शिर्डी के साँई बाबा जी की समाधी और बूटी वाड़ा मंदिर में दर्शनों एंव आरतियों का समय....

"ॐ श्री साँई राम जी
समाधी मंदिर के रोज़ाना के कार्यक्रम

मंदिर के कपाट खुलने का समय प्रात: 4:00 बजे

कांकड़ आरती प्रात: 4:30 बजे

मंगल स्नान प्रात: 5:00 बजे
छोटी आरती प्रात: 5:40 बजे

दर्शन प्रारम्भ प्रात: 6:00 बजे
अभिषेक प्रात: 9:00 बजे
मध्यान आरती दोपहर: 12:00 बजे
धूप आरती साँयकाल: 5:45 बजे
शेज आरती रात्री काल: 10:30 बजे

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निर्देशित आरतियों के समय से आधा घंटा पह्ले से ले कर आधा घंटा बाद तक दर्शनों की कतारे रोक ली जाती है। यदि आप दर्शनों के लिये जा रहे है तो इन समयों को ध्यान में रखें।

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Tuesday, 5 January 2021

श्री गुरु अंगद देव जी -साखियाँ - हरीके गाँव का अहंकारी चौधरी

ॐ सांँई राम जी



श्री गुरु अंगद देव जी -साखियाँ - हरीके गाँव का अहंकारी चौधरी

गुरु जी अपने पुराने मित्रों को मिलने के लिए कुछ सिख सेवको को साथ लेकर हरीके गाँव पहुँचे| गुरु जी की उपमा सुनकर बहुत से लोग श्रधा के साथ दर्शन करने आए| हरीके के चौधरी ने अपने आने की खबर पहले ही गुरु जी को भेज दी कि मैं दर्शन करने आ रहा हूँ| गाँव का सरदार होने के कारण उसमे अहम का भाव था| गुरु जी ने उसके बैठने के लिए पीहड़ा रखवा दिया व चादर बिछवा दी| चौधरी ने पीहड़े पर बैठना अपना अपमान समझा| वह पलंघ पर गुरु जी के साथ सिर की ओर बैठ गया| गुरु जी से वार्तालाप करके वह तो चला गया पर सिख शंका ग्रस्त हो गये और कहने लगे महाराज! चौधरी तो आप से भी ऊँचा होकर आपके साथ ही बैठ गया इसमें कितना अहंकार का भाव है, जिसे बड़ो का आदर करना नहीं आता| 

सिखों की बात सुनकर गुरु जी कहने लगे जो बड़ो का निरादर करता है वह छोटा ही रहता है, और जो बड़ो का आदर करता है वह अपने आप ही बड़ा हो जाता है| गुरु जी के ऐसे वचनों से सरदार बड़ा होते हुए भी छोटा हो गया|

Monday, 4 January 2021

श्री गुरु अंगद देव जी -साखियाँ - खडूर का मिरगी रोग वाला शराबी

 ॐ सांँई राम जी


श्री गुरु अंगद देव जी -साखियाँ - खडूर का मिरगी रोग वाला शराबी

खडूर के चौधरी को मिरगी का रोग था| वह शराब का बहुत सेवन करता था| एक दिन गुरु जी के पास आकर विनती करने लगा कि आप तो सब रोगियों का रोग दूर कर देते हो, आप मुझे भी ठीक कर दो| लोगों की बातों पर मुझे विश्वास तब आएगा जब मेरा मिरगी का रोग दूर हो जायेगा| गुरु जी कहने लगे चौधरी! अगर तू शराब पीना छोड़ दे तो तेरा मिरगी रोग दूर हो जायेगा| पर यदि तू फिर शराब पीने लग गया तो यह रोग तुझे फिर लग जायेगा| चौधरी गुरु जी को शराब ना पीने का वचन देकर चलागया| उसे फिर मिरगी का रोग ना हुआ| 

समय बीतता गया| एक दिन उसने फिर शराब पी ली, और शराबी होकर अपने मकान की छत पर चढ़ गया| छत से ही गुरु जी की तरफ मुख करके जोर-जोर से कहने लगा, गुरु जी मैंने आज फिर शराब पी ली है मुझे कोई मिरगी का रोग नहीं हुआ| गुरु जी कहने लगे, सावधान हो जाओ तुम्हें मिरगी का रोग लग चुका है| तब उसी ही पल चौधरी को मिरगी का दौरा पड़ा| वह अपनी छत से उलटकर नीचे आ गिरा और उसकी मौत हो गई| इस तरह वह चौधरी गुरु जी के वचनों को भुलाकर, मनमत में आकर अपनी जिंदगी से ही हाथ धो बैठा|

Sunday, 3 January 2021

श्री गुरु अंगद देव जी -साखियाँ - अंतर्यामी श्री गुरु अंगद साहिब जी

ॐ सांँई राम जी 


श्री गुरु अंगद देव जी -साखियाँ - अंतर्यामी श्री गुरु अंगद साहिब जी

श्री गुरु अंगद साहिब जी की सुपुत्री बीबी अमरो श्री अमरदास जी के भतीजे से विवाहित थी| आप ने बीबी अमरो जी को कहा की पुत्री मुझे अपने पिता गुरु के पास ले चलो| मैं उनके दर्शन करके अपना जीवन सफल करना चाहता हूँ| पिता समान वृद्ध श्री अमरदास जी की बात को सुनकर बीबी जी अपने घर वालो से आज्ञा लेकर आप को गाड़ी में बिठाकर खडूर साहिब ले गई| गुरु अंगद देव जी ने सुपुत्री से कुशल मंगल पूछा और कहा कि बेटा! जिनको साथ लेकर आई हो, उनको अलग क्यों बिठाकर आई हो| गुरु जी उन्हें अपना सम्बन्धी जानकर आगे आकर मिले| पर अमरदास जी कहने लगे कि मैं आपका सिख बनने आया हूँ| आप मुझे उपदेश देकर अपना सिख बनाए| 

लंगर के तैयार होते ही आपको लंगर वाले स्थान पर लेगये| अमरदास जी मन ही मन में सोचने लगे मैं तो कभी मांस नहीं खाता, अगर खा लिया तो प्राण टूट जायेगा| लकिन अगर वापिस कर दिया तो गुरु अपना अनादर समझकर नाराज़ हो जायेगें| हाँ! अगर ये गुरु अंतर्यामी हैं तो अपने आप ही मेरे दिल की बात जान लेगा और लांगरी को मेरे आगे मांस रखने को मना कर देगा| अभी आप के मन में ऐसा विचार आ ही रहा था की श्री गुरु अंगद देव जी ने लंगर बाँटने वाले को इनके आगे मांस रखने को मना कर दिया कि यहे वैष्णव भोजन ही करते हैं| इतना सुनते ही अमरदास जी की खुशी का ठिकाना ना रहा और मन ही मन कहने लगे गुरु जी अंतर्यामी, घट घट की जानने वाले हैं इनको ही गुरु धारण करना चहिये|

Saturday, 2 January 2021

श्री गुरु अंगद देव जी -साखियाँ - जुलाही को आरोग्य करना

 ॐ सांँई राम जी



श्री गुरु अंगद देव जी -साखियाँ - जुलाही को आरोग्य करना

एक दिन अमरदास जी गुरु जी के स्नान के लिए पानी की गागर सिर पर उठाकर प्रातःकाल आ रहे थे कि रास्ते में एक जुलाहे कि खड्डी के खूंटे से आपको चोट लगी जिससे आप खड्डी में गिर गये| गिरने कि आवाज़ सुनकर जुलाहे ने जुलाही से पुछा कि बाहर कौन है? जुलाही ने कहा इस समय और कौन हो सकता है, अमरू घरहीन ही होगा, जो रातदिन समधियों का पानी ढ़ोता फिरता है| जुलाही की यह बात सुनकर अमरदास जी ने कहा कमलीये! में घरहीन नहीं, मैं गुरु वाला हूँ| तू पागल है जो इस तरह कह रही हो|

उधर इनके वचनों से जुलाही पागलों की तरह बुख्लाने लगी| गुरु अंगद देव जी ने दोनों को अपने पास बुलाया और पूछा प्रातःकाल क्या बात हुई थी, सच सच बताना| जुलाहे ने सारी बात सच सच गुरु जी के आगे रख दी कि अमरदास जी के वचन से ही मेरी पत्नी पागल हुई है| आप किरपा करके हमें क्षमा करें और इसे अरोग कर दे नहितो मेरा घर बर्बाद हो जायेगा| 

गुरु जी ने अमरदास जी को बारह वरदान देकर अपने गले से लगा लिया और वचन किया कि आप मेरा ही रूप हो गये हो| इसके पश्चात गुरु अंगद देव जी ने अपनी कृपा दृष्टि से जुलाही की तरफ देखा और उसे अरोग कर दिया| इस प्रकार वे दोनों गुरु जी की उपमा गाते हुए घर की ओर चाल दिये|

Friday, 1 January 2021

श्री गुरु अंगद देव जी - गुरु गद्दी मिलना

ॐ सांँई राम जी 



श्री गुरु अंगद देव जी - गुरु गद्दी मिलना

सिखों को श्री लहिणा जी की योग्यता दिखाने के लिए तथा दोनों साहिबजादो, भाई बुड्डा जी आदि और सिख प्रेमियों की परीक्षा के लिए आप ने कई कौतक रचे, जिनमे से कुछ का वर्णन इस प्रकार है:-

गुरु जी ने एक दिन रात के समय अपने सिखों व सपुत्रो को बारी-२ से यह कहा कि हमारे वस्त्र नदी पर धो कर सुखा लाओ| पुत्रो ने कहा,"अब रात आराम करो दिन निकले धो लायेंगे|" सिखों ने भी आज्ञा ना मानी| पर लहिणा जी उसी समय आपके वस्त्र उठाकर धोने चले गए और सुखा कर वापिस लाए|

एक दिन गुरु जी के निवास स्थान पर चूहिया मरी पड़ी थी| गुरु जी ने लखमी दास व श्री चंद के साथ और सिखों को भी कहा कि बेटा! यह मृत चूहिया बाहर फेंक दो| बदबू के कारण किसी ने भी गुरु जी कि बात कि परवाह नहीं कि| फिर गुरु जी ने कहा, पुरुष! यह मृत चूहिया फेंक कर फर्श साफ कर दो| तब भाई लहिणा जी शीघ्रता से चूहिया पकडकर बाहर फेंक दी और फर्श धोकर साफ कर दिया|

एक दिन गुरु जी ने कंसी का एक कटर कीचड वाले पानी में फेंक कर कहा कि हमारा कीचड़ में गिरा कटोरा साफ करके लाओ| वस्त्र खराब होने के डर से बेटों व सिखों ने इंकार कर दिया| पर लहिणा जी उसी समय कीचड़ वाले गड्डे में चले गए और कटोरा साफ करके गुरु जी के समक्ष आये|

एक बार लगातार बारिश के कारण लंगर का प्रबंध ना हो सका| गुरु जी जी ने सबको कहा कि इसी सामने वाले किकर के वृक्ष पर चढ़कर उसे हिलाकर मिठाई झाड़ो| सब ने कहा, महाराज! कीकरों पर भी मिठाई होती है, जो हिलाने पर नीचे गिरेगी? संगत के सामने हमे शर्मिंदा क्यों करवाते हो? तब गुरु जी ने भाई लहिणा को कहा, पुरुष! तुम ही किकर को हिलाकर संगत को मिठाई खिलाओ| संगत भूखी है| गुरु जी का आदेश मान कर भाई जी ने वैसा ही किया| वृक्ष के हिलते ही बहुत सारी मिठाई नीचे गिरी, जिसे खाकर संगत तृप्त हो गई|

एक दिन गुरु जी ने मैले कुचैले वस्त्र पहनकर, हाथ में कट्टार व डंडा पकड़कर, कमर पर रस्से बांध लिए व चार पांच कुत्ते पीछे लगा लिए| काटने के भय से कोई भी गुरु जी के नजदीक ना आये| तत्पश्चात जब गुरु जी जंगल पहुँचे तो केवल पांच सिख, बाबा बुड्डा जी व लहिणा जी साथ रह गए| गुरु जी ने अपनी माया के साथ चादर में लपेटा हुआ मुर्दा दिखाया व सिखों को खाने के लिए कहा| यह बात सुनकर दूसरे सिख वृक्ष के पीछे जा खड़े हुए,पर भाई लहिणा जी वहीं खड़े रहे| गुरु जी ने उनसे ना जाने का कारण पूछा तो भाई कहने लगे, मेरे तो तुम ही तुम हो, में कहा जाऊँ? तब गुरु जी ने कहा अगर नहीं जाना तो इस मुर्दे को खाओ| भाई जी ने गुरु जी से पूछा, महाराज! किस तरफ से खाऊँ, सिर या पाँव कि तरफ से? गुरु जी ने उत्तर दिया पाँव कि तरफ से| जब लहिणा जी गुरु जी का वचन मानकर पाँव वाला कपडा उठाया तो वहाँ मुर्दे कि जगह कड़ाह का परसाद प्रतीत हुआ| जब भाई जी खाने को तैयार हुए तो गुरु जी ने उन्हें अपनी बाहों में लेकर कहा कि हमारे अंग के साथ लगकर आप अंगद हो गए|


इस तरह आपको अपनी गद्दी का योग्य अधिकारी जानकर १७ आषाढ संवत १५१६ को पांच पैसे व नारियल आप जी के आगे रखकर तीन परिक्रमा कि और पहले खुद माथा टेका,फिर संगत से टिकवाया| उसके पश्चात् वचन किया कि आज से इन्ही को मेरा ही रूप समझना, जो इनको नहीं मानेगा वो हमारा सिख नहीं है| गुरु जी कि आज्ञा मानकर सभी ने गुरु अंगद देव जी को माथा टेक दिया मगर दोनों साहिबजादों ने यह कहकर माथा टेकने से इंकार कर दिया कि हम अपने एक सेवक को माथा टेकते अछे नहीं लगते|

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बाबा के 11 वचन

ॐ साईं राम

1. जो शिरडी में आएगा, आपद दूर भगाएगा
2. चढ़े समाधी की सीढी पर, पैर तले दुःख की पीढ़ी कर
3. त्याग शरीर चला जाऊंगा, भक्त हेतु दौडा आऊंगा
4. मन में रखना द्रढ विश्वास, करे समाधी पूरी आस
5. मुझे सदा ही जीवत जानो, अनुभव करो सत्य पहचानो
6. मेरी शरण आ खाली जाए, हो कोई तो मुझे बताए
7. जैसा भाव रहे जिस जन का, वैसा रूप हुआ मेरे मनका
8. भार तुम्हारा मुझ पर होगा, वचन न मेरा झूठा होगा
9. आ सहायता लो भरपूर, जो माँगा वो नही है दूर
10. मुझ में लीन वचन मन काया, उसका ऋण न कभी चुकाया
11. धन्य-धन्य व भक्त अनन्य, मेरी शरण तज जिसे न अन्य

.....श्री सच्चिदानंद सदगुरू साईनाथ महाराज की जय.....

गायत्री मंत्र

ॐ भूर्भुवः॒ स्वः॒
तत्स॑वितुर्वरे॑ण्यम्
भ॒र्गो॑ दे॒वस्य॑ धीमहि।
धियो॒ यो नः॑ प्रचो॒दया॑त्॥

Word Meaning of the Gayatri Mantra

ॐ Aum = Brahma ;
भूर् bhoor = the earth;
भुवः bhuwah = bhuvarloka, the air (vaayu-maNdal)
स्वः swaha = svarga, heaven;
तत् tat = that ;
सवितुर् savitur = Sun, God;
वरेण्यम् varenyam = adopt(able), follow;
भर्गो bhargo = energy (sin destroying power);
देवस्य devasya = of the deity;
धीमहि dheemahi = meditate or imbibe

these first nine words describe the glory of Goddheemahi = may imbibe ; pertains to meditation

धियो dhiyo = mind, the intellect;
यो yo = Who (God);
नः nah = our ;
प्रचोदयात prachodayat = inspire, awaken!"

dhiyo yo naha prachodayat" is a prayer to God


भू:, भुव: और स्व: के उस वरण करने योग्य (सूर्य) देवता,,, की (बुराईयों का नाश करने वाली) शक्तियों (देवता की) का ध्यान करें (करते हैं),,, वह (जो) हमारी बुद्धि को प्रेरित/जाग्रत करे (करेगा/करता है)।


Simply :

तीनों लोकों के उस वरण करने योग्य देवता की शक्तियों का ध्यान करते हैं, वह हमारी बुद्धि को प्रेरित करे।


The God (Sun) of the Earth, Atmosphere and Space, who is to be followed, we meditate on his power, (may) He inspire(s) our intellect.