कल हमने पढ़ा था.. अम्मीर शक्कर की प्राण रक्षा
श्री साईं लीलाएं - सबका रखवाला साईं
शिर्डी के साँई बाबा ग्रुप (रजि.)
शिर्डी के साँई बाबा जी की समाधी और बूटी वाड़ा मंदिर में दर्शनों एंव आरतियों का समय....
"ॐ श्री साँई राम जी
समाधी मंदिर के रोज़ाना के कार्यक्रम
मंदिर के कपाट खुलने का समय प्रात: 4:00 बजे
कांकड़ आरती प्रात: 4:30 बजे
मंगल स्नान प्रात: 5:00 बजे
छोटी आरती प्रात: 5:40 बजे
दर्शन प्रारम्भ प्रात: 6:00 बजे
अभिषेक प्रात: 9:00 बजे
मध्यान आरती दोपहर: 12:00 बजे
धूप आरती साँयकाल: 5:45 बजे
शेज आरती रात्री काल: 10:30 बजे
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निर्देशित आरतियों के समय से आधा घंटा पह्ले से ले कर आधा घंटा बाद तक दर्शनों की कतारे रोक ली जाती है। यदि आप दर्शनों के लिये जा रहे है तो इन समयों को ध्यान में रखें।
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Saturday, 10 December 2022
श्री साईं लीलाएं - सबका रखवाला साईं
Friday, 9 December 2022
श्री साईं लीलाएं - अम्मीर शक्कर की प्राण रक्षा
ॐ सांई राम
परसों हमने पढ़ा था.. बापू साहब बूटी को अभय दान
श्री साईं लीलाएं - अम्मीर शक्कर की प्राण रक्षा
बांद्रा में रहनेवाला अम्मीर शक्कर साईं बाबा का भक्त था| वह वहां पर दलाली किया करता था| एक बार उसे गठिया रोग हो गया| रोग के कारण उसे असहनीय कष्ट का सामना करना पड़ रहा था| आखिर में बीमारी से परेशान होकर अपना काम-धंधा छोड़कर शिरडी आ गया और साईं बाबा से अपनी बीमारी के बारे में बताकर, उनसे मुक्ति दिलाने के लिए प्रार्थना करने लगा| उसकी प्रार्थना सुनकर बाबा ने उसे चावड़ी में रहने के लिए कहा|
उस समय चावड़ी ऐसे रोगियों के रहने के लिए किसी भी तरह अनुकूल स्थान नहीं था, क्योंकि वह बहुत टूटी-फूटी और सीलनभरी थी| बरसात के मौसम में उसकी छत भी टपका करती थी, परन्तु बाबा की आज्ञा को कैसे टाला जा सकता था| अत: अम्मीर शक्कर वहां मन मारकर रहने लगा|
इतना ही नहीं, बाबा ने उसे मस्जिद में आने को मना कर रखा था, लेकिन बाबा का यह नियम था कि वह सुबह-शाम चावडी से होकर ही निकला करते थे| बाबा एक दिन के अंतराल पर जुलूस के साथ वहां पर आते और विश्राम भी करते थे| वहीं पर भक्त बाबा का पूजन, आरती करते| अम्मीर शक्कर को वहां बैठे-बैठे ही बाबा का दर्शन लाभ होता था| उसे वहां रहते हुए नौ महीने बीत गये|
अम्मीर शक्कर का वहां रहते हुए मन ऊब गया| उसे चावड़ी बंदीखाना लगने लगी| वैसे उसका गांव वहां से ज्यादा दूर नहीं था और वह वहां पर आराम से रह भी सकता था, लेकिन बाबा से अनुमति मांगी जाये तो शायद वे अनुमति न देंगे| इसलिए एक रात को वे चोरी-छिपे वहां से निकलकर कोपर गांव से जाकर एक धर्मशाला में ठहर गया| वहां पर उसने एक फकीर को देखा जो पानी के अभाव में तड़फ रहा था| उसने अम्मीर शक्कर से पानी मांगा| अम्मीर शक्कर ने उसे पानी लाकर दिया| पानी पीते ही फकीर ने दम तोड़ दिया| यह देखकर अम्मीर के होश उड़ गये| वह क्या करे और क्या न करे? उसने सोचा कि यदि इसके मरने की सूचना पुलिस को देता हूं तो पुलिस मुझे ही पकड़ेगी| फिर न जाने कौन-कौन-सी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा और पूरी छानबीन होने तक, उसे बेगुनाह होने तक पुलिस उसका पीछा नहीं छोड़ेगी| ऐसा सोचकर वह वहां से भाग निकला और सवेरा होने से पहले वे शिरडी जा पहुंचा| उस समय उसे बाबा की अनुमति के बिना शिरडी छोड़ने का अत्यन्त पछतावा हो रहा था| वह मन-ही-मन बाबा से प्रार्थना करने लगा और बाबा से माफी मांगते हुए चावड़ी लौटा, तो उसकी जान में जान आयी| इसके बाद वो चावड़ी में तब तक रहा, जब तक बाबा ने उसे वहां से जाने की अनुमति नहीं दी - और बाबा के आशीर्वाद से वह बीमारी से मुक्त हो गया|
अम्मीर शक्कर जिस चावड़ी में रहता था, साईं बाबा भी एक दिन छोड़कर रात में वहां सोते थे| चावड़ी में बाबा के साथ अम्मीर शक्कर भी सोता था| एक बार की बात है कि आधी रात के बाद बाबा ने जोर-जोर से अब्दुल को पुकार कर कहा - "अब्दुल ! जरा देख तो सही कोई दुष्ट मेरे बिस्तर पर चढ़ा आ रहा है|"
अब्दुल दौड़कर लालटेन ले आया और उसने बाबा का बिस्तर बहुत ध्यान से देखा, लेकिन उसे कुछ भी दिखाई न दिया| तब बाबा ने अब्दुल से जरा ध्यान से देखने को कहा और जमीन पर अपना सटका जोर-जोर से पटकने लगे|
इस हड़बड़ी से अम्मीर शक्कर की नींद टूट गयी| उसे यहां रहते हुए बहुत दिन हो चुके थे| उसे बाबा की बातों का कुछ-कुछ अंदाजा हो चुका था| भक्तों के संकटों को बाबा स्वयं का संकट कहते थे| फिर जब उसकी नजर अपने बिस्तर के पास में पड़ी तो देखा कि वहां पर कुछ हलचल हो रही है - और अब्दुल को लालटेन लाने को कहा, तो वहां पर सांप कुड़ली फैलाये बैठा, फन हिला रहा था, सबने देखा| फिर सबने मिलकर उस सांप को मार डाला| इस तरह बाबा ने समय से पहले ही सूचित करके अम्मीर शक्कर के प्राणों की रक्षा की|
Thursday, 8 December 2022
श्री साँई सच्चरित्र - अध्याय 37
ॐ सांई राम
आप सभी को शिर्डी के साँई बाबा ग्रुप की ओर से साईं-वार की हार्दिक शुभ कामनाएं, हम प्रत्येक साईं-वार के दिन आप के समक्ष बाबा जी की जीवनी पर आधारित श्री साईं सच्चरित्र का एक अध्याय प्रस्तुत करने के लिए श्री साईं जी से अनुमति चाहते है, हमें आशा है की हमारा यह कदम घर घर तक श्री साईं सच्चरित्र का सन्देश पंहुचा कर हमें सुख और शान्ति का अनुभव करवाएगा, किसी भी प्रकार की त्रुटी के लिए हम सर्वप्रथम श्री साईं चरणों में क्षमा याचना करते है...
चावड़ी का समारोह
इस अध्याय में हम कुछ थोड़ी सी वेदान्तिक विषयों पर प्रारम्भिक दृष्टि से समालोचना कर चावड़ी के भव्य समारोह का वर्णन करेंगे ।
धन्य है श्रीसाई, जिनका जैसा जीवन था, वैसी ही अवर्णनीय गति और क्रियाओं से पूर्ण नित्य के कार्यक्रम भी । कभी तो वे समस्त सांसारिक कार्यों से अलिप्त रहकर कर्मकाण्डी से प्रतीत होते और कभी ब्रहमानंद और कभी आत्मज्ञान में निमग्न रहा करते थे । कभी वे अनेक कार्य करते हुए भी उनसे असंबन्ध रहते थे । यघपि कभी-कभी वे पूर्ण निष्क्रिय प्रतीत होते, तथापि वे आलसी नहीं थे । प्रशान्त महासागर की नाईं सदैव जागरुक रहकर भी वे गंभीर, प्रशान्त और स्थिर दिखाई देते थे । उनकी प्रकृति का वर्णन तो सामर्थ्य से परे है ।
Wednesday, 7 December 2022
श्री साईं लीलाएं - बापू साहब बूटी को अभय दान
ॐ सांई राम
एक बार बापू साहब बूटी शिरडी आये हुए थे| तब एक दिन उनसे बाबा साहब डेंगले जो ज्योतिष विद्या के जानकर भी थे, ने बापू साहब बूटी से कहा - "आज का दिन आपके लिए बहुत घातक है| आपके जीवन पर कोई संकट आ सकता है| सावधान रहिये|" इस बात को सुनकर बापू साहब उदास और बेचैन हो गये कि अब क्या होगा?
जब बापू साहब बाबा के दर्शन करने को मस्जिद गये, तो बाबा ने उनसे पूछा - "बापू, क्या हो गया? ये नाना क्या कहते हैं? क्या वे तुम्हारी मृत्यु की भविष्यवाणी कर रहे हैं? लेकिन डरना नहीं| इनसे दृढ़तापूर्वक कह दो कि वह तुम्हें कैसे मारेगा, यह मुझे देखना है?" बाबा के इन शब्दों को सुनकर बापू साहब को बड़ा हौसला मिला| जिसके साथ बाबा जैसा रखवाला है उसका कोई क्या बिगाड़ सकता है? यह सोचकर वह बेफिक्र हो गये|
शाम के समय जब बापू साहब शौच करने के लिए गये तो वहां उन्हें एक सांप दिखाई दिया| उनके नौकर ने भी सांप को देखा और मारने के लिए पत्थर उठा लिया| बापू साहब ने एक लम्बी लाठी मंगवाई| लाठी आने से पहले ही वह सांप दीवार पर चढ़ते हुए नीचे गिर गया और शीघ्र ही गायब हो गया| उस समय बापू साहब को बाबा के सुबह कहे वचन याद आये और उनकी आँखें कृतज्ञता से भर आयीं|
Tuesday, 6 December 2022
श्री साईं लीलाएं - बाबा का संकट के प्रति सचेत करना
कल हमने पढ़ा था.. लोग दक्षिणा भी देते थे और गालियाँ भी
श्री साईं लीलाएं - बाबा का संकट के प्रति सचेत करना
साईं बाबा रहते तो शिरडी में ही थे, पर उनकी नजरें सदैव अपने भक्तों पर लगी रहती थीं| बाबा अपने भक्तों पर आने वाले संकटों के प्रति उन्हें आगाह भी करते और संकटों से उनकी रक्षा भी किया करते थे| अहमदनगर गांव के रहने वाले काका साहब मिरीकर, जिन्हें उस समय की सरकार ने 'सरदार' के खिताब से नवाजा था| उनके बेटे वाला साहब मिरीकर भी अपने पिता की ही तरह प्रसिद्ध थे| वे कोपर गांव के तहसीलदार थे| एक बार वे अपने ऑफिस के किसी कार्य से दिल्ली जा रहे थे, तब जाते समय वे शिरडी आये|
मस्जिद में पहुंचकर उन्होंने बाबा के दर्शन कर, चरणवंदना की और कुशलक्षेम पूछने के बाद, कुछ इधर-उधर की बातें कीं| बातों के बीच में बाबा ने उनसे पूछा - "मिरीकर, क्या तुम हमारी द्वारिकामाई को जानते हो?" बाला साहब इस प्रश्न से हैरान रह गये| तब साईं बाबा बोले - "क्या समझे नहीं? यह द्वारिकामाई अपनी मस्जिद ही है| यह माई अपनी गोद में आकर बैठनेवाले बच्चों क अभय देती हैं| उनके कष्टों और परेशानियों को दूर कर देती हैं| यह बड़ी ममतामयी और दयालु हैं| यह सरल हृदय भक्तों की माँ हैं| यदि किसी पर कोई संकट आ जाता है तो यह अवश्य ही उसकी रक्षा करती हैं| जो इनकी गोद में आकर बैठा, उसका कल्याण हो गया| जो विश्वास के साथ इनकी छांव में बैठा, मानो वह सुख के सिंहासन पर बैठा| इसलिये इसे द्वारिका या द्वारावती भी कहते हैं|"
जब बाला साहब जाने लगे तो बाबा ने उनके सिर पर अपना वरदहस्त रखकर उन्हें आशीर्वाद के साथ ऊदी प्रसाद भी दिया| जब वे उठे तो बाबा ने पूछा - "क्या तुम लम्बे बाबा को जानते हो?" तो मिरीकर ने मना कर दिया| फिर बाबा ने अपने बायें हाथ की मुट्ठी बनाकर दाहिने हाथ की हथेली पर कोहनी के बल खड़ी की और सांप की भांति हिलाते हुए बोले - "वह ऐसा भयानक होता है| लेकिन वह द्वारिकामाई के पुत्रों का बिगाड़ ही क्या सकता है| इसकी करनी कोई नहीं जानता| हमें सिर्फ इसकी लीला देखने का ही काम है| जब द्वारिकामाई स्वयं रक्षा करने - वाली है तो वह लम्बा बाबा हमारा क्या बिगाड़ेगा?" सब लोग बैठे बाबा की बात सुन रहे थे| उन्हें समझ नहीं आया कि बाबा के संकेत किसकी ओर हैं| पर बाबा से पूछने का साहस किसी में नहीं था|
फिर बाबा ने शामा को अपने पास बुलाकर उसे मिरीकर के साथ चितली गांव जाने को कहा| फिर वे दोनों तांगे से रवाना हो गये| वहां पहुंचकर उन्हें मालूम हुआ कि बड़े अफसर जिन्हें उनसे मिलना था अब तक नहीं आये थे| कुछ देर तक उनका इंतजार करने के बाद वे दोनों हनुमान मंदिर में जाकर ठहर गए| खाना खाने के बाद, रात का एक पहर बीत जाने पर वे बिस्तर पर बैठे, दीये के उजाले में बैठे इधर-उधर की बातों में लगे रहे| कुछ देर बाद बाला साहब ने एक अखबार उठाया और उसे पढ़ने लगे| वह अखबार पढ़ने में तल्लीन थे| न जाने कहां से एक सांप आया और उनके अंगोछे पर बैठ गया| उस समय सांप को किसी ने नहीं देखा|
जब वह रेंगने लगा तो उसके रेंगने की आवाज सुनकर चपरासी के होश-हवास उड़ गये| वह बुरी तरह घबराकर 'सांप-सांप' कहता हुआ चीखने लगा| उसकी आवाज सुनकर बाला साहब की हालात ऐसी हो गयी कि काटो तो खून नहीं| शामा भी बौखला गया| वे बाबा को याद करने लगा|
फिर वहां उपस्थित सभी लोग संभल गये| जिसके जो हाथ लगा उसने वही उठाकर सांप का काम तमाम कर दिया| सब लोग बला टलने से बेफिक्र हो गये| मिरीकर को बाबा ने निकलते समय 'लम्बा बाबा' यानी सांप की भविष्यवाणी शिरडी में ही कर दी थी| इसलिए साथ में संकट टालने हेतु शामा को भेजा था| इस घटना के बाद मिरीकर की साईं बाबा के प्रति निष्ठा और भी दृढ़ हो गयी|
ॐ साईं श्री साईं जय जय साईं
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बाबा के 11 वचन
1. जो शिरडी में आएगा, आपद दूर भगाएगा
2. चढ़े समाधी की सीढी पर, पैर तले दुःख की पीढ़ी कर
3. त्याग शरीर चला जाऊंगा, भक्त हेतु दौडा आऊंगा
4. मन में रखना द्रढ विश्वास, करे समाधी पूरी आस
5. मुझे सदा ही जीवत जानो, अनुभव करो सत्य पहचानो
6. मेरी शरण आ खाली जाए, हो कोई तो मुझे बताए
7. जैसा भाव रहे जिस जन का, वैसा रूप हुआ मेरे मनका
8. भार तुम्हारा मुझ पर होगा, वचन न मेरा झूठा होगा
9. आ सहायता लो भरपूर, जो माँगा वो नही है दूर
10. मुझ में लीन वचन मन काया, उसका ऋण न कभी चुकाया
11. धन्य-धन्य व भक्त अनन्य, मेरी शरण तज जिसे न अन्य
.....श्री सच्चिदानंद सदगुरू साईनाथ महाराज की जय.....
गायत्री मंत्र
तत्स॑वितुर्वरे॑ण्यम्
भ॒र्गो॑ दे॒वस्य॑ धीमहि।
धियो॒ यो नः॑ प्रचो॒दया॑त्॥
Word Meaning of the Gayatri Mantra
ॐ Aum = Brahma ;
भूर् bhoor = the earth;
भुवः bhuwah = bhuvarloka, the air (vaayu-maNdal)
स्वः swaha = svarga, heaven;
तत् tat = that ;
सवितुर् savitur = Sun, God;
वरेण्यम् varenyam = adopt(able), follow;
भर्गो bhargo = energy (sin destroying power);
देवस्य devasya = of the deity;
धीमहि dheemahi = meditate or imbibe
these first nine words describe the glory of Goddheemahi = may imbibe ; pertains to meditation
धियो dhiyo = mind, the intellect;
यो yo = Who (God);
नः nah = our ;
प्रचोदयात prachodayat = inspire, awaken!"
dhiyo yo naha prachodayat" is a prayer to God
भू:, भुव: और स्व: के उस वरण करने योग्य (सूर्य) देवता,,, की (बुराईयों का नाश करने वाली) शक्तियों (देवता की) का ध्यान करें (करते हैं),,, वह (जो) हमारी बुद्धि को प्रेरित/जाग्रत करे (करेगा/करता है)।
Simply :
तीनों लोकों के उस वरण करने योग्य देवता की शक्तियों का ध्यान करते हैं, वह हमारी बुद्धि को प्रेरित करे।
The God (Sun) of the Earth, Atmosphere and Space, who is to be followed, we meditate on his power, (may) He inspire(s) our intellect.












