शिर्डी के साँई बाबा जी की समाधी और बूटी वाड़ा मंदिर में दर्शनों एंव आरतियों का समय....

"ॐ श्री साँई राम जी
समाधी मंदिर के रोज़ाना के कार्यक्रम

मंदिर के कपाट खुलने का समय प्रात: 4:00 बजे

कांकड़ आरती प्रात: 4:30 बजे

मंगल स्नान प्रात: 5:00 बजे
छोटी आरती प्रात: 5:40 बजे

दर्शन प्रारम्भ प्रात: 6:00 बजे
अभिषेक प्रात: 9:00 बजे
मध्यान आरती दोपहर: 12:00 बजे
धूप आरती साँयकाल: 5:45 बजे
शेज आरती रात्री काल: 10:30 बजे

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निर्देशित आरतियों के समय से आधा घंटा पह्ले से ले कर आधा घंटा बाद तक दर्शनों की कतारे रोक ली जाती है। यदि आप दर्शनों के लिये जा रहे है तो इन समयों को ध्यान में रखें।

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Saturday, 9 May 2020

दो अक्षर लिखना चाहती हूँ, साई मैं तेरे प्यार में,

ॐ सांई राम


दो अक्षर लिखना चाहती हूँ, साई मैं तेरे प्यार में,
ये अक्षर शामिल कर लेना, भक्तो अपनी पुकार में !

साईं मेरे है दयालु, दीनबंधु और दीनानाथ,
जिसका कोई नहीं होता, साईं रखते सिर पर हाथ,
ज्ञान का दीप जलाते साईं, जीवन के अंधकार में,
दो अक्षर लिखना चाहती हूँ, साई मैं तेरे प्यार में !

साईं दर पर आकर जो, चरणों में शीश झुकाते है,
आशीष साईं का मिलता है, और दुःख सारे मिट जाते है,
साईं ने खाली ना जाने दिया, जो आ गया दरबार में,
दो अक्षर लिखना चाहती हूँ, साई मैं तेरे प्यार में !

पापी हो फिर भी आ जाना, साईं का दिल तो बहुत बड़ा,
प्यार से उसको देखा साईं ने, जो भी दर पर आन खड़ा,
चरणों में है इतना सुख, जो कही नहीं संसार में,
दो अक्षर लिखना चाहती हूँ, साई मैं तेरे प्यार में !

साईं गुरु गोबिंद नानक, अल्लाह साईं सोयम ईसा,
साईं बुध पैगम्बर है, दिगम्बर है साईं जगदीशा,
सब देवो के दर्शन हो गाये, साईं के अवतार में,
दो अक्षर लिखना चाहती हूँ, साई मैं तेरे प्यार में

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Friday, 8 May 2020

मैं साईं के चरणों में अपना शीश झुकाती हूँ

ॐ सांई राम


मैं  साईं  के  चरणों  में  अपना  शीश  झुकाती  हूँ
जो  पाया  है  साईं  से  सब  बतलाती  हूँ,

मैंने  जब  साईं  को  अपना  हाल  सुनाया  है,
साईं  ने  दया  दिखलाई  मुझे  अपना  बनाया  है,
में  हृदय  में  साईं  को  बसना  चाहती  हूँ,
में  साईं  के  चरणों  में  अपना  शीश  झुकाती  हूँ

मैं   अपने  कर्मों  से  बड़ी  शर्मसार  हूँ  साईं,
फिर  भी  मेरे  दाता  तेरी  तलबदार  हूँ  मेरे  साईं,
विश्वास  करो  मेरा  बात  सच्ची  कहती  हूँ,
में  साईं  के  चरणों  में  अपना  शीश  झुकाती  हूँ

शिर्डी  की  भूमि  तो  बढ़ी  गौरवशाली  है,
सब  कुछ  पाया  उसने  जो  आया  सवाली  है,
इस  धरती  की  धूली  को  मस्तक  से  लगाती  हूँ,
में  साईं  के  चरणों  में  अपना  शीश  झुकाती  हूँ

छवि  देखि  जो  साईं  की  आँखों  में  बसा  ली  है,
सच  पूछो  तो  बाबा  आज  नियामत  पा  ली  है,
तेरी  मूरत  पे  साईं  मैं  बलिहारी  जाती  हूँ,
में  साईं  के  चरणों  में  अपना  शीश  झुकाती  हूँ।

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Thursday, 7 May 2020

श्री साई सच्चरित्र - अध्याय 51 - उपसंहार

ॐ सांई राम


आप सभी को शिर्डी के साँई बाबा ग्रुप की ओर से श्री साईं-वार की हार्दिक शुभ कामनाएं, हम प्रत्येक साईं-वार के दिन आप के समक्ष बाबा जी की जीवनी पर आधारित श्री साईं सच्चित्र का एक अध्याय प्रस्तुत करने के लिए श्री साईं जी से अनुमति चाहते है , हमें आशा है की हमारा यह कदम  घर घर तक श्री साईं सच्चित्र का सन्देश पंहुचा कर हमें सुख और शान्ति का अनुभव करवाएगा, किसी भी प्रकार की त्रुटी के लिए हम सर्वप्रथम श्री साईं चरणों में क्षमा याचना करते है...


श्री साई सच्चरित्र - अध्याय 51 - उपसंहार 

अध्याय – 51 पूर्ण हो चुका है और अब अन्तिम अध्याय (मूल ग्रन्थ का 52 वां अध्याय) लिखा जा रहा है और उसी प्रकार सूची लिखने का वचन दिया है, जिस प्रकार की अन्य मराठी धार्मिक काव्यग्रन्थों में विषय की सूची अन्त में लिखी जाती है । अभाग्यवश हेमाडपंत के कागजपत्रों की छानबीन करने पर भी वह सूची प्राप्त न हो सकी । तब बाब के एक योग्य तथा धार्मि भक्त ठाणे के अवकाशप्राप्त मामलतदार श्री. बी. व्ही. देव ने उसे रचकर प्रस्तुत किया । पुस्तक के प्रारम्भ में ही विषयसूची देने तथा प्रत्येक अध्याय में विषय का संकेत शीर्षक स्वरुप लिखना ही आधुनिक प्रथा है, इसलिये यहाँ अनुक्रमाणिका नहीं दी जा रही है । अतः इस अध्याय को उपसंहार समझना ही उपयुक्त होगा । अभाग्यवश हेमा़डपंत उस समय तक जीवित न रहे कि वे अपने लिखे हुए इस अध्याय की प्रति में संशोधन करके उसे छपने योग्य बनाते ।

श्री सदगुरु साई की महानता
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हे साई, मैं आपकी चरण वन्दना कर आपसे शरण की याचना करता हूँ, क्योकि आप ही इस अखिल विश्व के एकमात्र आधार है । यदि ऐसी ही धारणा लेकर हम उनका भजन-पूजन करें तो यह निश्चित है कि हमारी समस्त इच्छाएं शीघ्र ही पूर्ण होंगी और हमें अपने परम लक्ष्य की प्राप्ति हो जायेगी । आज निन्दित विचारों के तट पर माया-मोह के झंझावात से धैर्य रुपी वृक्ष की जड़ें उखड़ गई है । अहंकार रुपी वायु की प्रबलता से हृदय रुपी समुद्र में तूफान उठ खड़ा हुआ है, जिसमें क्रोध और घृणा रुपी घड़ियाल तैरते है और अहंभाव एवं सन्देह रुपी नाना संकल्प-विकल्पों की संतत भँवरों में निन्दा, घृणा और ईर्ष्या रुपी अगणित मछलियाँ विहार कर रही है । यघपि यह समुद्र इतना भयानक है तो भी हमारे सदगुरु साई महाराज उसमें अगस्त्य स्वरुप ही है । इसलिये भक्तों को किंचितमात्र भी भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है । हमारे सदगुरु तो जहाज है और वे हमें कुशलतापूर्वक इस भयानक भव-समुद्र से पार उतार देंगे ।

प्रार्थना

श्री सच्चिदानंद साई महाराज को साष्टांग नमस्कार करके उनके चरण पकड़ कर हम सब भक्तों के कल्याणार्थ उनसे प्रार्थना करते है कि हे साई । हमारे मन की चंचलता और वासनाओं को दूर करो । हे प्रभु । तुम्हारे श्रीचरणों के अतिरिक्त हममें किसी अन्य वस्तु की लालसा न रहे । तुम्हारा यह चरित्र घर-घर पहुँचे और इसका नित्य पठन-पाठन हो और जो भक्त इसका प्रेमपूर्वक अध्ययन करें, उनके समस्त संकट दूर हो ।


फलश्रुति (अध्ययन का पुरस्कार)

अब इस पुस्तक के अध्ययन से प्राप्त होने वाले फल के सम्बन्ध में कुछ शब्द लिखूँगा । इस ग्रन्थ के पठन-पठन से मनोवांछित फल की प्राप्ति होगी । पवित्र गोदावरी नदी में स्नान कर, शिरडी के समाधि मन्दिर में श्री साईबाबा की समाधि के दर्शन कर लेने के पश्चात इस ग्रन्थ का पठन-पाठन या श्रवण प्रारम्भ करोगे तो तुम्हारी तिगुनी आपत्तियाँ भी दूर हो जायेंगी । समय-समय पर श्री साईबाबा की कथा-वार्ता करते रहने से तुम्हें आध्यात्मिक जगत् के प्रति अज्ञात रुप से अभिरुचि हो जायेगी और यदि तुम इस प्रकार नियम तथा प्रेमपूर्वक अभ्यास करते रहे तो तुम्हारे समस्त पाप अवश्य नष्ट हो जायेंगें । यदि सचमुच ही तुम आवागमन से मुक्ति चाहते हो तो तुम्हें साई कथाओं का नित्य पठन-पाठन, स्मरण और उनके चरणों में प्रगाढ़ प्रीति रखनी चाहिये । साई कथारुपी समुद्र का मंथन कर ुसमें से प्राप्त रत्नों का दूसरों को वितरण करो, जिससे तुम्हें नित्य नूतन आनन्द का अनुभव होगा और श्रोतागण अधःपतन से बच जायेंगे । यदि भक्तगण अनन्य भाव से उनकी शरण आयें तो उनका ममत्व नष्ट होकर बाबा से अभिन्नता प्राप्त हो जायेगी, जैसे कि नदी समुद्र में मिल जाती है । यदि तुम तीन अवस्थाओं (अर्थात्- जागृति, स्वप्न और निद्रा) में से किसी एक में भी साई-चिन्तन में लीन हो जाओ तो तुम्हारा सांसारिक चक्र से छुटकारा हो जायेगा । स्नान कर प्रेम और श्रद्घयुक्त होकर जो इस ग्रन्थ का एक सप्ताह में पठन समाप्त करेंगे, उनके सारे कष्ट दूर हो जायेंगे या जो इसका नित्य पठन या श्रवण करेंगे, उन्हें सब भयों से तुरन्त छुटकारा मिल जायेगा । इसके अध्ययन से हर एक को अपनी श्रद्घा और भक्ति के अनुसार फल मिलेगा । परन्तु इन दोनों के अभाव में किसी भी फल की प्राप्ति होना संभव नहीं है । यदि तुम इस ग्रन्थ का आदरपूर्वक पठन करोगे तो श्री साई प्रसन्न होकर तुम्हें अज्ञान और दरिद्रता के पाश से मुक्त कर, ज्ञान, धन और समृद्घि प्रदान करेंगे । यदि एकाग्रचित होकर नित्य एक अध्याय ही पढ़ोगे तो तुम्हें अपरिमित सुख की प्राप्ति होगी । इस ग्रन्थ को अपने घर पर गुरु-पूर्णिमा, गोकुल अष्टमी, रामनवमी, विजयादशमी और दीपावली के दिन अवश्य पढ़ना चाहिये । यदि ध्यानपूर्वक तुम केवल इसी ग्रन्थ का अध्ययन करते रहोगे तो तुम्हें सुख और सन्तोष प्राप्त होगा और सदैव श्री साई चरणारविंदो का स्मरण बना रहेगा और इस प्रकार तुम भवसागर से सहज ही पार हो जाओगे । इसके अध्ययन से रोगियों को स्वास्थ्य, निर्धनों को धन, दुःखित और पीड़ितों को सम्पन्नता मिलेगी तथा मन के समस्त विकार दूर होकर मानसिक शान्ति प्राप्त होगी ।
मेरे प्रिय भक्त और श्रोतागण । आपको प्रणाम करते हुए मेरा आपसे एक विशेष निवेदन है कि जिनकी कथा आपने इतने दिनों और महीनों से सुनी है, उनके कलिमलहारी और मनोहर चरणों को कभी विस्मृत न होने दें । जिस उत्साह, श्रद्गा और लगन के साथ आप इन कथाओं का पठन या श्रवण करेंगे, श्री साईबाबा वैसे ही सेवा करने की बुद्घि हमें प्रदान करेंगे । लेखक और पाठक इस कार्य में परस्पर सहयोग देकर सुखी होवें ।

प्रसाद - याचना

अन्त में हम इ
स पुस्तक को समाप्त करते हुए सर्वशक्तिमान परमात्मा से निम्नलिखित कृपा या प्रसादयाचना करते है –

हे ईश्वर । पाठकों और भक्तों को श्री साई-चरणों में पूर्ण और अनन्य भक्ति दो । श्री साई का मनोहर स्वरुप ही उनकी आँखों में सदा बसा रहे और वे समस्त प्राणियों में देवाधिदेव साई भगवान् का ही दर्शन करें । एवमस्तु ।


।। श्री सद्रगुरु साईनाथार्पणमस्तु । शुभं भवतु ।।
।। ऊँ श्री साई यशःकाय शिरडीवासिने नमः ।।

आप सभी को शिर्डी के साँई बाबा ग्रुप की ओर से हार्दिक धन्यवाद, हम प्रत्येक साईं-वार के दिन आप के समक्ष बाबा जी की जीवनी पर आधारित श्री साईं सच्चित्र का एक अध्याय प्रस्तुत करने के लिए श्री साईं जी के श्री चरणों में अनुग्रह करते है की वह हमें इसे पुन: आरम्भ (दिनांक 14 मई 2020 से) करने हेतु आज्ञा प्रदान करें एवं हम अपने सभी पाठको से इस बात की भी क्षमा चाहते है की यदि अनजाने में हम से कोई भूल हो गयी हो तो बाबा श्री साईं जी हमें क्षमा प्रदान करने की कृपा करें, हम आपका इस सहयोग के लिए हृदय से आभार व्यक्त करते है एवं आपको आश्वासन देते है की अगले साईं-वार से श्री साईं सचरित्र का पुन: प्रसारण किया जायेगा, हमें आशा है की हमारा यह कदम घर घर तक श्री साईं सच्चित्र का सन्देश पंहुचा कर सभी को सुख और शान्ति का अनुभव करवाएगा, किसी भी प्रकार की त्रुटी के लिए हम सर्वप्रथम श्री साईं चरणों में क्षमा याचना करते है... एवं सभी पाठको का एक बार फिर से आभार व्यक्त करते है ...!!

ॐ सांई राम जी  

Wednesday, 6 May 2020

दया करो मेरी रक्षा करो, साईं तुम दया निधान

ॐ सांई राम


दया करो मेरी रक्षा करो
साईं तुम दया निधान
साईं तेरे चरणों में मेरा कोटि कोटि प्रणाम
जय हो जय हो साईं राम। दया करो....


साईं जैसा दयानिधि कोई न देखा होगा
भक्तों को तो तारा है पापी भी तर गया होगा
जपता रहूँ मैं साईं नाम सुबह हो या शाम
साईं तेरे ...

अगर साईं को पाना है तो मैं को मिटाना होगा
सूरज के आने से पहले रात को जाना होगा
साईं मेरा सच्चा खुदा, खुदी का नहीं है काम
साईं तेरे ...

नेकी मुझको देना साईं बड़ी न आने पाये
इक बार मेरा साईं आ जाये फिर न जाने पाये
चरणों में साईं विनती है दे दो मुझको ज्ञान
साईं तेरे ...

साईं ब्रह्मा शंकर शक्ति, शिव नारायण आप
सिमरन करून साईं का मिट जायें मेरे पाप
करुणासिन्धु नाम है तेरा साईं नाथ सुजान
साईं तेरे ...
ॐ साईं ॐ 


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Tuesday, 5 May 2020

साईं आयेंगे साईं मेरे आयेंगे

ॐ सांई राम


साईं आयेंगे साईं मेरे आयेंगे
साईं आना ज़रूर, मेरी अखियों के नूर
मैं हूँ बड़ा मजबूर
नहीं आये तो कहाँ हम जायेंगे। साईं आयेंगे ....

मैं जो दुनिया में आया
तेरी मर्ज़ी से आया
तूने कैसा खेल रचाया
मुझको माया ने भरमाया
साईं चाहेंगे तो बंधन टूट जायेंगे |   साईं आयेंगे ....

मैंने किया है कसूर मैं था बड़ा मगरूर
मुझे सजा भी मंज़ूर, न कर चरणों से दूर
साईं चाहेंगे तो दर पे बुलायेंगे   साईं आयेंगे ....

साईं है बगिया का माली
करता बगिया की रखवाली
जो भी आया दर पे सवाली,
उसकी भर दी झोली खाली
साईं चाहेंगे तो फूल खिल जायेंगे |   साईं आयेंगे ....

साईं मुझ पर दया दिखलाओ,
मेरे सोये भाग जगाओ
बरखा रहमत की बरसाओ,
मुझको चरणों में ले आओ
हम बुलायेंगे तो साईं रुक न पायेंगे |   साईं आयेंगे ....
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Monday, 4 May 2020

नीम के पत्ते मीठे हो गये, साईं की शरण पाके,

ॐ सांई राम



नीम  के  पत्ते  मीठे  हो  गये, साईं  की  शरण  पाके,
मैंने  भी  सब  कुछ  पाया  साईं, तेरे  चरणों  में  आके,


जिसने  सच्चे  मन  से, साईं  को  हाल  सुनाया  अपना,
बाबा  ने  आशीष  दिया, और  सच्चा  कर  दिया  सपना,
साईं  सौगात  बाँट   रहे  हैं, चरणों  में  बिठाके,

नीम  के  पत्ते  मीठे  हो  गये, साईं  की  शरण  पाके,

वर्षों  पहले  साईं  ने, मस्जिद  में  धुनी  जलाई,
इसकी  उदी  भक्तों  ने, मस्तक  पे  लगाई,
विभूति  ने  शक्ति  दिखलाई, दुखड़ा  सब  का  मिटाके,

नीम  के  पत्ते  मीठे  हो  गये, साईं  की  शरण  पाके,

पानी  से  दीप  जला के, जगमग  कर  दी  रात,
साईं  समाधि  आज  भी,  भक्तो  से  करती  है  बात,
जीवन  में  हो  गया, उजाला  दर  पे  दीप  जलाके,

नीम  के  पत्ते  मीठे  हो  गये, साईं  की  शरण  पाके,

जबसे  किये  दर्शन  साईं  के, जागा  भाग्य  मेरा,
जीवन  भर  मैं  याद  करुँगी, साईं  उपहार  ये  तेरा,
जीना  कभी  न  चाहूँगी,  साईं  को  भुलाके,

नीम  के  पत्ते  मीठे  हो  गये, साईं  की  शरण  पाके,
मैंने  भी  सब  कुछ  पाया  साईं, तेरे  चरणों  में  आके


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Sunday, 3 May 2020

दर पे जब बुला लिया साईंनाथ ने, सारा गम भुला दिया साईंनाथ ने

ॐ सांई राम


दर पे जब बुला लिया साईंनाथ ने,
सारा गम भुला दिया साईंनाथ ने
साईंनाथ..... साईंनाथ


आ गया चरण में जो भी मजबूर
उसका दुःख मिटा दिया साईंनाथ ने
साईंनाथ..... साईंनाथ

हिन्दू और मुसलमाँ थे जो दूर दूर
दोनों को मिला दिया साईंनाथ ने
साईंनाथ..... साईंनाथ

 थे जो बुरे लोगों ने सच्चाई का
रास्ता दिखा दिया साईंनाथ ने
साईंनाथ..... साईंनाथ

कितनों को सवारा अपने प्यार से
गिरतों को उठा लिया साईंनाथ ने
साईंनाथ..... साईंनाथ

दर पे जब बुला लिया साईंनाथ ने,
सारा गम भुला दिया साईंनाथ ने
साईंनाथ..... साईंनाथ


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For Donation

For donation of Fund/ Food/ Clothes (New/ Used), for needy people specially leprosy patients' society and for the marriage of orphan girls, as they are totally depended on us.

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A/c - Title -Shirdi Ke Sai Baba Group

A/c. No - 200003513754 / IFSC - INDB0000036

IndusInd Bank Ltd, N - 10 / 11, Sec - 18, Noida - 201301,

Gautam Budh Nagar, Uttar Pradesh. INDIA.