शिर्डी के साँई बाबा जी की समाधी और बूटी वाड़ा मंदिर में दर्शनों एंव आरतियों का समय....

"ॐ श्री साँई राम जी
समाधी मंदिर के रोज़ाना के कार्यक्रम

मंदिर के कपाट खुलने का समय प्रात: 4:00 बजे

कांकड़ आरती प्रात: 4:30 बजे

मंगल स्नान प्रात: 5:00 बजे
छोटी आरती प्रात: 5:40 बजे

दर्शन प्रारम्भ प्रात: 6:00 बजे
अभिषेक प्रात: 9:00 बजे
मध्यान आरती दोपहर: 12:00 बजे
धूप आरती साँयकाल: 5:45 बजे
शेज आरती रात्री काल: 10:30 बजे

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निर्देशित आरतियों के समय से आधा घंटा पह्ले से ले कर आधा घंटा बाद तक दर्शनों की कतारे रोक ली जाती है। यदि आप दर्शनों के लिये जा रहे है तो इन समयों को ध्यान में रखें।

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Saturday, 9 April 2016

माँ ब्रम्हचारिणी

ॐ सांई राम



माँ दुर्गा की नव शक्तियों का दूसरा रूप माँ ब्रम्हचारिणी का है | यहाँ ब्रम्हा
शब्द का अर्थ तपस्या है | ब्रम्हचारिणी अर्थात तप की चारिनी ( तप का आचरण करने वाली | ) ब्रम्हचारिणी देवी का स्वरूप पूर्ण ज्योतिर्मय एवं अत्यंत भव्य है | इनके दाहिने हाथ में जप की माला और बहिने हाथ में कमण्डल रहता है | अपने पूर्व जन्म में जब ये हिमालय के घर पुत्री-रूप में उत्पन हुई थीं तब नारद के उपदेश से इन्होने भगवान् शंकर को पति रूप में प्राप्त करने के लिए अत्यंत कठिन तपस्या की थी | दुष्कर तपस्या के कारण इन्हें तपश्चारिणी अर्थात ब्रम्हचारिणी नाम से अभिहित किया गया |

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This is also a kind of SEWA.

Friday, 8 April 2016

प्रथम माँ शैलपुत्री

ॐ सांई राम


ॐ सांई राम
आप सभी को नवरात्रों की  हार्दिक बधाई 

प्रथम माँ शैलपुत्री

दुर्गा पूजा के प्रथम दिन माता शैलपुत्री की पूजा-वंदना इस मंत्र द्वारा की जाती है.
मां दुर्गा की पहली स्वरूपा और शैलराज हिमालय की पुत्री शैलपुत्री के पूजा के साथ ही दुर्गा पूजा आरम्भ हो जाता है. नवरात्र पूजन के प्रथम दिन कलश स्थापना के साथ इनकी ही पूजा और उपासना की जाती है. माता शैलपुत्री का वाहन वृषभ है, उनके दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल का पुष्प रहता है. नवरात्र के इस प्रथम दिन की उपासना में योगी अपने मन को 'मूलाधार' चक्र में स्थित करते हैं और यहीं से उनकी योग साधना प्रारंभ होता है. पौराणिक कथानुसार मां शैलपुत्री अपने पूर्व जन्म में प्रजापति दक्ष के घर कन्या रूप में उत्पन्न हुई थी. उस समय माता का नाम सती था और इनका विवाह भगवान् शंकर से हुआ था. एक बार प्रजापति दक्ष ने यज्ञ आरम्भ किया और सभी देवताओं को आमंत्रित किया परन्तु भगवान शिव को आमंत्रण नहीं दिया. अपने मां और बहनों से मिलने को आतुर मां सती बिना निमंत्रण के ही जब पिता के घर पहुंची तो उन्हें वहां अपने और भोलेनाथ के प्रति तिरस्कार से भरा भाव मिला. मां सती इस अपमान को सहन नहीं कर सकी और वहीं योगाग्नि द्वारा खुद को जलाकर भस्म कर दिया और अगले जन्म में शैलराज हिमालय के घर पुत्री रूप में जन्म लिया. शैलराज हिमालय के घर जन्म लेने के कारण मां दुर्गा के इस प्रथम स्वरुप को माँ शैलपुत्री कहा जाता है.
 

-: आज का साईं सन्देश :-

बाबा पावन चरण में,
अहंकार को छोड़ ।
जीवन के पथ हो सुगम,
साईं रिश्ता जोड़ ।। 
मिटे प्रभु से दूरियां,
योग सिद्धि पा जाय ।
साईं बाबा की कथा,
ध्यान लगा सुन जाय ।।

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Thursday, 7 April 2016

श्री साई सच्चरित्र - अध्याय 30

ॐ सांई राम


आप सभी को शिर्डी के साँईं बाबा ग्रुप की ओर से साईं-वार की हार्दिक शुभ कामनाएं
हम प्रत्येक साईं-वार के दिन आप के समक्ष बाबा जी की जीवनी पर आधारित श्री साईं सच्चित्र का एक अध्याय प्रस्तुत करने के लिए श्री साईं जी से अनुमति चाहते है
हमें आशा है की हमारा यह कदम घर घर तक श्री साईं सच्चित्र का सन्देश पंहुचा कर हमें सुख और शान्ति का अनुभव करवाएगा
किसी भी प्रकार की त्रुटी के लिए हम सर्वप्रथम श्री साईं चरणों में क्षमा याचना करते है...




श्री साई सच्चरित्र - अध्याय 30
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शिरडी को खींचे गये भक्त
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1. वणी के काका वैघ
2. खुशालचंद
3. बम्बई के रामलाल पंजाबी ।
इस अध्याय में बतलाया गया है कि तीन अन्य भक्त किस प्रकार शिरडी की ओर खींचे गये ।

Wednesday, 6 April 2016

कृष्ण कन्हैया साईं

ॐ साईं राम



 कृष्ण  कन्हैया  साईं
गोपाला  है  साईं
मुरली  मनोहर  साईं
लीलाधर  है  साईं
है  गोविंदा  साईं
गोकुल  वासी  साईं
मुरलीधर  है  साईं
गिरधर  प्यारा  साईं .....
साईं  कृष्ण  साईं  केशव
साईं  है  घनश्याम  हमारे
अल्लाह  साईं  मौला  साईं 
नानक  साईं  भोला  साईं
साईं  साईं  साईं ......जय  जय  साईं 
सबकी  चिंता  हरने  वाले 
साईं  है  भगवान  हमारे

मालिक तेरी रजा रहे और तू ही तू रहे,
बाकी न मैं रहूँ न मेरी आरजू रहे ।
जब तक कि तन में जान रगों में लहू रहे,
तेरा ही जिक्र या, तेरी ही जुस्तजू रहे ।
अल्लाह  अपने  बन्दों  पर  इतना  करम  करना,
सुख  हो  या  दुःख  सब  पर  रहें  नज़र  करना
उसके  दर  पे  "सुकून "  मिलता  है, उसके  "इबादत " से  नूर  मिलता  है 
जो  झुक  गया  " साईं " के  सजदे  में, उसे  कुछ  न  कुछ  ज़रूर  मिलता  है 

सब  मिल  बोलो  साईं  नाथ  महाराज  की  जय

ये अत्यंत सुंदर भजन पंखुड़ियां बाबा की लाडली बेटी बहन साईं बाईजा की भजन बगिया से आप तक लाई गई हैं । बाबा की कृपा इन पर सदा बनी रहे ।


 -: आज का साईं सन्देश :-

साईं बाबा का चरित,
सागर जैसा होय ।
 ज्ञान और भक्ति रतन,
वह पाय जो खोय ।।

 सीख भरे वेदांत के,
बाबा के उपदेश ।
 श्रवण करो अति ध्यान से,
 साईं के सन्देश ।।

 

Tuesday, 5 April 2016

"माँ कैसी होती है"

ॐ सांई राम



"माँ कैसी होती है"



एक माँ थी जिसका एक लड़का था, बाप मर चुका था, माँ घरो में बर्तन मांजती थी बेटे को अपना पेट काटकर एक अच्छे अंग्रेजी स्कूल में पढ़ाती थी,एक दिन स्कूल में किसी बच्चे ने उसके लड़के के आँख में पेंसिल मार दी ,लड़के की आँख चली गई ,डाक्टर ने कहा ये आँख नहीं बचेगी दूसरी लगेगी ,तो माँ ने अपने कलेजे के टुकड़े के लिए अपनी एक आँख दे दी ,अब वो देखने में भी अच्छी नहीं थी, बेटा उसको स्कूल आने को मना करता था क्योंकि वो देखने में अच्छी और पढ़ी लिखी नहीं थी ऊपर से एक आँख भी नहीं रही, उसे अपनी माँ पर शर्म आती थी, कभी लंच बॉक्स देने आती भी थी तो मुह छुपा कर और अपने को नौकरानी बताती थी ,अपने बच्चे की ख्वाइश पूरी करने को वो दिन रात काम करती लेकिन बेटे को कमी महसूस नहीं होने देती , बेटा जवान हुआ एक सरकारी अधिकारी बना उसने लव मैरिज की, उसने अपनी माँ को भी नहीं बुलाया ,और अलग घर ले बीबी के साथ रहने लगा माँ बूढी हो रही थी बीमार भी रहने लगी ,लेकिन लड़का अपनी पत्नी और हाई सोसाइटी में व्यस्त रहने लगा उसे माँ की याद भी नहीं आती थी, माँ बीमार रहती लेकिन दिन रात अपने पुत्र की सम्रद्धि और उन्नति के लिए भगवान् से दुआ मांगती रहती कुछ पडोसी माँ का ख्याल रखते ,एक बार वो बहुत बीमार पड़ी तो उसने अपने बेटे को देखने की इच्छा जाहिर की लोग लड़के को बुलाने गए तो,वो अपनी बीबी के साथ कहीं टूर पे घुमने जा रहा था वो नहीं आया उसने कुछ पैसे इलाज़ के लिए भेज दिए ,लेकिन माँ का इलाज़ तो उसका बेटा था जिसको मरने से पहले देखना चाहती थी उसे प्यार देना चाहती थी, वो फिर भी बेटे का इन्तेजार करती रही ,उसके कलेजे का टुकड़ा उसके आशाओं के टुकड़े कर रहा था ,वो आया लेकिन तब तक माँ मर चुकी थी उसके हाथ में एक फोटो था लड़के का वही बचपन की स्कूल ड्रेस बाला फोटो धुन्दला गन्दा सा जिसे हर वक्त सीने से लगाये रहती थी, आज भी सीने से लगाये थी ,लेकिन मरते दम तक वो अपने कलेजे के टुकड़े को कलेजे से न लगा सकी दिन बीते वक्त बदला लड़के का कार से एक्सिडेंट हुआ इस एक्सिडेंट में उसकी दोनों आँख चली गई चेहरे पर चोट लगने से कुरूप लगने लगा दोनों पैर बेकार हो गए चलने में लचार हो गया ,पत्नी अमीर घर की लड़की थी ,वो दिनों दिन पति से दूर होने लगी क्योंकि पति अब कुरूप और विकलांग था ,और एक दिन वो पति को छोड़ कर चली गई ,तब बेटे को माँ की याद आयी ,की कैसे उसने अपने बेटे के लिए अपनी एक आँख दे दी जीवन के आखरी समय तक वो उसकी फोटो को सीने से लगाये रही,और वो उसको अपनी पत्नी और हाई सोसाइटी के लिए माँ को याद भी नहीं करता था आज ईश्वर ने उसे बता दिया की माँ का प्यार असीम होता है, निस्वार्थ होता है, दुनिया में उससे ज्यादा प्यार करने बाला कोई नहीं ,वो लेटे लेटे यही सोंच रहा था और रो रहा था की ईश्वर ने शायद माँ के प्यार की क़द्र न करने की सजा दी-----------लेकिन शायद माँ स्वर्ग में भी उसकी इस हालत को देख तड़प उठी होगी "

"माँ जीवन का अनमोल और निस्वार्थ प्यार है किसी और के प्यार के लिए उसे मत ठुकराना"

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बाबा के 11 वचन

ॐ साईं राम

1. जो शिरडी में आएगा, आपद दूर भगाएगा
2. चढ़े समाधी की सीढी पर, पैर तले दुःख की पीढ़ी कर
3. त्याग शरीर चला जाऊंगा, भक्त हेतु दौडा आऊंगा
4. मन में रखना द्रढ विश्वास, करे समाधी पूरी आस
5. मुझे सदा ही जीवत जानो, अनुभव करो सत्य पहचानो
6. मेरी शरण आ खाली जाए, हो कोई तो मुझे बताए
7. जैसा भाव रहे जिस जन का, वैसा रूप हुआ मेरे मनका
8. भार तुम्हारा मुझ पर होगा, वचन न मेरा झूठा होगा
9. आ सहायता लो भरपूर, जो माँगा वो नही है दूर
10. मुझ में लीन वचन मन काया, उसका ऋण न कभी चुकाया
11. धन्य-धन्य व भक्त अनन्य, मेरी शरण तज जिसे न अन्य

.....श्री सच्चिदानंद सदगुरू साईनाथ महाराज की जय.....

गायत्री मंत्र

ॐ भूर्भुवः॒ स्वः॒
तत्स॑वितुर्वरे॑ण्यम्
भ॒र्गो॑ दे॒वस्य॑ धीमहि।
धियो॒ यो नः॑ प्रचो॒दया॑त्॥

Word Meaning of the Gayatri Mantra

ॐ Aum = Brahma ;
भूर् bhoor = the earth;
भुवः bhuwah = bhuvarloka, the air (vaayu-maNdal)
स्वः swaha = svarga, heaven;
तत् tat = that ;
सवितुर् savitur = Sun, God;
वरेण्यम् varenyam = adopt(able), follow;
भर्गो bhargo = energy (sin destroying power);
देवस्य devasya = of the deity;
धीमहि dheemahi = meditate or imbibe

these first nine words describe the glory of Goddheemahi = may imbibe ; pertains to meditation

धियो dhiyo = mind, the intellect;
यो yo = Who (God);
नः nah = our ;
प्रचोदयात prachodayat = inspire, awaken!"

dhiyo yo naha prachodayat" is a prayer to God


भू:, भुव: और स्व: के उस वरण करने योग्य (सूर्य) देवता,,, की (बुराईयों का नाश करने वाली) शक्तियों (देवता की) का ध्यान करें (करते हैं),,, वह (जो) हमारी बुद्धि को प्रेरित/जाग्रत करे (करेगा/करता है)।


Simply :

तीनों लोकों के उस वरण करने योग्य देवता की शक्तियों का ध्यान करते हैं, वह हमारी बुद्धि को प्रेरित करे।


The God (Sun) of the Earth, Atmosphere and Space, who is to be followed, we meditate on his power, (may) He inspire(s) our intellect.