभी को चैन मिलेगा
कभी न लागे ठेस
फूल-सी धरती बनती जाए
एक पिघलता लावा
पहन रही पगली दुनिया
अग्नि का पहरावा
जाने अभी ये बन्दे तेरे
बदले कितने भेस 
हम मतवाले हैं ........

देखो अपनी हार मुश्किल है
आज समस्या उसकी
चलो चलें चरणों में सोकर
करें तपस्या उसकी
किस सपने में, कब मिल जाए
प्रेम भरा सन्देश
हम मतवाले हैं ........

हमें न है कुछ फिक्र आज की
ना अंदेशा कल का
मनका-मनका जपते कर लिया
मन का बोझा हल्का
दो दिन की बहरूपि दुनिया
असल में है परदेस
हम मतवाले हैं .....

 -: आज का साईं सन्देश :-

मधुर मधुर लीला कई,
बाबाजी कर जाय ।
ख़ुशी पन्त हेमांड जी,
फूले नहीं समाय ।।

अब उनके हृदय कई,
उठने लगे विचार ।
शिक्षा सद्गुरु साईं की,
कैसे करूँ प्रचार ।।

For Donation

For donation of Fund/ Food/ Clothes (New/ Used), for needy people specially leprosy patients' society and for the marriage of orphan girls, as they are totally depended on us.

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Gautam Budh Nagar, Uttar Pradesh. INDIA.

बाबा के 11 वचन

ॐ साईं राम

1. जो शिरडी में आएगा, आपद दूर भगाएगा
2. चढ़े समाधी की सीढी पर, पैर तले दुःख की पीढ़ी कर
3. त्याग शरीर चला जाऊंगा, भक्त हेतु दौडा आऊंगा
4. मन में रखना द्रढ विश्वास, करे समाधी पूरी आस
5. मुझे सदा ही जीवत जानो, अनुभव करो सत्य पहचानो
6. मेरी शरण आ खाली जाए, हो कोई तो मुझे बताए
7. जैसा भाव रहे जिस जन का, वैसा रूप हुआ मेरे मनका
8. भार तुम्हारा मुझ पर होगा, वचन न मेरा झूठा होगा
9. आ सहायता लो भरपूर, जो माँगा वो नही है दूर
10. मुझ में लीन वचन मन काया, उसका ऋण न कभी चुकाया
11. धन्य-धन्य व भक्त अनन्य, मेरी शरण तज जिसे न अन्य

.....श्री सच्चिदानंद सदगुरू साईनाथ महाराज की जय.....

गायत्री मंत्र

ॐ भूर्भुवः॒ स्वः॒
तत्स॑वितुर्वरे॑ण्यम्
भ॒र्गो॑ दे॒वस्य॑ धीमहि।
धियो॒ यो नः॑ प्रचो॒दया॑त्॥

Word Meaning of the Gayatri Mantra

ॐ Aum = Brahma ;
भूर् bhoor = the earth;
भुवः bhuwah = bhuvarloka, the air (vaayu-maNdal)
स्वः swaha = svarga, heaven;
तत् tat = that ;
सवितुर् savitur = Sun, God;
वरेण्यम् varenyam = adopt(able), follow;
भर्गो bhargo = energy (sin destroying power);
देवस्य devasya = of the deity;
धीमहि dheemahi = meditate or imbibe

these first nine words describe the glory of Goddheemahi = may imbibe ; pertains to meditation

धियो dhiyo = mind, the intellect;
यो yo = Who (God);
नः nah = our ;
प्रचोदयात prachodayat = inspire, awaken!"

dhiyo yo naha prachodayat" is a prayer to God


भू:, भुव: और स्व: के उस वरण करने योग्य (सूर्य) देवता,,, की (बुराईयों का नाश करने वाली) शक्तियों (देवता की) का ध्यान करें (करते हैं),,, वह (जो) हमारी बुद्धि को प्रेरित/जाग्रत करे (करेगा/करता है)।


Simply :

तीनों लोकों के उस वरण करने योग्य देवता की शक्तियों का ध्यान करते हैं, वह हमारी बुद्धि को प्रेरित करे।


The God (Sun) of the Earth, Atmosphere and Space, who is to be followed, we meditate on his power, (may) He inspire(s) our intellect.