शिर्डी के साँई बाबा जी की समाधी और बूटी वाड़ा मंदिर में दर्शनों एंव आरतियों का समय....

"ॐ श्री साँई राम जी
समाधी मंदिर के रोज़ाना के कार्यक्रम

मंदिर के कपाट खुलने का समय प्रात: 4:00 बजे

कांकड़ आरती प्रात: 4:30 बजे

मंगल स्नान प्रात: 5:00 बजे
छोटी आरती प्रात: 5:40 बजे

दर्शन प्रारम्भ प्रात: 6:00 बजे
अभिषेक प्रात: 9:00 बजे
मध्यान आरती दोपहर: 12:00 बजे
धूप आरती साँयकाल: 5:45 बजे
शेज आरती रात्री काल: 10:30 बजे

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निर्देशित आरतियों के समय से आधा घंटा पह्ले से ले कर आधा घंटा बाद तक दर्शनों की कतारे रोक ली जाती है। यदि आप दर्शनों के लिये जा रहे है तो इन समयों को ध्यान में रखें।

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Tuesday, 25 October 2022

श्री साईं लीलाएं - साईं बाबा द्वारा भिक्षा माँगना

ॐ सांई राम



परसों हमने पढ़ा था.. मुझे पंढरपुर जा कर रहना है       

श्री साईं लीलाएं - साईं बाबा द्वारा भिक्षा माँगना           


साईं बाबा ईशावतार थे| सिद्धियां उनके आगे हाथ जोड़कर खड़ी रहती थीं| पर बाबा को इन बातों से कोई मतलब नहीं था| बाबा सदैव अपनी फकीरी में अलमस्त रहते थे| बाबा, जिनकी एक ही नजर में दरिद्र को बादशाहत देने की शक्ति थी, फिर भी वे भिक्षा मांगकर स्वयं का पेट भरते थे| भिक्षा मांगते समय बाबा कहा करते थे - "ओ माई ! एक रोटी का टुकड़ा मुझे मिले|" बाबा सदैव हाथ फैलाकर भिक्षा मांगा करते थे| बाबा के एक हाथ में टमरेल और दूसरे हाथ में झोली हुआ करती थी| बाबा रोजाना पांच घरों से भिक्षा मांगते थे तथा कभी-कभी कुछ अन्य घरों में भी फेली लगाया करते थे| बाबा रोटी, चावल झोली में लेते और तरल पदार्थ - "सब्जी, छाछ, दाल, दही, दूध आदि टमरेल (टिन के बने हुए पात्र) में लेते थे| इस तरह से वह सब एक हो जाता| साधु-संत कभी भी जीभ के स्वाद के लिए भोजन नहीं करते| वे समस्त सामग्री को एक जगह मिलाकर उसका सेवन करते हैं और सदा संतुष्ट रहते हैं| बाबा ने भी कभी जीभ के स्वाद के लिए भोजन नहीं किया|
साईं बाबा का भिक्षा मांगने का कोई समय निश्चित नहीं था| कभी-कभी सुबह ही 8-9 बजे भिक्षा मांगने निकल जाते थे| इस तरह गांव में घूमने के बाद मस्जिद लौट आते| यह भी उनका नित्य क्रम नहीं था| यदि मन हुआ तो जाते और जहां चाहते वहां मांगते, जो भी मिलता, वह ले आते| उसी में खुश रहते|
मस्जिद में लौटकर आने के बाद भिक्षा में उन्हें जो कुछ भी मिलता था, वह सब एक कुंडी में डाल देते| उस कुंडी में से मस्जिद की साफ़-सफाई करने वाला, कौवे, चिड़िया, कुत्ते, बिल्ली आदि आकर अपना हिस्सा ले जाता| यदि कोई गरीब या भिखारी आया तो उसे भी उसमें से प्रसाद अवश्य मिलता| बाबा सब जीवों के प्रति समान रूप से प्रेमभाव रखते थे, इसलिए बाबा ने कभी किसी को मना नहीं किया| बाबा उस भिक्षा पर कभी अपना हक नहीं मानते थे|


कल चर्चा करेंगे... बाइजाबाई द्वारा साईं सेवा

ॐ सांई राम
===ॐ साईं श्री साईं जय जय साईं ===
बाबा के श्री चरणों में विनती है कि बाबा अपनी कृपा की वर्षा सदा सब पर बरसाते रहें ।

Monday, 24 October 2022

बाबा ने दिवाली पर पानी से दिए जलाए

ॐ सांई राम





बाबा ने दिवाली पर पानी से दिए जलाए



श्री साईं बाबा संध्या समय गाँव में जा कर दुकानदारों से भिक्षा में तेल मांगते और मस्जिद में दिए जलाया करते थे| सन 1892  दिवाली के दिन बाबा गाँव के दुकानदारों से तेल मांगने गए लेकिन वाणी (तेल देने वालों) ने तेल देने से मना कर दिया| सभी दुकानदारों ने आपस में यह निश्चित किया था की वह बाबा को भिक्षा में तेल न दे कर अपना महत्व दर्शाएंगे|अहंकार से भरकर उन्होंने यह भी कहा की देखते है बाबा! आज किस प्रकार मस्जिद में दिए जलाते है ? अत: बाबा को खाली हाथ ही मस्जिद में लौटना पड़ा| कुछ समय पश्चात ही सभी दुकानदार एवं गाँव के कुछ लोग मस्जिद में गए और उन्होंने देखा :-


"बाबा के टीन में पिछले दिन का कुछ तेल था| उन्होंने मस्जिद में रखे घड़े से पानी टीन में डाला और तेल में मिला दिया| उन्होंने वह तेल - मिश्रित पानी अपने मुहं में पीया और पुन: टीन में उलट दिया| वह पानी उन्होंने मस्जिद में रखे दीयों में दाल दिया और बातीं लगा कर दियें जला दिए|




आश्चर्य! पानी के दिए सारी रात जले| यह देख कर सभी दुकानदारों ने बाबा से क्षमा - याचना की एवं प्रतिदिन उन्हें स्वयं ही तेल देने लगे|"


Sunday, 23 October 2022

श्री साईं लीलाएं - मुझे पंढरपुर जा कर रहना है

 ॐ सांई राम



कल हमने पढ़ा था.. साईं बाबा की दयालुता 

श्री साईं लीलाएं - मुझे पंढरपुर जा कर रहना है           


साईं बाबा अंतर्यामी थे और वे अपने भक्तों के मन की बात पहले ही जान जाया करते थे| साईं बाबा के अनन्य भक्त नाना साहब चाँदोरकर नंदूरवार के मामलातदार थे| उनका तबादला पंढरपुर में तहसीलदार के पद पर हो गया था| पंढरपुर को इस धरती पर स्वर्ग जितना महत्व दिया जाता था| नाना साहब को शीघ्र ही वहां जाकर कार्यभार संभालने का आदेश मिला था| पंढरपुर जाने से पहले उन्होंने अपने पंढरपुर (शिरडी) जाकर साईं बाबा के दर्शन करने की सोची और वे बिना किसी को सूचना दिये शीघ्र ही शिरडी के लिए चल दिए|
इधर शिरडी में भी नाना साहब के आने के बारे में भी किसी को कोई जानकारी नहीं थी| लेकिन साईं बाबा तो अंतर्यामी, सर्वव्यापी थे| उनसे कुछ भी छिपा हुआ नहीं था| अभी नाना साहब शिरडी से कुछ पहले नीम गांव के पास पहुंचे ही थे कि मस्जिद में बैठे साईं बाबा अपने भक्तों के साथ बैठे बातचीत कर रहे थे कि अचानक बातचीत के बीच में साईं बाबा बोले - "चलो सारे मिलकर भजन गाते हैं|" साईं बाबा भजन गाने लगे और म्हालसापति, अप्पाशिंदे, काशीराम आदि भक्त उनका साथ देने लगे| पहले भजन साईं बाबा गाते, फिर भक्त उसे दोहराते| कुछ देर बाद जब नाना साहब मस्जिद में बाबा के दर्शन करने आये, तब भजन जारी था| भजन सुनकर उन्होंने समझा कि उनका पंढरपुर के तबादले के बारे में बाबा ने जान लिया है| उन्होंने बाबा के चरणों में नमस्कार कर बाबा से पंढरपुर जाने की अनुमति मांगी| तब बाबा ने उन्हें आशीष और ऊदी प्रसाद में दी| फिर नाना साहब सपरिवार पंढरपुर के लिए रवाना हो गये|


कल चर्चा करेंगे... साईं बाबा द्वारा भिक्षा माँगना

ॐ सांई राम
ॐ साईं श्री साईं जय जय साईं
बाबा के श्री चरणों में विनती है कि बाबा अपनी कृपा की वर्षा सदा सब पर बरसाते रहें ।

Saturday, 22 October 2022

श्री साईं लीलाएं - साईं बाबा की दयालुता

ॐ सांई राम


कल हमने पढ़ा था.. बालक खापर्डे को प्लेग-मुक्ति     

श्री साईं लीलाएं - 
साईं बाबा की दयालुता

साईं बाबा की अद्भुत चिकित्सा की चारों ओर प्रसिद्धि फैल चुकी थी| लोग बहुत दूर-दूर से उनसे अपना इलाज कराने के लिए आया करते थे| बाबा स्वयं कष्ट उठाकर दूसरों का

 कल्याण किया करते थे| बाबा की दयालुता और सर्वव्यापकता की चारों ओर चर्चा थी|यह घटना सन् 1910 की है| जब धनतेरस के दिन बाबा अपनी धूनी के पास बैठे आग ताप रहे थे और धूनी को अधिक प्रज्जवलित करने के लिए उसमें लकड़ियां भी डालते जा रहे थे| धूनी अपनी पूरी प्रचंडता पर थी, कि एकाएक साईं बाबा ने अपने हाथ धूनी में डाल दिये| तभी बाबा के भक्त माधवराव देशपांडे (शामा) ने बाबा को धूनी में हाथ डालते देखा तो वह दौड़कर बाबा के पास पहुंचा और बलपूर्वक बाबा को पकड़कर पीछे खींच लिया| वहां उपस्थित किसी भी भक्त की समझ में बाबा की यह लीला नहीं आयी| बाबा के हाथों को देखकर शामा रोता हुआ बोला - "देवा ! यह आपने क्या किया ?" तब बाबा बोले - "यहां से कुछ दूर एक लुहारिन अपनी बच्ची को गोद में लेकर भट्ठी झोंक रही थी तभी पति के बुलाने पर वह उसके पास चली गयी| उसकी जरा-सी असावधानी के कारण वह बची फिसलकर भट्ठी में गिर गयी| पर, मैंने उसे तत्काल भट्ठी में हाथ डालकर निकाल लिया| खैर, हाथ जला तो मुझे इसकी जरा भी चिंता नहीं, लेकिन मुझे तसल्ली है कि उस बच्ची के प्राण तो बच गए|" यह सारी घटना शामा ने चाँदोरकर को खत के माध्यम से लिखकर भेजी| चाँदोरकर को बाबा के हाथ जलने की घटना का पता चला तो वह मुम्बई के प्रसिद्ध डॉक्टर परमानंद को साईं बाबा की चिकित्सा करने के लिए शिरडी लाए| डॉक्टर परमानंद अपने साथ सभी आवश्यक दवाई, लेप, इंजेक्शन आदि लेकर आये थे| मस्जिद पहुंचकर चाँदोरकर ने बाबा के चरण स्पर्श करने के बाद बाबा से विनती की कि वह अपने हाथ का इलाज डॉक्टर परमानंद को करने की अनुमति दें| पर बाबा ने स्पष्ट रूप से इलाज कराने से इंकार कर दिया|फिर भी बाबा के परम भक्त भागोजी शिंदे उनके जले हुए हाथ पर घी लगाकर एक पत्ता रखते और पट्टी बांधते थे| जिससे बाबा के घाव जल्दी भर जायें और हाथ ठीक हो जाए| इसके लिए चाँदोरकर ने बाबा से कई बार विनती की कि वो डॉक्टर परमानंद से अपनी चिकित्सा करवा लें| स्वयं डॉक्टर परमानंद ने भी बाबा से बार-बार आग्रह किया| पर बाबा ने चिकित्सा करवाने से यह कहते हुए इंकार कर दिया कि मेरा डॉक्टर तो अल्लाह ही है| इस तरह डॉक्टर परमानंद को बाबा की चिकित्सा करने का मौका न मिल सका|लेकिन कुष्ठ रोगी होने पर भी भागोजी शिंदे का यह अहोभाग्य (अत्यन्त सौभाग्य) था कि बाबा ने उन्हें पट्टी बांधने की अनुमति दे रखी थी| वे अपने इस कार्य को पूरी श्रद्धा के साथ कर रहे थे| कुछ दिनों में जब घाव भर गया और हाथ पूरी तरह से ठीक हो गया, तब सभी भक्तों को अत्यन्त प्रसन्नता हुई| फिर भी भागोजी शिंदे द्वारा बाबा के उस हाथ पर घी मलने व पट्टी बांधने का सिलसिला बाबा की महासमाधि लेने तक नियमित रूप से जारी रहा| वैसे साईं बाबा पूर्ण सिद्ध थे, उन्हें किसी भी तरह की चिकित्सा की कोई आवश्यकता न थी, फिर भी अपने भक्तों की प्रसन्नता और प्रेमवश उन्होंने भागोजी शिंदे को सेवा करने का अवसर दिया|

कल चर्चा करेंगे... मुझे पंढरपुर जा के रहना है 

ॐ सांई राम
ॐ साईं श्री साईं जय जय साईं
बाबा के श्री चरणों में विनती है कि बाबा अपनी कृपा की वर्षा सदा सब पर बरसाते रहें ।

Friday, 21 October 2022

श्री साईं लीलाएं - बालक खापर्डे को प्लेग-मुक्ति

 ॐ सांई राम


परसों हमने पढ़ा था.. बाबा द्वारा अद्भुत नेत्र चिकित्सा       

श्री साईं लीलाएं - बालक खापर्डे को प्लेग-मुक्ति

अमरासवती जिले के रहनेवाले दादा साहब खापर्डे की पत्नी श्रीमती खापर्डे अपने छोटे पुत्र के साथ शिरडी में साईं बाबा के दर्शन करने आयी थीं| उन्हें वहां रहते हुए कई दिन हो गये थे| इस बीच एक दिन उनके पुत्र को तेज बुखार चढ़ गया| तभी आसपास के गांव में प्लेग भी फैल गया था| इससे श्रीमती खापर्डे अत्यन्त भयभीत हो उठीं - और कहीं उनके पुत्र को प्लेग तो नहीं हो गया| किसी अनिष्ट की आशंका से उनका समुचित अस्तित्व ही हिल गया| इन बातों को मन में विचारकर उन्होंने तुरंत ही अमरावती लौटने का मन बनाया|संध्या के समय जब साईं बाबा वायु सेवन करने के लिए समाधि मंदिर के पास से होकर जा रहे थे, उसी समय श्रीमती खापर्डे बाबा को वहां पर मिलीं और उनसे घर लौटने की अनुमति मांगते हुए, आँखों में आँसू लिए हाथ जोड़कर कांपते हुए स्वर में बोलीं - "बाबा, मेरा प्रिय पुत्र प्लेग रोग से पीड़ित है, इसलिए मैं घर जाना चाहती हूं|"तब बाबा ने श्रीमती खापर्डे से प्रेमपूर्वक कहा कि आकाश में बादल घिर आये हैं| बादल हटते ही आसपास पहले की तरफ साफ हो जायेगा| ऐसा कहते हुए बाबा ने अपनी कफनी कमर तक उठाकर वहां उपस्थित भक्तों को अपनी जांघों पर अंडे की आकार की चार गिल्टियां दिखाते हुए कहा कि देखो, मुझे अपने भक्तों का कितना कष्ट उठाना पड़ता है| उनके कष्ट मेरे ही कष्ट हैं| मैं उन्हें दु:खी नहीं देख सकता हूं| साईं बाबा की ऐसी विचित्र व असामान्य लीला देखकर लोगों का यह विश्वास और भी दृढ़ हो गया कि सद्गुरु को अपने भक्तों के लिए कितने कष्ट उठाने पड़ते हैं|

कल चर्चा करेंगे... साईं बाबा की दयालुता    

ॐ सांई राम

ॐ साईं श्री साईं जय जय साईं

बाबा के श्री चरणों में विनती है कि बाबा अपनी कृपा की वर्षा सदा सब पर बरसाते रहें ।

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Gautam Budh Nagar, Uttar Pradesh. INDIA.

बाबा के 11 वचन

ॐ साईं राम

1. जो शिरडी में आएगा, आपद दूर भगाएगा
2. चढ़े समाधी की सीढी पर, पैर तले दुःख की पीढ़ी कर
3. त्याग शरीर चला जाऊंगा, भक्त हेतु दौडा आऊंगा
4. मन में रखना द्रढ विश्वास, करे समाधी पूरी आस
5. मुझे सदा ही जीवत जानो, अनुभव करो सत्य पहचानो
6. मेरी शरण आ खाली जाए, हो कोई तो मुझे बताए
7. जैसा भाव रहे जिस जन का, वैसा रूप हुआ मेरे मनका
8. भार तुम्हारा मुझ पर होगा, वचन न मेरा झूठा होगा
9. आ सहायता लो भरपूर, जो माँगा वो नही है दूर
10. मुझ में लीन वचन मन काया, उसका ऋण न कभी चुकाया
11. धन्य-धन्य व भक्त अनन्य, मेरी शरण तज जिसे न अन्य

.....श्री सच्चिदानंद सदगुरू साईनाथ महाराज की जय.....

गायत्री मंत्र

ॐ भूर्भुवः॒ स्वः॒
तत्स॑वितुर्वरे॑ण्यम्
भ॒र्गो॑ दे॒वस्य॑ धीमहि।
धियो॒ यो नः॑ प्रचो॒दया॑त्॥

Word Meaning of the Gayatri Mantra

ॐ Aum = Brahma ;
भूर् bhoor = the earth;
भुवः bhuwah = bhuvarloka, the air (vaayu-maNdal)
स्वः swaha = svarga, heaven;
तत् tat = that ;
सवितुर् savitur = Sun, God;
वरेण्यम् varenyam = adopt(able), follow;
भर्गो bhargo = energy (sin destroying power);
देवस्य devasya = of the deity;
धीमहि dheemahi = meditate or imbibe

these first nine words describe the glory of Goddheemahi = may imbibe ; pertains to meditation

धियो dhiyo = mind, the intellect;
यो yo = Who (God);
नः nah = our ;
प्रचोदयात prachodayat = inspire, awaken!"

dhiyo yo naha prachodayat" is a prayer to God


भू:, भुव: और स्व: के उस वरण करने योग्य (सूर्य) देवता,,, की (बुराईयों का नाश करने वाली) शक्तियों (देवता की) का ध्यान करें (करते हैं),,, वह (जो) हमारी बुद्धि को प्रेरित/जाग्रत करे (करेगा/करता है)।


Simply :

तीनों लोकों के उस वरण करने योग्य देवता की शक्तियों का ध्यान करते हैं, वह हमारी बुद्धि को प्रेरित करे।


The God (Sun) of the Earth, Atmosphere and Space, who is to be followed, we meditate on his power, (may) He inspire(s) our intellect.