शिर्डी के साँई बाबा जी की समाधी और बूटी वाड़ा मंदिर में दर्शनों एंव आरतियों का समय....

"ॐ श्री साँई राम जी
समाधी मंदिर के रोज़ाना के कार्यक्रम

मंदिर के कपाट खुलने का समय प्रात: 4:00 बजे

कांकड़ आरती प्रात: 4:30 बजे

मंगल स्नान प्रात: 5:00 बजे
छोटी आरती प्रात: 5:40 बजे

दर्शन प्रारम्भ प्रात: 6:00 बजे
अभिषेक प्रात: 9:00 बजे
मध्यान आरती दोपहर: 12:00 बजे
धूप आरती साँयकाल: 7:00 बजे
शेज आरती रात्री काल: 10:30 बजे

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निर्देशित आरतियों के समय से आधा घंटा पह्ले से ले कर आधा घंटा बाद तक दर्शनों की कतारे रोक ली जाती है। यदि आप दर्शनों के लिये जा रहे है तो इन समयों को ध्यान में रखें।

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Saturday, 28 February 2015

घृणा, ईर्ष्या, लालच और डींग हांकने जैसे दुष्ट गुणों को ख़त्म किया जाना चाहिए।

ॐ सांई राम


घृणा, ईर्ष्या, लालच और डींग हांकने जैसे दुष्ट गुणों को ख़त्म किया जाना चाहिए। ये लक्षण न सिर्फ आम आदमी बल्कि संन्यासियों, भिक्षुओं और संस्थाओं के प्रमुख को भी भटका देते हैं। इन में, ईर्ष्या और लालच में अनियंत्रित वृद्धि हुई है। आज दुनिया को एक नया आदेश, एक नई शिक्षा प्रणाली, एक नए समाज या एक नया धर्म की जरूरत नहीं है। पवित्रता हर युवाओं और बच्चों के मन और ह्रदय में विकसित किया जाना चाहिए: यही इस समय की जरूरत है। अच्छे और धर्मी लोगो को इसे बढ़ावा देने की सबसे बड़ी साधना (आध्यात्मिक अभ्यास) करना चाहिए ताकि हर कोई इसे अपनाये।


Evil qualities such as hatred, envy, greed and ostentation should be uprooted. These traits are vitiating not only common people but even ascetics, monks and heads of institutions. Among these, envy and greed have gone unchecked. What the world needs today is not a new order, a new educational system, a new society or a new religion. Holiness must take root and grow in the minds and hearts of youth and children everywhere: this is the need of the hour. The good and godly must endeavour to promote this as the greatest Sadhana (spiritual practice) that everyone must undertake.

Friday, 27 February 2015

बहत्तर जन्मों से साईं सँग थे, ऐसा बाबा कहते थे

ॐ सांई राम


माधवराव देशपाँडे जी, शिरडी धाम में रहते थे
बहत्तर जन्मों से साईं सँग थे, ऐसा बाबा कहते थे

बच्चों को शिक्षा देते थे, गुरु धरे साईं राम
सुबह शाम बस साईं जपना, यही प्रिय था काम

बडे प्रेम से बाबा जी ने, उनको श्यामा नाम दिया
भक्ति पथ पर उन्हें बढाने, का बाबा ने काम किया

धर्म ग्रन्थ कभी उनको देकर, बाबा ने कृतार्थ किया
संकट और सुख में भी उनका, साईं नाथ ने साथ दिया

बाबाजी के भक्त प्रिय थे, थोडे से गुस्से वाले
लेकिन सब कर रखा था, साईं नाथ के हवाले

बाबा जी से तनिक भी दूरी, उन्हें नहीं भाती थी
बिछड ना जाँए देव सोच कर, जान चली जाती थी

जैसे शिव मँदिर के बाहर, नन्दी खडे रहते हैं
ऐसे बाबा सँग हैं श्यामा, भक्त यही कहते हैं

दुखियों के कष्टों को श्यामा, बाबा तक पहुँचाते थे
बदले में उन भक्त जनों की, ढेर दुआँऐं पाते थे

श्यामा जी के रोम रोम में, साईं यूँ थे व्याप्
उनकी निद्रा में चलता था, साईं नाम का जाप

धन्य जन्म था श्यामा जी का, बाबा का सँग पाया
गत जन्मों के शुभ कर्मों से, जीव देव सँग आया

युगों युगों तक दिखा ना सुना, था वो बँधन ऐसा
साईं ईश और श्यामा भक्त, के बीच बना था जैसा

Thursday, 26 February 2015

श्री साँई सच्चरित्र - अध्याय 20

ॐ सांई राम




आप सभी को शिर्डी के साईं बाबा ग्रुप की और से साईं-वार की हार्दिक शुभ कामनाएं
हम प्रत्येक साईं-वार के दिन आप के समक्ष बाबा जी की जीवनी पर आधारित श्री साईं सच्चित्र का एक अध्याय प्रस्तुत करने के लिए श्री साईं जी से अनुमति चाहते है|

हमें आशा है की हमारा यह कदम घर घर तक श्री साईं सच्चित्र का सन्देश पंहुचा कर हमें सुख और शान्ति का अनुभव करवाएगा, किसी भी प्रकार की त्रुटी के लिए हम सर्वप्रथम श्री साईं चरणों में क्षमा याचना करते है

श्री साई सच्चरित्र - अध्याय 20
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विलक्षण समाधान . श्री काकासाहेब की नौकरानी द्घारा श्री दासगणू की समस्या का समाधान ।
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श्री. काकासाहेब की नौकरानी द्घारा श्री. दासगणू की समस्या किस प्रकार हल हुई, इसका वर्णन हेमाडपंत ने इस अध्याय में किया है ।

Wednesday, 25 February 2015

भक्त जनों की आँख के तारे...

ॐ सांई राम


जहाँ जहाँ मैं जाता साई
गीत तुम्हारे गाता, गीत तुम्हारे गता
मेरे मन मन्दिर मैं साई, तुमने ज्योत जगाई
बिच भवर में उल्जी नैया, तुमने पार लगाई
इस दुनिया के दुखियारों से,तुमने जोड़ा नाता
मैं गीत तुम्हारे गाता
साई मेरे तुम ना होते, देता कौन सहारा
इस दुनिया की डगर डगर पर, फिरता मारा मारा
जिसको किस्मत ठुकरा देत, तू उसके भाग जगाता,
मैं गीत तुम्हारे गाता
मस्जिद मन्दिर गुरुद्वारे मैं, साई तुम्ही समाये
गंगाजल और आबे जाम जाम, तुमने एक बनायें,
मेरी बिनती सुन लो बाबा, कबसे तुम्हे बुलाता,
मैं गीत तुम्हारे गाता


करो कबूल, करो कबूल

करो कबूल हमारा प्रणाम साई जी
तुम्हारी एक नज़र हो तो बात बन जाए
अँधेरे मैं भी किरण, रौशनी की लेहेराए
के तुमने सबके बनाए हैं काम साइजी
तुम्हारे दर पे ..................
तुमसे करता हूँ मोहबात कहा जाऊँ मैं
इस ज़माने मैं कोई तुमसा कहा पाऊ मैं
जब से देखा है के तुम दिल मैं बसे साइजी
तुम्हारे दर पे ..................
किसी गरीब को, खाली ना तुम ने लौटाया
वोह झोली भर के गया, खाली हाथ जो आया
इसीलिए तो है तुम्हारा है नाम साइजी
तुम्हारे दर पे ..................
तुम्ही तो हो जो गरीबों का हाल सुनते हो
तमाम दर्द के मारो का दर्द, सुनते हो
जभी तो आता हैं हर ख़ास आम साइजी
तुम्हारे दर पे .................. 



कहाँ कहाँ से लोग आते हैं बाबा के दरबार  में

साई के दरबार में
दिल के दुखडे मिट जाते हैं, साई के दरबार में
बाबा के दरबार में
कहाँ कहाँ से (२)

अपना अपना रंग हो चाहे, लाखो है तस्वीरे (२)
साई के हाथों पर लिखी है, हम सब की तकदीरें
बड़ा हो छोटा (२)
बड़ा हो छोटा, जूक जाते हैं, साई के दरबार में
बाबा के दरबार में
कहाँ कहाँ से (२)
सबके मन की बातें जाने, सबको यह पहचाने
सदियों तक गूंजेंगे इसके, गली गली अफ़साने (२)
आसूं मोंती (२)
आसूं मोंती बन जाते है साई के दरबार में,
बाबा के दरबार में
कहाँ कहाँ से (२)
यह वो दर है रोज यहाँ पर मेले
भक्त यहाँ पर आ जाते हैं,
मस्ताने अलबेले (२)
अपनी धुन मैं ये गाते हैं, साई के दरबार मैं बाबा के दरबार में
कहाँ कहाँ से (२)


तू मारे या तारे (२)

साईं बाबा ! हम हैं दास तुम्हारे (२)
जब से अपनी आँख खुली हैं
दिन उजला हैं, और सब उजाला हैं
जागे भाग्य हमारे (२)
साईं बाबा..............
सदियों से हैं परदे दिल पर
आ पहुंचे अपनी मंजिल पर
आखिर तेरे सहारे (२)
साईं बाबा..............
हम तडपत हैं तेरे दर्शन को
मांगत है तुजसे तेरे मन को
कबसे हाथ पसारे (२)
साईं बाबा..............
खोज मैं तेरी नीर बहाए
जाने और कहाँ ले जाये
इन अँखियाँ के धारे (२)
साईं बाबा..............
हम क्या हैं सब जान लिया हैं
कहना तेरा मान लिया हैं
तुम जीते हम हारे (२)
साईं बाबा..............
हर संकट हर पीड़ा को देखो
भक्त जानो की पीड को देखो
कोई ना पत्थर मारे (२)
साईं बाबा..............


साईं नाम के मोती लूट ले
करले आज कमाई,
के बोलो हरि ॐ साईं
के बोलो हरि ॐ साईं....
नाम सहारे सब ने बिगड़ी बनाई
के बोलो हरि ॐ साईं
के बोलो हरि ॐ साईं..
राम रतन अनमोल है प्यारे
जीवन के परम सहारे.
बन के खिवैया साईं नाथ
ने नैया पार लगाई
के बोलो हरी ॐ साईं........
शिर्डी मै बैठे है साईं हमारे
भक्त जनों की आँख के तारे...
सब का मालिक एक है
बन्दे बात सब को बताई
की बोलो हरि ॐ साईं...
पानी के दीपक बाबा जलाये
नीम को छुकर मीठा बनाये
साईं बाबा श्याम सलोने
साईं बाबा रगुराई...
के बोलो हरि ॐ साईं..



Tuesday, 24 February 2015

Monday, 23 February 2015

खाना खाना एक पवित्र अनुष्ठान की तरह है

ॐ सांई राम

खाना खाना एक पवित्र अनुष्ठान की तरह है, एक यझ है. इसे चिंता या भावनात्मक क्षणों के दौरान नहीं किया जाना चाहिए। भोजन को भूख के बीमारी के लिए दवा के रूप में लिया जाना चाहिए और यह जीवन के लिए जीविका के रूप में है। तुम्हे आने वाले परिशानियो को देखकर अपने लिए भाग्यशाली मौका समझना चाहिए ताकि आप इस अवसर का उपयोग अपने आपको मन और आत्मिक शक्ति का विकास कर सकेंगे।



Eating food is a holy ritual, a Yajna. It should not be performed during moments of anxiety or emotional upheavals. Food should be considered as medicine for the illness of hunger and as the sustenance for life. Treat each trouble you encounter as a fortunate opportunity to develop your strength of mind and toughen you spiritually.

Sunday, 22 February 2015

हर पल में साईं राम

ॐ सांई राम



साईं सुबह - साईं शाम,
हर पल में साईं राम,
जैसे काशी - जैसे मथुरा, 
वैसे साईं का शिर्डी धाम, 
सुबह शाम जो ले साईं नाम, 
ऐसे भक्त को "ॐ सांई राम"

For Donation

For donation of Fund/ Food/ Clothes (New/ Used), for needy people specially leprosy patients' society and for the marriage of orphan girls, as they are totally depended on us.

For Donations, Our bank Details are as follows :

A/c - Title -Shirdi Ke Sai Baba Group

A/c. No - 200003513754 / IFSC - INDB0000036

IndusInd Bank Ltd, N - 10 / 11, Sec - 18, Noida - 201301,

Gautam Budh Nagar, Uttar Pradesh. INDIA.