शिर्डी के साँई बाबा जी की समाधी और बूटी वाड़ा मंदिर में दर्शनों एंव आरतियों का समय....

"ॐ श्री साँई राम जी
समाधी मंदिर के रोज़ाना के कार्यक्रम

मंदिर के कपाट खुलने का समय प्रात: 4:00 बजे

कांकड़ आरती प्रात: 4:30 बजे

मंगल स्नान प्रात: 5:00 बजे
छोटी आरती प्रात: 5:40 बजे

दर्शन प्रारम्भ प्रात: 6:00 बजे
अभिषेक प्रात: 9:00 बजे
मध्यान आरती दोपहर: 12:00 बजे
धूप आरती साँयकाल: 7:00 बजे
शेज आरती रात्री काल: 10:30 बजे

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निर्देशित आरतियों के समय से आधा घंटा पह्ले से ले कर आधा घंटा बाद तक दर्शनों की कतारे रोक ली जाती है। यदि आप दर्शनों के लिये जा रहे है तो इन समयों को ध्यान में रखें।

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Saturday, 21 February 2015

योग और प्याज

ॐ सांई राम


योग और प्याज

एक समय एक योगाभ्यासी नाना साहेब चांदोरकर के साथ शिर्डी आया. उसने पतंजलि योगसूत्र तथा योगशास्त्र के अन्य ग्रंथों का विशेष अध्यन किया था, परन्तु वह व्यावहारिक अनुभव से वंचित था. मन एकाग्र ना हो सकने के कारण वह थोड़े समय के लिए भी समाधी नहीं लगा सकता था. यदि सैबबा कि कृपा प्राप्त हो जाये तो उनसे थोड़ी अधिक समय तक समाधी अवस्था प्राप्त करने कि विधि ज्ञात हो जाएगी, इस विचार से वह शिर्डी आया और जब मस्जिद में पहुंचा तो साईं बाबा को प्याज सहित सूखी रोटी खाते देख कर उसे विचार आया कि यह कच्ची प्याजसहित सूखी रोटी खाने वाला व्यक्ति मेरी कठिनाई को किस प्रकार हल कर पायेगा? साईं बाबा अंतर्ज्ञान से उसका विचार जानकार तुरंत नानासाहेब से बोले कि " ओ नाना ! जिसमे प्याज हजम करने कि शक्ति है , उसको ही उसे खाना चाहिए, अन्य को नहीं." इन शब्दों से अत्यंत विस्मित होकर योगी ने साईं चरणों में पूर्ण आत्मसमर्पण कर दिया. शुद्ध और निष्कपट भाव से अपनी कठिनाइयाँ बाबा के समक्ष प्रस्तुत करके उनसे उनका हल प्राप्त किया, और इस प्रकार संतुष्ट और सुखी होकर बाबा के दर्शन और उदी लेकर वह शिर्डी से चला गया................. ॐ साईं राम



श्री सांई सच्चरित्र क्या कहती है ??

यूँ ही एक दिन चलते-चलते

सांई से हो गई मुलाकात।

जब अचानक सांई सच्चरित्र की

पाई एक सौगात।

फिर सांई के विभिन्न रूपों के मिलने लगे उपहार।

तब सांई ने बुलाया मुझको शिरडी भेज के तार।

सांई सच्चरित्र ने मुझ पर अपना ऐसा जादू डाला।

सांई नाम की दिन-रात मैं जपने लगा फिर माला।

घर में गूँजने लगी हर वक्त सांई गान की धुन।

मन के तार झूमने लगे सांई धुन को सुन।

धीरे-धीरे सांई भक्ति का रंग गाढ़ा होने लगा।

और सांई कथाओं की खुश्बूं में मन मेरा खोने लगा।

सांई नाम के लिखे शब्दों पर मैं होने लगा फिदा।

अब मेरे सांई को मुझसे कोई कर पाए गा ना जुदा।

हर घङी मिलता रहे मुझे सांई का संतसंग।

सांई मेरी ये साधना कभी ना होवे भंग।

सांई चरणों में झुका रहे मेरा यह शीश।

सांई मेरे प्राण हैं और सांई ही मेरे ईश।

भेदभाव से दूर रहूँ,शुद्ध हो मेरे विचार।

सांई ज्ञान की जीवन में बहती रहे ब्यार॥

Friday, 20 February 2015

Be A God

ॐ सांई राम


Once, a dog came to Lord Rama bleeding from blows. Lakshmana (Rama’s brother) was sent to enquire why it had to receive such blows.

The dog said: "I was beaten by a Brahmin (the priestly class in a Hindu society) with a stick."

The Brahmin was questioned. He said that the dog was always annoying him by coming across his path. Rama asked the dog: "Well,

how do you want to punish the Brahmin?"

The dog said: "Make him a manager of a temple."

Rama replied with wonder: "That would be a reward, not a punishment.

The dog said: "No, I was a manager of a temple in my previous birth. It was impossible not to mishandle or misuse or misappropriate some

fraction of God's money. When he is that manager, he too will get, like me, this canine birth and perhaps get beaten too in his subsequent birth."

In fact, not only the dog or the Brahmin, but every one of us are lining off the property of God, for does not all this belong to Him? What do we

do in return for all benefits we derive from the property of the Lord? We should not simply eat and sit quiet. We have to render service to the

poor and the helpless in a manner suitable to us.

~ Baba

Thursday, 19 February 2015

श्री साई सच्चरित्र - अध्याय 18/19


ॐ सांई राम



आप सभी को शिर्डी के साँई बाबा ग्रुप की और से साईं-वार की हार्दिक शुभ कामनाएं, हम प्रत्येक साईं-वार के दिन आप के समक्ष बाबा जी की जीवनी पर आधारित श्री साईं सच्चित्र का एक अध्याय प्रस्तुत करने के लिए श्री साईं जी से अनुमति चाहते है |

हमें आशा है की हमारा यह कदम घर घर तक श्री साईं सच्चित्र का सन्देश पंहुचा कर हमें सुख और शान्ति का अनुभव करवाएगा, किसी भी प्रकार की त्रुटी के लिए हम सर्वप्रथम श्री साईं चरणों में क्षमा याचना करते है|


श्री साई सच्चरित्र - अध्याय 18/19 -
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श्री हेमाडपंत पर बाबा की कृपा कैसे हुई । श्री साठे और श्रीमती देशमुख की कथा, आनन्द प्राप्ति के लिये उत्तम विचारों को प्रोत्साहन, उपदेश में नवीमता, निंदा सम्बंधी उपदेश और परिश्रम के लिए मजदूरी ।
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Wednesday, 18 February 2015

धर्म स्थापन के लिए

ॐ सांई राम





जब लोग धर्म कर्म मे अरुचि के कारण मानव जीवन के उच्चतम लक्ष्य को प्राप्त करने मे असफल हो जाते है, तब धर्म स्थापन के लिए संत मानव जन्म धारण करते है |


"They lose the highest good because of the decline of dharma. In order to bring about a revival of dharma, the saints appear."

(CI 11, Adhaya 4 Sai Sachitra Dr R.N.Kakria )

Tuesday, 17 February 2015

तेरी महिमा कैसे कहूँ साईं


ॐ साँईं राम जी




मेरी लाख चोरासी काट के
मेरा जन्म दिया है संवार
तू छोड़ सुखासन आ गया
मैंने जब भी करी पुकार

तेरी महिमा कैसे कहूँ साईं
तू है सच्चा सिरजनहार
चरणों में अपने रख मुझे
        मेरी  कर दे नैया  पार

लाखों रंगों के इस जग में
कहीं देखा न सच्चा प्यार
तुने रूप फकीरी का धरा
साईं जग के पालन हार


मैं मुरख नाम धराये के
साईं सयों करी पुकार
मोहे साचा एको दीखता
है झूठा सब संसार


मेरी लाख चोरासी काट दो
साईं किरपा करो अपार
मोहे बांह पकड़ कर खींच लो
करो नैया भव से पार

Monday, 16 February 2015

साईं मेरे घर आना


ॐ साँई राम जी




थोड़ी फुरसत गर मिले तो साईं मेरे घर आना
रूबरू होंगी मेरी बातें साईं सुनकर जाना

तेरी आने की लगायी है उम्मीदें  कब से
मेरे हालात पे हँसता है ये सारा ज़माना
थोड़ी फुरसत गर मिले तो साईं मेरे घर आना
रूबरू होंगी मेरी बातें साईं सुनकर जाना


तेरे साये में ही रहने को ये दिल कहता है
अपने चरणों में बिठा लो अब मुकर ना जाना
थोड़ी फुरसत गर मिले तो साईं मेरे घर आना
रूबरू होंगी मेरी बातें साईं सुनकर जाना

क्या गुनाह कर दिया ऐसा की साईं तू आया ना
'शम्मा' के होठों पे है आखिरी ग़म दक फ़साना
थोड़ी फुरसत गर मिले तो साईं मेरे घर आना
रूबरू होंगी मेरी बातें साईं सुनकर जाना

Sunday, 15 February 2015

ॐ सांई राम - प्यार बांटते साई

ॐ सांई राम - प्यार बांटते साई





प्यार बांटते साई



प्राणिमात्र की पीड़ा हरने वाले साई हरदम कहते, 'मैं मानवता की सेवा के लिए ही पैदा हुआ हूं। मेरा उद्देश्य शिरडी को ऐसा स्थल बनाना है, जहां न कोई गरीब होगा, न अमीर, न धनी और न ही निर्धन..।' कोई खाई, कैसी भी दीवार..बाबा की कृपा पाने में बाधा नहीं बनती। बाबा कहते, 'मैं शिरडी में रहता हूं, लेकिन हर श्रद्धालु के दिल में मुझे ढूंढ सकते हो। एक के और सबके। जो श्रद्धा रखता है, वह मुझे अपने पास पाता है।'




साई ने कोई भारी-भरकम बात नहीं कही। वे भी वही बोले, जो हर संत ने कहा है, 'सबको प्यार करो, क्योंकि मैं सब में हूं। अगर तुम पशुओं और सभी मनुष्यों को प्रेम करोगे, तो मुझे पाने में कभी असफल नहीं होगे।' यहां 'मैं' का मतलब साई की स्थूल उपस्थिति से नहीं है। साई तो प्रभु के ही अवतार थे और गुरु भी, जो अंधकार से मुक्ति प्रदान करता है। ईश के प्रति भक्ति और साई गुरु के चरणों में श्रद्धा..यहीं से तो बनता है, इष्ट से सामीप्य का संयोग।



दैन्यता का नाश करने वाले साई ने स्पष्ट कहा था, 'एक बार शिरडी की धरती छू लो, हर कष्ट छूट जाएगा।' बाबा के चमत्कारों की चर्चा बहुत होती है, लेकिन स्वयं साई नश्वर संसार और देह को महत्व नहीं देते थे। भक्तों को उन्होंने सांत्वना दी थी, 'पार्थिव देह न होगी, तब भी तुम मुझे अपने पास पाओगे।'



अहंकार से मुक्ति और संपूर्ण समर्पण के बिना साई नहीं मिलते। कृपापुंज बाबा कहते हैं, 'पहले मेरे पास आओ, खुद को समर्पित करो, फिर देखो..।' वैसे भी, जब तक 'मैं' का व्यर्थ भाव नष्ट नहीं होता, प्रभु की कृपा कहां प्राप्त होती है। साई ने भी चेतावनी दी थी, 'एक बार मेरी ओर देखो, निश्चित-मैं तुम्हारी तरफ देखूंगा।'




1854 में बाबा शिरडी आए और 1918 में देह त्याग दी। चंद दशक में वे सांस्कृतिक-धार्मिक मूल्यों को नई पहचान दे गए। मुस्लिम शासकों के पतन और बर्तानिया हुकूमत की शुरुआत का यह समय सभ्यता के विचलन की वजह बन सकता था, लेकिन साई सांस्कृतिक दूत बनकर सामने आए। जन-जन की पीड़ा हरी और उन्हें जगाया, प्रेरित किया युद्ध के लिए। युद्ध किसी शासन से नहीं, कुरीतियों से, अंधकार से और हर तरह की गुलामी से भी! यह सब कुछ मानवमात्र में असीमित साहस का संचार करने के उपक्रम की तरह था। हिंदू, पारसी, मुस्लिम, ईसाई और सिख..हर धर्म और पंथ के लोगों ने साई को आदर्श बनाया और बेशक-उनकी राह पर चले।

For Donation

For donation of Fund/ Food/ Clothes (New/ Used), for needy people specially leprosy patients' society and for the marriage of orphan girls, as they are totally depended on us.

For Donations, Our bank Details are as follows :

A/c - Title -Shirdi Ke Sai Baba Group

A/c. No - 200003513754 / IFSC - INDB0000036

IndusInd Bank Ltd, N - 10 / 11, Sec - 18, Noida - 201301,

Gautam Budh Nagar, Uttar Pradesh. INDIA.