शिर्डी के साँई बाबा जी की समाधी और बूटी वाड़ा मंदिर में दर्शनों एंव आरतियों का समय....

"ॐ श्री साँई राम जी
समाधी मंदिर के रोज़ाना के कार्यक्रम

मंदिर के कपाट खुलने का समय प्रात: 4:00 बजे

कांकड़ आरती प्रात: 4:30 बजे

मंगल स्नान प्रात: 5:00 बजे
छोटी आरती प्रात: 5:40 बजे

दर्शन प्रारम्भ प्रात: 6:00 बजे
अभिषेक प्रात: 9:00 बजे
मध्यान आरती दोपहर: 12:00 बजे
धूप आरती साँयकाल: 7:00 बजे
शेज आरती रात्री काल: 10:30 बजे

************************************

निर्देशित आरतियों के समय से आधा घंटा पह्ले से ले कर आधा घंटा बाद तक दर्शनों की कतारे रोक ली जाती है। यदि आप दर्शनों के लिये जा रहे है तो इन समयों को ध्यान में रखें।

************************************

Saturday, 1 June 2013

श्री गुरु नानक देव जी – साखियाँ - मीठा रीठा

श्री गुरु नानक देव जी – साखियाँ



मीठा रीठा



 जब गुरु जी (श्री गुरू नानक देव जी) पूरब दिशा कि तरफ बनारस जा रहे थे तो रास्ते में मरदाने ने कहा महाराज! आप मुझे जंगल पहाडों में ही घुमाए जा रहे हो, मुझे बहुत भूख लगी है| अगर कुछ खाने को मिल जाये तो कुछ खाकर चलने के लायक हो जाऊंगा| उस समय गुरु जी रीठे के वृक्ष के नीचे आराम कर रहे थे| आप ने वृक्ष के ऊपर देखा और मरदाने से कहने लगे, अगर तुम्हे भूख लगी है तो रीठे कि टहनी को हिलाकर रीठे गेरकर खा लो|

मरदाने ने गुरु जी (श्री गुरू नानक देव जी) के हुक्म का पालन किया| उसने टहनी को हिलाया व रीठो को नीचे गिरा दिया| जब मरदाने ने रीठे खाए तो वो छुहारे कि तरह मीठे थे| उसने पेट भरकर रीठे खाए| इस वृक्ष के रीठे आज भी मीठे है जो नानक मते जाने वाले प्रेमियों को प्रसाद के रूप में दिए जाते है|

मीठा रीठा नानक मते से ४५ मील दूर है|



Friday, 31 May 2013

श्री गुरु नानक देव जी – साखियाँ - मक्के का काबा फेरना

श्री गुरु नानक देव जी – साखियाँ








मक्के का काबा फेरना

मक्के में मुसलमानों का एक प्रसिद्ध पूजा स्थान है जिसे काबा कहते है| गुरु जी (श्री गुरू नानक देव जी) रात के समय काबे की तरफ विराज गए तब जिओन ने गुस्से में आकर गुरु जी से कहा कि तू कौन काफ़िर है जो खुदा के घर की तरफ पैर पसारकर सोया हुआ है? गुरु जी ने बड़ी नम्रता के साथ कहा, मैं यहाँ सरे दिन के सफर से थककर लेटा हूँ, मुझे नहीं मालूम की खुदा का घर किधर है तू हमारे पैर पकड़कर उधर करदे जिधर खुदा का घर नहीं है| यह बात सुनकर जिओन ने बड़े गुस्से में आकर गुरु जी के चरणों को घसीटकर दूसरी ओर कर दिया और जब चरणों को छोड़कर देखा तो उसे काबा भी उसी तरफ ही नजर आने लगा| इस प्रकार उसने जब फिर चरण दूसरी तरफ किए तो काबा उसी और ही घुमते हुआ नज़र आया|

जिओन ने जब यहे देखा कि काबा इनके चरणों के साथ ही घूम जाता है तो उसने यह बात हाजी और मुलानो को बताई जिससे बहुत सारे लोग वहाँ एकत्रित हो गए| गुरु जी (श्री गुरू नानक देव जी) के इस कौतक को देखकर सभी दंग रहगए और गुरु जी (श्री गुरू नानक देव जी) के चरणों पर गिर पड़े| उन्होंने गुरु जी से माफ़ी भी माँगी| जब गुरु जी ने वहाँसे चलने की तैयारी की तो काबे के पीरों ने विनती करके गुरु जी की एक खड़ाव निशानी के रूप में अपने पास रख ली|


भाई गुरदास जी लिखते हैं:
धरी निशानी कौस दी मक्के अंदर पूज कराई || 
जिथे जाए जगत विच बाबे बाझ न खाली जाई || 

Thursday, 30 May 2013

श्री साई सच्चरित्र - अध्याय 25


ॐ सांई राम

आप सभी को शिर्डी के साईं बाबा ग्रुप की और से साईं-वार की हार्दिक शुभ कामनाएं, हम प्रत्येक साईं-वार के दिन आप के समक्ष बाबा जी की जीवनी पर आधारित श्री साईं सच्चित्र का एक अध्याय प्रस्तुत करने के लिए श्री साईं जी से अनुमति चाहते है|
हमें आशा है की हमारा यह कदम घर घर तक श्री साईं सच्चित्र का सन्देश पंहुचा कर हमें सुख और शान्ति का अनुभव करवाएगा, किसी भी प्रकार की त्रुटी के लिए हम सर्वप्रथम श्री साईं चरणों में क्षमा याचना करते है|

श्री साई सच्चरित्र - अध्याय 25
.....................

Wednesday, 29 May 2013

श्री गुरु नानक देव जी – साखियाँ - हसन अब्दाल - वली कंधारी का अहंकार तोड़ना (पंजा साहिब)


श्री गुरु नानक देव जी – साखियाँ




हसन अब्दाल - वली कंधारी का अहंकार तोड़ना (पंजा साहिब)

गुरु जी होती मरदान और नौशहरे से होते हुआ हसन अब्दाल से बहार पहाड़ी के नीचे आकर बैठ गए| उस पहाड़ी पर एक वली कंधारी रहता था जिसे अपनी करामातो पर बहुत अहंकार था| इसके साथ की पहाड़ी पर ही पानी का एक चश्मा निकलता था| गुरु जी ने उसका अहंकार तोड़ने के लिए मरदाने को उस पहाड़ी पर चश्मे का पानी लाने के लिए भेजा| पर वली कंधारी ने वहाँ से पानी लाने को मना कर दिया| उसने कंधारी के आगे बहुत मिन्नतें की पर वली ने कहा अगर तेरा पीर शक्तिशाली है तो वह नया चश्मा निकालकर तुम्हे पानी दे|जब यह बातें मरदाने ने आकर गुरु जी को बताई तो गुरु जी (श्री गुरु नानक देव जी) ने मरदाने से कहा की सतिनाम कहकर एक पत्थर उठाकर दूसरी तरफ रखदो, करतार के हुक्म से पानी का चश्मा चल पड़ेगा| जब पत्थर के नीचे से पानी का चश्मा निकला तो इसके चलने से ही पहाड़ी पर वली कंधारी का चश्मा बंद हो गया|

जब वली कंधारी ने यह देखा की उसका चश्मा बंद हो गया है और नीचे की पहाड़ी का चश्मा चल रहा है तो उसने क्रोध में आकर अपनी पूरी शक्ति के साथ पहाड़ी की एक चट्टान को गुरु जी की तरफ फैंक दिया| पर गुरु जी ने उसे अपने हाथ के पंजे से रोक दिया| गुरु जी की यह दोनो शक्तियाँ, पहले पानी का चश्मा नीचे लेके आना और दूसरा पहाड़ को पंजे से रोकना, से वली कंधारी का अहंकार टूट गया और गुरु जी से अपने अपमान भरे शब्दों के कारण माफ़ी मांगने लगा|

गुरु जी (श्री गुरु नानक देव जी) के हाथ से लगा हुआ पंजे वाला पत्थर अभी तक गुरुद्वारा पंजा साहिब-हसन अब्दाल में दर्शन दे रहा है| हजारों संगते श्रदा के साथ इसके दर्शन करके गुरु जी (श्री गुरु नानक देव जी) की महिमा गाते हुए सुनी व देखी गयी हैं|


पंजा साहिब की यह घटना 3 वैसाख संवत १५७९ में लिखी हुई हैं|


Tuesday, 28 May 2013

श्री गुरु नानक देव जी – साखियाँ - कलयुग से वार्तालाप


श्री गुरु नानक देव जी – साखियाँ
 
 
कलयुग से वार्तालाप
गुरु जी मरदाने के साथ बैठकर शब्द कीर्तन कर रहे थे तो अचानक अँधेरी आनी शुरू हो गई, जिसका गुबार पुरे आकाश में फ़ैल गया| इस भयानक अँधेरी में भयानक सूरत नजर आनी शुरू हो गई, जिसका सिर आकाश के साथ व पैर पाताल के साथ के साथ थे| मरदाना यह सब देखकर घबरा गया| तब गुरु जी मरदाने से कहने लगे, मरदाना तू वाहेगुरु का सिमरन कर, डर मत| यह बला तेरे नजदीक नहीं आएगी| उस भयानक सूरत ने कई भयानक रूप धारण किए पर गुरु जी अडोल ही बैठे रहे| आप की अडोलता व निर्भयता को देखकर उसने मानव का रूप धारण करके गुरु जी को नमस्कार की और कहने लगा इस युग का मैं राजा हूँ| मेरा सेनापती झूठ और निंदा, चुगली व मर धाड़ है| जुआ शराब आदि खोटे करम मेरी फ़ौज है| आप मेरे युग के अवतार है, मैं आपको मोतियों से जड़े हुए सोने के मंदिर तैयार कर देता हूँ, आप इसमे निवास करना| ऐसे मंदिर चन्दन व कस्तूरी से लिपे होंगे, केसर का छिड़काव होगा| आप उसमे सुख लेना व आनंदित रहना|




तब गुरु जी ने इस शब्द का उच्चारण किया:
मोती त मंदर उसरहि रतनी त होए जड़ाऊ ||
कस्तू रि कुंगू अगरि चंदनि लीपि आवै चाऊ ||
मतु देखि भूला विसरै तेरा चिति न आवै नाऊ ||
धरती त हीरे लाल जड़ती पलघि लाल जड़ाऊ ||
मोहणी मुखि मणी सोहै करे रंगि पसाऊ ||
मतु देखि भूला विसरै तेरा चिति न आवै नाऊ ||
हुकमु हासलु करी बैठा नानका सभ वाऊ ||
मतु देखि भूला विसरै तेरा चिति न आवै नाऊ ||

 
गुरु जी के ऐसे बचन सुनकर कलयुग ने कहा, महाराज! मुझे निरंकार की आज्ञा है की मैं सभ जीवो की बुधि उलट दू, जिसके कारण वह चोरी यारी झूठ निंदा व चुगली आदि खोटे कर्म करे, गुणवान का निरादर हो और मूर्खों को राजे के पास बिठाकर आदर करा ऊ| जत सत का नाम ना रहना दूँ, ऊँच व नीच को बराबर कर दूँ| पर आप मुझे जैसे हुक्म करेंगे में उसकी पलना करूँगा| गुरु जी ने कहा, जो हमारे प्रेमी श्रद्धावान व हरी कीर्तन, सत्संग इत्यादि में लिप्त हो उनपर यह सेना धावा ना बोले| फिर तेरा प्रभाव हमारे उन प्रेमियों पर भी ना पड़े जिन्हें हमारे बचनों पर भरोसा है| कलयुग ने तभी हाथ जोड़े और कहा, महाराज! जो व्यक्ति निरंकार के सिमरण को अपने ह्रदय में बसाए रखेगा, उनपर हमारा प्रभाव कम पड़ेगा| ऐसा भरोसा देकर कलयुग अंतर्धयान हो गया|

Monday, 27 May 2013

श्री गुरु नानक देव जी


श्री गुरु नानक देव जी
 

Parkash Ustav (Birth date) :April 15, 1469. Saturday;
at Talwandi (Nankana Sahib, Present day Pakistan)
 प्रकाश उत्सव (जन्म की तारीख): 15 अप्रैल 1469. शनिवार,
तलवंडी (ननकाना साहिब, वर्तमान  पाकिस्तान)


 Father : Mehta Kalyan Dass (Mehta Kalu)
 पिता: मेहता कल्याण दास (मेहता कालू)
 
Mother : Mata Tripta Ji
 माँ: माता तृप्ता जी
 
Sibling :Bebe Nanaki Ji (sister)
सहोदर: बेबे नानकी जी (बहन)

Mahal (spouse) : Mata Sulakhani Ji
महल (पत्नी): माता सुलखनी जी

Sahibzaday (offspring) : Baba Sri Chand Ji, Baba Lakhmi Das Ji.
साहिबज़ादे (वंश): बाबा श्री चंद जी, बाबा लखमी दास जी.

Joti Jyot (ascension to heaven) :September 7, 1539 at Sri Kartarpur Sahib (present day Pakistan)
ज्योति ज्योत (स्वर्ग करने के उदगम): श्री करतारपुर साहिब (वर्तमान पाकिस्तान) में 7 सितम्बर 1539




जीवनी  

जोर जबरदस्ती और हाक्मो के अत्याचारों से दुखी सृष्टि की पुकार सुनकर अकाल पुरख ने गुरु नानक जी के रूप में जलते हुए संसार की रक्षा करने के लिए माता तृप्ताजी की कोख से महिता कालू चंद बेदी खत्री के घर राये भोये की तलवंडी (ननकाना साहिब) में कतक सुदी पूरनमाशी संवत १५२६ को सवा पहर के तड़के अवतार धारण किया|

 

गुरु जी (अवतार) का सृष्टि पर प्रभाव
भाई गुरदास जी

सतिगुरु  नानक प्रगटिया मिटी धुंध जग चानण होआ ||
जिउ कर सूरज निकलिआ  तारे छपे अंधेर पलोआ
||
सिंघ बुके म्रिगावली भन्नी जाई न धीर धरोआ
||
जिथे बाबा पैर धरे पूजा  आसण थापण सोआ
||
सिध आसण सभ जगत दे नानक आदि मते जे कोआ
||
घर घर अंदर धरमसाल होवै  कीरतन सदा  विसोआ
||
बाबे तारे चार चके नौ खंड प्रिथमी सचा ढोआ
||
गुरमुख कलि  विच परगट होआ ||


जब पंडित जी ने महिता कालू से पूछा की दाई से यह पूछो की जनम के समय बच्चे ने कैसी आवाज निकाली थी? तब दौलता दाई ने बताया कि पंडित जी! मेरे हाथों से अनेकों बच्चों ने जनम लिया है,पर मैंने ऐसा बालक आज तक नहीं देखा, और बच्चे तो रोते हुए पैदा होते है पर यह बच्चा तो हँसते हुए पैदा हुआ है| मानों दुपहर का सूरज चड़ गया हो,और पूरा घर में सुगंध फ़ैल गयी हो| दाई कि बातों से पंडित जी ने यह अनुभव कर लिया कि यह को ई अवतार पैदा हुआ है | गुरु जी को हिंदी, हिसाब पढ़ने के लिए पांधे गोपाल के पास, संस्कृत के लिए पंडित ब्रिज लाल तथा फारसी पढ़ने के लिए मुल्ला कुतबुद्दीन के पास भेजा गया |

गुरु जी ने जन कल्याण व समाज सुधार के लिए चार उदासियाँ की| पहली उदासी पूरब दिशा की तरफ संवत १५५६-१५६५ तक की व दूसरी उदासी दक्षिण दिशा की और संवत १५६७-१५७१ तक की| यहीं तक गुरु जी नहीं रुके, उनकी अगली उदासी उत्तर दिशा की तरफ संवत १५७१ में प्रारम्भ हो ग ई तथा चौथी उदासी संवत १५७५ के साथ यह कल्याण यात्रा समाप्त हो गई|

Sunday, 26 May 2013

श्री साईं लीलाएं - साईं बाबा की भक्तों को शिक्षाएं - अमृतोपदेश (अंतिम चरण)

ॐ सांई राम



कल हमने पढ़ा था.. काका, नाथ भागवत पढ़ो, यही एक दिन तुम्हारे काम आयेगा
श्री साईं लीलाएं
 

श्री साँई नाथ महाराज जी की पलकी की यह तस्वीर 23/5/2013 को रात्री 09:29 बजे उस समय ली गयी, जब बाबा जी की पालकी द्वारकामाँई से चावड़ी की ओर प्रस्थान कर रही थी..

साईं बाबा की भक्तों को शिक्षाएं - अमृतोपदेश

For Donation

For donation of Fund/ Food/ Clothes (New/ Used), for needy people specially leprosy patients' society and for the marriage of orphan girls, as they are totally depended on us.

For Donations, Our bank Details are as follows :

A/c - Title -Shirdi Ke Sai Baba Group

A/c. No - 200003513754 / IFSC - INDB0000036

IndusInd Bank Ltd, N - 10 / 11, Sec - 18, Noida - 201301,

Gautam Budh Nagar, Uttar Pradesh. INDIA.