शिर्डी के साँई बाबा जी की समाधी और बूटी वाड़ा मंदिर में दर्शनों एंव आरतियों का समय....

"ॐ श्री साँई राम जी
समाधी मंदिर के रोज़ाना के कार्यक्रम

मंदिर के कपाट खुलने का समय प्रात: 4:00 बजे

कांकड़ आरती प्रात: 4:30 बजे

मंगल स्नान प्रात: 5:00 बजे
छोटी आरती प्रात: 5:40 बजे

दर्शन प्रारम्भ प्रात: 6:00 बजे
अभिषेक प्रात: 9:00 बजे
मध्यान आरती दोपहर: 12:00 बजे
धूप आरती साँयकाल: 7:00 बजे
शेज आरती रात्री काल: 10:30 बजे

************************************

निर्देशित आरतियों के समय से आधा घंटा पह्ले से ले कर आधा घंटा बाद तक दर्शनों की कतारे रोक ली जाती है। यदि आप दर्शनों के लिये जा रहे है तो इन समयों को ध्यान में रखें।

************************************

Thursday, 12 August 2010

जय साईं श्री साईं जय जय साईं - Happy Baba's Day


ॐ सांई राम







 

"श्री साईं कष्ट निवारण मंत्र"
 "सदगुरू साईं नाथ महाराज की जय"
 कष्टों की काली छाया दुखदायी है,
  जीवन में घोर उदासी लायी है!
  संकट को तालो साईं दुहाई है,
  तेरे सिवा न कोई सहाई है !
 मेरे मन तेरी मूरत समाई है,
 हर पल हर शन महिमा गायी है!
घर मेरे कष्टों की आंधी आई है,
आपने क्यूँ मेरी सुध भुलाई है!
तुम भोले नाथ हो दया निधान हो,
तुम हनुमान हो तुम बलवान हो!
तुम्ही राम और श्याम हो,
सारे जगत में तुम सबसे महान हो!
तुम्ही महाकाली तुम्ही माँ शारदे,
करता हूँ प्रार्थना भव से तार दे!
तुम्ही मोहमद हो गरीब नवाज़ हो,
नानक की बानी  में ईसा के साथ हो!
तुम्ही दिगम्बर तुम्ही कबीर हो,
हो बुध तुम्ही और महावीर हो!
सारे जगत का तुम्ही आधार हो,
निराकार भी और साकार हो!
करता हूँ वंदना प्रेम विशवास से,
सुनो साईं अल्लाह के वास्ते!
अधरों पे मेरे नहीं मुस्कान है,
घर मेरा बनने लगा शमशान है!
रहम नज़र करो उज्ढ़े वीरान पे,
जिंदगी संवरेगी एक वरदान से!
पापों की धुप से तन लगा हारने,
आपका यह दास लगा पुकारने!
आपने सदा ही लाज बचाई है,
देर न हो जाये मन शंकाई है!
धीरे-धीरे धीरज ही खोता है,
मन में बसा विशवास ही रोता है!
मेरी कल्पना साकार कर दो,
सूनी जिंदगी में रंग भर दो!
ढोते-ढोते पापों का भार जिंदगी से,
मैं गया हार जिंदगी से!
नाथ अवगुण अब तो बिसारो,
कष्टों की लहर से आके उबारो!
करता हूँ पाप मैं पापों की खान हूँ,
ज्ञानी तुम ज्ञानेश्वर मैं अज्ञान हूँ!
करता हूँ पग-पग पर पापों की भूल मैं,
तार दो जीवन ये चरणों की धूल से!
तुमने ऊजरा हुआ घर बसाया,
पानी से दीपक भी तुमने जलाया!
तुमने ही शिरडी को धाम बनाया,
छोटे से गाँव में स्वर्ग सजाया!
कष्ट पाप श्राप उतारो,
प्रेम दया दृष्टि से निहारो!
आपका दास हूँ ऐसे न टालिए,
गिरने लगा हूँ साईं संभालिये!
साईजी बालक मैं अनाथ हूँ,
तेरे भरोसे रहता दिन रात हूँ!
जैसा भी हूँ , हूँ तो आपका,
कीजे निवारण मेरे संताप का!
तू है सवेरा और मैं रात हूँ,
मेल नहीं कोई  फिर भी साथ हूँ!
साईं मुझसे मुख न मोड़ो,
बीच मझधार अकेला न छोड़ो!
आपके चरणों में बसे प्राण है,
तेरे वचन मेरे गुरु समान है!
आपकी राहों पे चलता दास है,
ख़ुशी नहीं कोई जीवन उदास है!
आंसू की धारा में डूबता किनारा,
जिंदगी में दर्द , नहीं गुज़ारा!
लगाया चमन तो फूल खिलायो,
फूल खिले है तो खुशबू भी लायो!
कर दो इशारा तो बात बन जाये,
जो किस्मत में नहीं वो मिल जाये!
बीता ज़माना यह गाके फ़साना,
सरहदे ज़िन्दगी  मौत तराना!
देर तो हो गयी है अंधेर ना हो,
फ़िक्र मिले लकिन फरेब ना हो!
देके टालो या दामन बचा लो,
हिलने लगी रहनुमाई संभालो!
तेरे दम पे अल्लाह की शान है,
सूफी संतो का ये बयान है!
गरीबों की झोली में भर दो खजाना,
ज़माने के वली करो ना बहाना!
दर के भिखारी है मोहताज है हम,
शंहंशाये आलम करो कुछ करम!
तेरे खजाने में अल्लाह की रहमत,
तुम सदगुरू साईं हो समरथ!
आये हो धरती पे देने सहारा,
करने लगे क्यूँ हमसे किनारा!
जब तक  ये ब्रह्मांड रहेगा,
साईं तेरा नाम रहेगा!
चाँद सितारे तुम्हे पुकारेंगे,
जन्मोजनम हम रास्ता निहारेंगे!
आत्मा बदलेगी चोले हज़ार,
हम मिलते रहेंगे बारम्बार!
आपके कदमो में बैठे रहेंगे,
दुखड़े दिल के कहते रहेंगे!
आपकी मर्जी है दो या ना दो,
हम तो कहेंगे दामन ही भर दो!
तुम हो दाता हम है भिखारी,
सुनते नहीं क्यूँ अर्ज़   हमारी!
अच्छा चलो एक बात बता दो,
क्या नहीं तुम्हारे पास बता दो!
जो नहीं देना है इनकार कर दो,
ख़तम ये आपस की तकरार कर दो!
लौट के खाली चला जायूँगा,
फिर भी गुण तेरे गायूँगा!
जब तक काया है तब तक माया है,
इसी में दुखो का मूल समाया है!
सबकुछ जान के अनजान हूँ मैं,
अल्लाह की तू शान तेरी शान हूँ मैं!
तेरा करम सदा सब पे रहेगा,
ये चक्र युग-युग चलता रहेगा!
जो प्राणी गायेगा साईं तेरा नाम,
उसको मुक्ति मिले पहुंचे परम धाम!
ये मंत्र जो प्राणी नित दिन गायेंगे,
राहू , केतु , शनि निकट ना आयेंगे!
टाल जायेंगे संकट सारे,
घर में वास  करें सुख सारे!
जो श्रधा से करेगा पठन,
उस पर देव सभी हो प्रस्सन!
रोग समूल नष्ट हो जायेंगे,
कष्ट निवारण मंत्र जो गायेंगे!
चिंता हरेगा निवारण जाप,
पल में दूर हो सब पाप!
जो ये पुस्तक नित दिन बांचे,
श्री लक्ष्मीजी घर उसके सदा विराजे!
ज्ञान , बुधि प्राणी वो पायेगा,
कष्ट निवारण मंत्र जो धयायेगा!
ये मंत्र भक्तों कमाल करेगा,
आई जो अनहोनी तो टाल देगा!
भूत-प्रेत भी रहेंगे दूर ,
इस मंत्र में साईं शक्ति भरपूर!
जपते रहे जो मंत्र अगर,
जादू-टोना भी हो बेअसर!
इस मंत्र में सब गुण समाये,
ना हो भरोसा तो आजमाए!
ये मंत्र साईं वचन ही जानो,
सवयं अमल कर सत्य पहचानो!
संशय ना लाना विशवास जगाना,
ये मंत्र सुखों का है खज़ाना!


इस पुस्तक में साईं का वास,
जय साईं श्री साईं जय जय साईं
एक दिन दोपहर की आरती के पश्चात भक्तगण अपने घरों को लौट रहे थे,
तब बाबा ने निम्नलिखित अति सुन्दर उपदेश दिया –  तुम चाहे कही भी रहो, जो इच्छा हो, सो करो, परंतु यह सदैव स्मरण रखो कि जो कुछ तुम करते हो, वह सब मुझे ज्ञात है । मैं ही समस्त प्राणियों का प्रभु और घट-घट में व्याप्त हूँ । मेरे ही उदर में समस्त जड़ व चेतन प्राणी समाये हुए है । मैं ही समस्त ब्राहांड़ का नियंत्रणकर्ता व संचालक हूँ । मैं ही उत्पत्ति, व संहारकर्ता हूँ । मेरी भक्ति करने वालों को कोई हानि नहीं पहुँचा सकता । मेरे ध्यान की उपेक्षा करने वाला, माया के पाश में फँस जाता है । समस्त जन्तु, चींटियाँ तथा दृश्यमान, परिवर्तनमान और स्थायी विश्व मेरे ही स्वरुप है ।


For Daily SAI SANDESH Or to join our Group today
Click at our Group address :
http://groups.google.com/group/shirdikesaibaba/boxsubscribe?p=FixAddr&email
Current email address :
shirdikesaibaba@googlegroups.com

Visit us at :
http://shirdikesaibabaji.blogspot.com/
Now also join our SMS group
for daily updates about our Google Group
Shirdi Ke Sai Baba Group (Regd.)http://labs.google.co.in/smschannels/subscribe/SHIRDIKESAIBABAGROUP

or

Simply type in your create message box

ON<space>
SHIRDIKESAIBABAGROUP
and send it to
+919870807070

AAJ KA SAI SANDESH

ॐ सांई राम



।। जय सांई राम़ ।।



जीवन के लिये श्री सांई के उपदेश



"शिर्डी परम भाग्यशालिनी है, जहां एक अमूल्य हीरा है। जिन्हें तुम इस प्रकार परिश्रम करते हुए देख रहे हो, वे कोई सामान्य पुरुष नहीं हैं। अपितु, यह भूमि बहुत भाग्यशालिनी तथा महान् पुण्यभूमि है, इसी कारण इसे यह रत्न प्राप्त हुआ है।


केवल गत जन्मों के अनेक शुभ संस्कार एकत्रित होने पर ही ऐसा दर्शन प्राप्त होना सुलभ हो सकता है। यदि आप श्री सांई बाबा को एक दृष्टि भर कर देख लेंगे, तो आपको सम्पूर्ण विश्व ही सांईमय दिखलाई पड़ेगा।

यदि श्री सांई बाबा के उपदेशों का, जो कि वैदिक शिक्षा के समान ही मनोरंजक और शिक्षाप्रद है, ध्यानपूर्वक श्रवण एंव मनन किया जाऐ, तो भक्तों को अपने मनोवांछित फल की प्राप्ति हो जाएगीः


आज से मै जीवन के लिये श्री सांई के उपदेश श्रंखला नाम से यह टापिक पेश कर रहा हूँ!


अपने भक्तों के कल्याण का सदैव ध्यान रखने वाले सांई कहते हैः


"जो प्रेमपूर्वक मेरा नामस्मरण करेगा, मैं उसकी समस्त इच्छायें पूर्ण कर दूंगा। उसकी भक्ति मे उतरोत्तर वृद्धि होगी। जो मेरे चरित्र और कृत्यों का श्रध्दापूर्वक गायन करेगा, उसकी मै हर प्रकार से सदैव सहायता करूंगा"




OM SAI ......

जो मेरा स्मरण करता है, उसका मुझे सदैव ही ध्यान रहता है। मुझे यात्रा के लिए कोई भी साधन - गाड़ी, तांगा या विमान की आवश्यकता नही है। मुझे तो जो प्रेम से पुकारता है, उसके सम्मुख मैं अविलम्ब ही प्रगट हो जाता हूँ।





"मै अपना वचन पूर्ण करने के लिये अपना सर्वस्व निछावर कर दूंगा। मेरे शब्द कभी असत्य न निकलेंगें। "








ॐ सांई राम। हेमाडपंतजी साँई सच्चरित्र में लिखते हैं कि बाबा अक्सर कहा करते थे सबका मालिक एक। आइए बाबा के इसी संदेश पर कुछ बात करें। बाबा के विषय में हम जितना मनन करते जाते हैं बाबा के संदेशों को समझना उतना ही आसान होता जाता है। बाबा के बारे में लिखना और पढ़ना हम साँई भक्तो को इतना प्रिय है कि बाबा की एक लेखिका भक्तन ने तो अपनी एक किताब में बाबा को ढेर सारे पत्र लिखे हैं।

मेरा मानना है कि साँई को पतियां लिखुं जो ये होय बिदेस। मन में तन में नैन में ताको कहा संदेस॥ मगर साँई के विषय में बातें करना जैसे आत्मसाक्षात्कार करना है।



बाबा ने बहुत सहजता से कहा है कि सबका मालिक एक। ऐसा कह पाना शायद बाबा के लिए ही सम्भव था क्योंकि समस्त आसक्तियों और अनुरागों से मुक्त एक संत ही ऐसा कह सकता है। प्रचलित धर्म चाहे वो हिन्दु धर्म हो, इस्लाम हो, सिख हो, ईसाई हो, जैन हो, बौद्ध हो या कोई अन्य, प्रश्न ये है कि जो ये धर्म सिखा रहे हैं क्या वो गलत है॑ क्योंकि अगर गलत ना होता तो बाबा को इस धरती पर अवतार लेने की आवश्यकता ही ना होती। हमारे ये सभी प्रचलित धर्म इतने कट्टर क्यों हैं कि अगर एक हिन्दु किसी मुसलमान के साथ बैठता है या उसका छुआ खाता-पीता है तो उसका कथित धर्म भ्रष्ट हो जाता है॑ वैसे आप ही सोचिए वो धर्म ही क्या जो छूने या खानेॅपीने से भ्रष्ट हो जाए। वास्तव में धर्म जो बताते हैं वो है शिक्षा। एक कथा के अनुसार परमात्मा ने देवों, दानवों और मानवों के जीवन की पहली सीख के रूप में केवल एक अक्षर कहा था 'दा' इसका अर्थ देवों के लिए था कि उन्हें अपने - भोगो और आसक्तियों का दमन करना चाहिए। दानवों के लिए शिक्षा थी कि उन्हें दया करनी चाहिए और मानव जाति को कहा कि उन्हें दान करना चाहिए। बाबा ने कलयुग में एक बार फिर धरती पर आकर हमें इसी शिक्षा की याद दिलाई।



प्रचलित धर्म भी इन तीनों शिक्षाओं पर अमल करने को कहते हैं। सभी धर्मों के अनुसार हमें अपनी आसक्तियों और भोगो का दमन करना चाहिए क्योंकि सभी परेशानियां और तकलीफें आसक्ति से आरंभ होती हैं। इस्लाम में किसी भी प्रकार से ब्याज लेना मना है। जो आसक्ति को दूर करता है। कुरान शरीफ के अनुसार जो मुसलमान अपने पडोसी को भूखा जानकर भी अपना पेट भर लेता है वो अल्लाह की राह में सबसे बडा गुनहगार है यानि अपने आसॅपास के सभी जीवों पर दया का भाव रखना एक सच्चा मुसलमान बनने की कुछ जरूरी शर्तों में से एक है। इसी तरह ईद के पवित्र मौके पर फितरा और जकात का लाजिम होना इस्लाम की दान की शिक्षा का एक रूप है।


श्रीसाँई सच्चरित्र अध्याय २५ में वर्णन है कि श्रीसाँई ने दामू अण्णा कसार की रूई और अनाज के सौदे में धनलाभ की आसक्ति को दूर किया। इसी प्रकार दूसरी शिक्षा है दया। "बाबा की शिक्षा है कि भक्त जो दूसरों को पीडा पहुंचाता है, वह मेरे हृदय को दु:ख पहुंचाता है तथा मुझे कष्ट पहुंचाता है। -श्रीसाँई सच्चरित्र अध्याय ४४" अर्थात हमें प्रत्येक प्राणी पर दया करनी चाहिए। और तीसरी शिक्षा है दान जिसका हेमाडपंतजी ने श्रीसाँई सच्चरित्र के अध्याय १४ में दक्षिणा का मर्म के रूप में वर्णन किया है।


बाबा ने रामनवमी और उर्स एक साथ मनाए क्योंकि बाबा सिखाना चाहते थे कि सभी धर्म एक ही शिक्षा दे रहे हैं। इसीलिए बाबा सदा कहा करते थे कि सबका मालिक एक। ये मालिक ही वो नूर है। वो शिक्षा है जो हमें हमारे जन्म लेने का कारण बताती है। अव्वल अल्लाह नूर उपाया कुदरत के सब बंदे। एक नूर से सब जग उपजया कौन भले कौन मंदे। साँई अपनी कृपा सब पर बनाए रखें यही कामना है।
For Daily SAI SANDESH

or Join our Group today

Click at our Group address :
http://groups.google.com/group/shirdikesaibaba/boxsubscribe?p=FixAddr&email


Current email address :
shirdikesaibabagroup@gmail.com


Visit us at :
http://shirdikesaibabaji.blogspot.com/

Now also join our SMS group for daily updates about our google Group
Shirdi Ke Sai Baba Group
http://labs.google.co.in/smschannels/subscribe/SHIRDIKESAIBABAGROUP


or

Simply type in your create message box


ONSHIRDIKESAIBABAGROUP


and send it to
+919870807070

For Donation

For donation of Fund/ Food/ Clothes (New/ Used), for needy people specially leprosy patients' society and for the marriage of orphan girls, as they are totally depended on us.

For Donations, Our bank Details are as follows :

A/c - Title -Shirdi Ke Sai Baba Group

A/c. No - 200003513754 / IFSC - INDB0000036

IndusInd Bank Ltd, N - 10 / 11, Sec - 18, Noida - 201301,

Gautam Budh Nagar, Uttar Pradesh. INDIA.