शिर्डी के साँई बाबा जी की समाधी और बूटी वाड़ा मंदिर में दर्शनों एंव आरतियों का समय....

"ॐ श्री साँई राम जी
समाधी मंदिर के रोज़ाना के कार्यक्रम

मंदिर के कपाट खुलने का समय प्रात: 4:00 बजे

कांकड़ आरती प्रात: 4:30 बजे

मंगल स्नान प्रात: 5:00 बजे
छोटी आरती प्रात: 5:40 बजे

दर्शन प्रारम्भ प्रात: 6:00 बजे
अभिषेक प्रात: 9:00 बजे
मध्यान आरती दोपहर: 12:00 बजे
धूप आरती साँयकाल: 7:00 बजे
शेज आरती रात्री काल: 10:30 बजे

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निर्देशित आरतियों के समय से आधा घंटा पह्ले से ले कर आधा घंटा बाद तक दर्शनों की कतारे रोक ली जाती है। यदि आप दर्शनों के लिये जा रहे है तो इन समयों को ध्यान में रखें।

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Saturday, 3 January 2015

श्री गुरु तेग बहादर जी – साखियाँ - जिमींदार द्वारा गुरु के वचनों की उलंघना करना

श्री गुरु तेग बहादर जी – साखियाँ






जिमींदार द्वारा गुरु के वचनों की उलंघना करना

एक जिमींदार गुरु तेग बहादर जी की बड़ी श्रद्धा के साथ सेवा करता था| गुरु जी उसकी सेवा पर बहुत खुश थे| उसकी सेवा पर खुश होकर गुरु जी ने वह सारी भेंटा उसको दे दी जो संगत की तरफ से आई थी| गुरु जी ने साथ-साथ यह भी वचन किया कि इस धन से कूआँ लगवाओ और इसके साथ-साथ ही धर्मशाला भी बनवाओ| इसके साथ आपको और कुछ भी करना है| पास ही फलदार वृक्षों का बाग लगवाओ| साथ ही साथ गुरु जी ने यह भी कहा कि इस धन के लालच में मत पड़ना| अगर आप इन्हें अन्य प्रकार से खर्च करोगे तो सब कुछ निष्फल हो जाएगा|

जब गुरु जी चले गए तो जिमींदार को लालच आ गया| उसने लोभ में आकर उस धन का कूआँ अपनी खेती में लगवाने की सलाह कर ली| उसने कारीगरों को बुलाया| कारीगरों को बुलाकर कूएँ का पाड़ खुदवाया| उसमे चक्क उतारा| तो वह वहाँ ही ठहर गया| बहुत जोर लगाया पर चक्क नीचे ना उतरा|

इस कूएँ की खुडल आज तक जिमींदार के खेत में उजाड़ है| इस तरह गुरु जी के वचनों की उलंघना करके जिमींदार ने यह सारा धन ही निष्फल गँवा लिया|

Friday, 2 January 2015

श्री गुरु तेग बहादर जी – साखियाँ - सिंघा द्वारा गुरु का वचन मानना

श्री गुरु तेग बहादर जी – साखियाँ




सिंघा द्वारा गुरु का वचन मानना

अलीशेर से गुरु जी जोगे गाँव आए| आप ने भोपाला गाँव में डेरा लगाया| वहाँ रात ठहर कार आप खीवा कलां जा ठहरे| इस गाँव का एक किसान रोज आपके दर्शन को आता| वह तीन घड़ी बैठा भी रहता| परन्तु एक दिन वह माथा टेक कर झटपट ही उठकर चला गया|गुरु जी ने उससे इसका कारण पूछा कि आज आप जल्दी क्यों जा रहे हो?

सिंघा ने कहा कि गुरु जी आज एक व्यक्ति के यहाँ सगाई है| वहाँ सबको गुड़ मिलना है| मुझे भी अपने हिस्से का गुड़ लेने जाना है| गुरु जी ने वचन किया कि आप यहाँ धैर्य सहित बैठे रहे| आपको घर बैठे ही दो बाँटने आ जाया करेंगे| गुरु जी का वचन सुनकर सिंघा वहीं बैठा रहा|

उधर जिसके घर सगाई थी, जब उसे इस बात का ज्ञान हुआ कि सिंघा गुरु जी के पास बैठा है तो गाँव के चौधरी ने कहा कि साधू संत के पास जाना ठीक है| आगे से तुम्हें उसे दो बाँटने वाले दिया करो| यदि वह खुद ना लेने आए तो उसके घर दे आया करो| उस दिन से सिंघा को दो बाँटने वाले मिलने लगे|

सिंघा के बिना इस गाँव का और कोई भी आदमी गुरु जी के दर्शन करने नहीं आया| सिंघा बहुत प्रसन्न था कि उसने गुरु जी के वचनों को मानकर कितना अच्छा किया|

Thursday, 1 January 2015

श्री साई सच्चरित्र - अध्याय 10

ॐ सांई राम



आप सभी को शिर्डी के साँईं बाबा ग्रुप की और से साईं-वार की हार्दिक शुभ कामनाएं |
हम प्रत्येक साईं-वार के दिन आप के समक्ष बाबा जी की जीवनी पर आधारित श्री साईं सच्चित्र का एक अध्याय प्रस्तुत करने के लिए श्री साईं जी से अनुमति चाहते है |
हमें आशा है की हमारा यह कदम घर घर तक श्री साईं सच्चित्र का सन्देश पंहुचा कर हमें सुख और शान्ति का अनुभव करवाएगा| किसी भी प्रकार की त्रुटी के लिए हम सर्वप्रथम श्री साईं चरणों में क्षमा याचना करते है|

श्री साई सच्चरित्र - अध्याय 10
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श्री साईबाबा का रहन सहन, शयन पटिया, शिरडी में निवास, उनके उपदेश, उनकी विनयशीनता, सुगम पथ ।
प्रारम्भ
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Wednesday, 31 December 2014

श्री गुरु तेग बहादर जी – साखियाँ - फग्गू का प्रेम

श्री गुरु तेग बहादर जी – साखियाँ







फग्गू का प्रेम

काशी से गुरु तेग बहादर जी सासाराम शहर की ओर चाल पड़े| वहाँ पहुँच कर आपने गुरु घर के एक मसंद सिख फग्गू की चिरकाल से दर्शन करने की भावना को पूरा करने के लिए गए| भाई फग्गू ने एक मकान बनवाया| उसने उसका दरवाज़ा बहुत बड़ा रखवाया| उसके आगे एक खुला आँगन भी रखा हुआ था|

लोगों ने फग्गू से जब इसका कारण पूछा कि उसके मकान बनवाकर उसका दरवाज़ा इतना बड़ा क्यों रखा है? फग्गू ने उनका उत्तर दिया कि यह मैंने गुरु जी के लिए बनवाया है| जब वह मेरे घर में आयेगें तब वह घोड़े पर सवार होकर आयेगें| उन्हें बाहर नहीं उतरना पड़ेगा| वह घोड़े पर बैठे-बैठे ही मेरे घर के अंदर आ जाये इसलिए मैंने दरवाज़ा खुला रखवाया है|

फग्गू की इस श्रद्धा भावना को अन्तर्यामी गुरु जान गए| वह रास्ते में सभी को दर्शन देते हुए फग्गू के घर में जा पहुँचे| आप एक दम ही पहुँच गए जिसको देखकर फग्गू बहुत खुश हुआ| उसने गुरु जी के चरणों पर माथा टेका| फिर गुरु जी को पलंघ पर बिठाया जो की उसने विशेष रूप से गुरु जी के लिए ही तैयार किया था| गुरु जी कुछ दिन वहाँ रुके| वह फग्गू की श्रद्धा व प्रेम से की हुई सेवा से प्रसन्न हुए| प्रसन्न होकर आपने फग्गू ब्रह्म ज्ञान की दात बक्शी और उसको निहाल किया| इस नगर के बाहर गुरु जी को एक बाग भी संगत ने भेंट किया, जो कि गुरु का बाग करके प्रसिद्ध है|

Tuesday, 30 December 2014

श्री गुरु तेग बहादर जी – साखियाँ - आसाम के राजा राम राय को पुत्र का वरदान

श्री गुरु तेग बहादर जी – साखियाँ





आसाम के राजा राम राय को पुत्र का वरदान

गुरु तेग बहादर जी की महिमा सुनकर आसाम देश का राजा अपनी रानी सहित गुरु जी की शरण में आया| उसने गुरु जी के आगे भेंट आदि अर्पण की| भेंट अर्पण करने के पश्चात उसने प्रार्थना की कि महाराज! मेरे पास कोई औलाद नहीं है| मुझे पुत्र का वरदान दो जो हमारे राज्य का मालिक बने|

गुरु जी राजे तथा रानी की श्रद्धा व प्रेम पर प्रसन्न हुए| प्रसन्न होकर गुरु जी ने वचन किया कि आपके घर एक धर्मात्मा तथा उदारचित पुत्र होगा| गुरु जी से ऐसा आशीर्वाद लेकर राजा व रानी बहुत प्रसन्न हुए|

यह वचन करके गुरु जी ने अपने हाथ की मोहर का एक निशान राजे के माथे पर लगाकर कहा कि ऐसा निशान आपके घर होने वाले पुत्र के माथे पर भी होगा| तब तुम यह समझ लेना कि यह पुत्र गुरु घर की कृपा है|

गुरु जी के ऐसे वचन सुनकर उनकी खुशी का ठिकाना न रहा| वह बहुत प्रसन्न थे| गुरु जी का चरणामृत लेकर उन्होंने सिखी धारण कर ली| गुरु जी के आशीर्वाद से उनके घर पुत्र पैदा हुआ|

Monday, 29 December 2014

श्री गुरु तेग बहादर जी – साखियाँ - गुरु वचन मानने में ही सुख

श्री गुरु तेग बहादर जी – साखियाँ





गुरु वचन मानने में ही सुख

श्री गुरु तेग बहादर जी कैथल विश्राम करके बारने गाँव आ गये| इस गाँव के बाहर ही ठहर कर गुरु जी ने पुछा कि यहाँ कोई गुरु नानक देव जी का सिख रहता है? उसने कहा महाराज! यहाँ जिमींदार सिख रहता है|गुरु जी ने उसे बुलाने के लिए कहा|यह आदमी जाकर जिमींदार को बुला लाया|

उसने आकर गुरु जी के चरणों पर माथा टेका|उसने यह भी प्रार्थना की कि मेरे घर आकर विश्राम करो| तब तक मैं अपनी खेती कि कूत (मिनती) करा आऊँ| गुरु जी ने उसे कहा कि आप हमारे साथ घर चले|तुम्हारी खेती का गुरु रखवाला है| तुम कूत कराने ना जाओ|

जिमींदार ने वचन को काटते हुए कहा कि महाराज! आप चले जाये, हम शीघ्र ही आ जायेंगे| ऐसा कहता हुआ वह सिख वहाँ से चल दिया|
जब उसके खेत कि कूत हुई तो पहले वह दो सौ विघा थी, अब वह सौ विघा हो गई|उसके शरीको ने कहा कि कूत करने वाला रिश्वत खा गया है|कूत दुबारा होनी चाहिए|जब खेती कि दुबारा कूत हुई तो वह सौ विघा ही निकली|इस बात से उसे गुरु जी पर विश्वास हो गया कि उसे वचन नहीं काटना चाहिए था|उसने गुरु जी के चरणों पर माथा टेका|उसने सारी बात गुरु जी को बताई|

गुरु जी प्रातकाल उठकर स्नान किया और उसे वचन किया कि आज से आप तम्बाकू पीना छोड़ दो व सिक्ख संगतो कि स्सेवा किया करो| तुम्हारा परलोक सुधर जायेगा|तुम्हारा वंश जब तक हुक्के का त्याग करके खेती करेगा तब तक बहुत बढेगा|परन्तु यदि हूका तम्बाकू पीना आरम्भ कर देगा,तो कंगाल हो जायेगा| सारा धन भी जाता रहेगा|गुरु जी का वचन मानकर जिमींदार ने गुरु जी के चरणों पर माथा टेका और हुक्का पीना छोड़ दिया|

भाई संतोख जी लिखते है कि यह हमने अपनी आँखों से देखा कि जब उसकी कुल का एक आदमी हुक्का पीने लगा तो वह अति गरीब हो गया|

Sunday, 28 December 2014

श्री गुरु तेग बहादर जी – साखियाँ - श्री दसमेश जी का गर्भ प्रवेश

श्री गुरु तेग बहादर जी – साखियाँ





श्री दसमेश जी का गर्भ प्रवेश

प्राग राज के निवास समय एक दिन माता नानकी जी ने स्वाभाविक श्री गुरु तेग बहादर जी को कहा कि बेटा! आप जी के पिता ने एक बार मुझे वचन दिया था कि तेरे घर तलवार का धनी बड़ा प्रतापी शूरवीर पोत्र इश्वर का अवतार होगा|मैं उनके वचनों को याद करके प्रतीक्षा कर रही हूँ कि आपके पुत्र का मुँह मैं कब देखूँगी| बेटा जी! मेरी यह मुराद पूरी करो,जिससे मुझे सुख कि प्राप्ति हो| 

अपनी माता जी के यह मीठे वचन सुनकर गुरु जी ने वचन किया कि माता जी! आप जी का मनोरथ पूरा करना अकाल पुरख के हाथ मैं है|हमें भरोसा है कि आप के घर तेज प्रतापी ब्रह्मज्ञानी पोत्र देंगे|

गुरु जी के ऐसे आशावादी वचन सुनकर माता जी बहुत प्रसन्न हुए|माता जी के मनोरथ को पूरा करने के लिए गुरु जी नित्य प्रति प्रातकाल त्रिवेणी स्नान करके अंतर्ध्यान हो कर वृति जोड़ कर बैठ जाते व पुत्र प्राप्ति के लिए अकाल पुरुष कि आराधना करते|

गुरु जी कि नित्य आराधना और याचना अकाल पुरख के दरबार में स्वीकार हो गई|उसुने हेमकुंट के महा तपस्वी दुष्ट दमन को आप जी के घर माता गुजरी जी के गर्भ में जन्म लेने कि आज्ञा की|जिसे स्वीकार करके श्री दमन (दसमेश) जी ने अपनी माता गुजरी जी के गर्भ में आकर प्रवेश किया

श्री दसमेश जी अपनी जीवन कथा बचितर नाटक में लिखते है-

चौपाई 

मुर पित पूरब कीयसि पयाना|| भांति भांति के तीरथि नाना||
जब ही जात त्रिबेणी भए ||पुन्न दान दिन करत बितए||१||
तही प्रकास हमारा भयो|| पटना सहर बिखे भव लयो||२||
(दशम ग्रन्थ :बिचित्र नाटक ,७वा अध्याय)

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