शिर्डी के साँई बाबा ग्रुप (रजि.)
शिर्डी के साँई बाबा जी की समाधी और बूटी वाड़ा मंदिर में दर्शनों एंव आरतियों का समय....
"ॐ श्री साँई राम जी
समाधी मंदिर के रोज़ाना के कार्यक्रम
मंदिर के कपाट खुलने का समय प्रात: 4:00 बजे
कांकड़ आरती प्रात: 4:30 बजे
मंगल स्नान प्रात: 5:00 बजे
छोटी आरती प्रात: 5:40 बजे
दर्शन प्रारम्भ प्रात: 6:00 बजे
अभिषेक प्रात: 9:00 बजे
मध्यान आरती दोपहर: 12:00 बजे
धूप आरती साँयकाल: 5:45 बजे
शेज आरती रात्री काल: 10:30 बजे
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निर्देशित आरतियों के समय से आधा घंटा पह्ले से ले कर आधा घंटा बाद तक दर्शनों की कतारे रोक ली जाती है। यदि आप दर्शनों के लिये जा रहे है तो इन समयों को ध्यान में रखें।
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Tuesday, 24 January 2023
श्री गुरु अमर दास जी – साखियाँ - भाई जग्गे को निहाल करना
Monday, 23 January 2023
श्री गुरु अमर दास जी – साखियाँ - भक्ति के प्रकार
ॐ साँई राम जी
श्री गुरु अमर दास जी – साखियाँ - भक्ति के प्रकार
भाई खानू, मईया और गोबिंद गुरु अमरदास जी के पास आए| इन्होने प्रार्थना की हमें भक्ति का उपदेश दो ताकि हमारा कल्याण हो जाये| गुरु जी ने कहा भक्ति तीन प्रकार की होती है-नवधा,प्रेमा और परा|
नवधा भक्ति :-
१. गुरु जी के वचनों को श्रद्धा सहित सुनकर दिल में बसाना|
२. कथा कीर्तन के द्वारा परमात्मा के गुन गायन करना|
३. सत्यनाम का सुमिरन श्वास-२ करना|
४. परमत्मा व गुरु चरणों का धयान करना व सन्तो का चरण धोकर चरणामृत लेना|
५. पवित्र भोजन करना और गुरु निमित देना|
६. गुरु स्थल पर जा कर नमस्कार करनी और परिकर्मा करनी|
७. धूप,दीप व फूल माला चडाना|
८. परमेश्वर को मालिक व खुद को सेवक जानना|
९. अपने मन को स्थिर रखना| प्रभु के हुकम को अच्छा संयम कर मानना|
१०. पदार्थो की माया छोड़कर सब कुछ प्रभु को जानना|
इस नवधा भक्ति का एक गुण भी धारण हो जाये तो बंदे का उद्धार हो सकता है| मगर सभी गुण धारण करके बंदे का कल्याण हो सकता है|
प्रेमा भक्ति :-
जिस प्रकार वृक्ष का फल पहले हरा होता है, उसका स्वाद भी कड़वा होता है फिर यह खट्टा हो जाता है और फिर वृक्ष से रस लेकर रसीला हो जाता है मीठा बन जाता है| इसी तरह ही प्रेमा भक्ति वाले पुरुष का पहले रोने का जी करता है उसको अपने प्रियतम के दर्शनों की लालसा बढती है| वह यह समझकर कि मित्र से बिछडकर दुःख पा रहा है और गद् गद् हो जाता है| कभी परमेश्वर के गुण गाता है और कभी चुप धारण कर लेता है| इस अवस्था में वह सांवला हो जाता है| जैसे जैसे प्रेम बढता है खाना थोड़ा होता जाता है, रात दिन प्रेम में मस्त रहता है| मुँह का रंग पीला हो जाता है| जब सत्य संग ज्यादा हो जाता है तो पूरण प्रभु को सब जगह देखता है| इस देशा में मुख का रंग लाल हो जाता है, मन ज्ञानमय हो जाता है|
परा भक्ति :-
उच्च अवस्था में पहुँच कर परा भक्ति शुरू होती है| तब पुरुष ब्रहम स्वरुप हो जाता है, यही कल्याण का स्वरुप है| इस प्रकार तीनों ही आनंद अवस्था भक्ति को प्राप्त हुए|
Sunday, 22 January 2023
श्री गुरु अमर दास जी – साखियाँ - काबुल की एक पति-व्रता माई
ॐ साँई राम जी
श्री गुरु अमर दास जी – साखियाँ - काबुल की एक पति-व्रता माई
वह प्रातः काबुल से चलकर कार सेवा करती और सायंकाल काबुल पहुँच जाती| कुछ सिखो ने माई को सेवा करते हुए हाथ से संकेत करते देखा| कुछ दिन इसी तरह ही बीत गये तो एक दिन सिखो ने गुरु जी को कहा महाराज! एक माई रोज सुबह संगतो के साथ सेवा करती है और रात के समय देखते ही देखते लुप्त हो जाती है| एक और बात भी यह माई करती है कि कार सेवा करती करती अपना हाथ पलकर पीछे कर लेती है ऐसा लगता है कि जैसे किसी चीज़ को हिला रही हो| हमें समझ नहीं आता कि यह माई कौन है|
गुरु अमरदास जी ने माई को अपने पास बुलाया और पूछा कि तुम कहाँ से आती हो? और काम करते करते हाथ से किस चीज़ को हिलती हो? माई ने बताया में सुबह काबुल से आती हूँ और कर सेवा करके शाम को घर चली जाती हूँ| गुरु जी ने कहा यह शक्ति तुम कहाँ से लाईहो माई ने कहा महाराज! यह शक्ति मैंने अपने पति व्रता धर्म से पाई है| इसी के बल से में काबुल से आती हूँ और वापिस चली जाती हूँ| सुबह आते समय में अपने छोटे बच्चे को पंघूढ़े में सुला आती हूँ और यहाँ हाथ मारकर पंघूढ़े को हिलती रहती हूँ| जिससे यह सोया रहता है और खेलता ही रहता है|
माई से यह सुनकर सिखो ने उसे धन्ये माना और गुरु जी ने कुश होकर पति - पत्नी के लोक परलोक सुहेला कर दिया|
Saturday, 21 January 2023
श्री गुरु अमर दास जी - साखियाँ - पदम रेखा बताने वाले पंडित को वरदान
श्री गुरु अमर दास जी - साखियाँ - पदम रेखा बताने वाले पंडित को वरदान
Friday, 20 January 2023
श्री गुरु अमर दास जी – साखियाँ - लंगड़े की टांग ठीक करनी
गुरु जी का ऐसा वचन आते ही गुरुसिख उसी और ही चल दिया जहाँ गुरु जी ने भेजा था| शाह हुसैन जी के पास पहुंचकर सिख ने वहाँ आने का कारण बताया कि आप मेरी लंगडी टांग ठीक कर दे| हुसैन ने एकदम हाथ में मोटा डंडा उठा लिया और गुस्से से कहने लगा कि यह से भाग जा नहीं तो तेरी दूसरी टांग भी तोड़ दूँगा व लंगड़ा बना दूँगा| वह सिख डंडे कि मार से डरता हुआ जल्दी से उठकर भाग पड़ा|भागते-२ उसकी दूसरी टांग भी ठीक हो गई| तब वह पीछे मुड़कर हुसैन जी के चरणों में गिर पड़ा और धन्यवाद करने लगा| हुसैन जी कहने लगे कि करने वाले गुरु जी आप है मगर बदनामी मुझे देते है| मेरी तरफ से गुरु जी को नमस्कार करनी|गुरु जी कि ऐसी रहमत को देखकर हँसते-२ गुरसिख गुरु घर कि और चल दिया|
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बाबा के 11 वचन
1. जो शिरडी में आएगा, आपद दूर भगाएगा
2. चढ़े समाधी की सीढी पर, पैर तले दुःख की पीढ़ी कर
3. त्याग शरीर चला जाऊंगा, भक्त हेतु दौडा आऊंगा
4. मन में रखना द्रढ विश्वास, करे समाधी पूरी आस
5. मुझे सदा ही जीवत जानो, अनुभव करो सत्य पहचानो
6. मेरी शरण आ खाली जाए, हो कोई तो मुझे बताए
7. जैसा भाव रहे जिस जन का, वैसा रूप हुआ मेरे मनका
8. भार तुम्हारा मुझ पर होगा, वचन न मेरा झूठा होगा
9. आ सहायता लो भरपूर, जो माँगा वो नही है दूर
10. मुझ में लीन वचन मन काया, उसका ऋण न कभी चुकाया
11. धन्य-धन्य व भक्त अनन्य, मेरी शरण तज जिसे न अन्य
.....श्री सच्चिदानंद सदगुरू साईनाथ महाराज की जय.....
गायत्री मंत्र
तत्स॑वितुर्वरे॑ण्यम्
भ॒र्गो॑ दे॒वस्य॑ धीमहि।
धियो॒ यो नः॑ प्रचो॒दया॑त्॥
Word Meaning of the Gayatri Mantra
ॐ Aum = Brahma ;
भूर् bhoor = the earth;
भुवः bhuwah = bhuvarloka, the air (vaayu-maNdal)
स्वः swaha = svarga, heaven;
तत् tat = that ;
सवितुर् savitur = Sun, God;
वरेण्यम् varenyam = adopt(able), follow;
भर्गो bhargo = energy (sin destroying power);
देवस्य devasya = of the deity;
धीमहि dheemahi = meditate or imbibe
these first nine words describe the glory of Goddheemahi = may imbibe ; pertains to meditation
धियो dhiyo = mind, the intellect;
यो yo = Who (God);
नः nah = our ;
प्रचोदयात prachodayat = inspire, awaken!"
dhiyo yo naha prachodayat" is a prayer to God
भू:, भुव: और स्व: के उस वरण करने योग्य (सूर्य) देवता,,, की (बुराईयों का नाश करने वाली) शक्तियों (देवता की) का ध्यान करें (करते हैं),,, वह (जो) हमारी बुद्धि को प्रेरित/जाग्रत करे (करेगा/करता है)।
Simply :
तीनों लोकों के उस वरण करने योग्य देवता की शक्तियों का ध्यान करते हैं, वह हमारी बुद्धि को प्रेरित करे।
The God (Sun) of the Earth, Atmosphere and Space, who is to be followed, we meditate on his power, (may) He inspire(s) our intellect.









