शिर्डी के साँई बाबा जी की समाधी और बूटी वाड़ा मंदिर में दर्शनों एंव आरतियों का समय....

"ॐ श्री साँई राम जी
समाधी मंदिर के रोज़ाना के कार्यक्रम

मंदिर के कपाट खुलने का समय प्रात: 4:00 बजे

कांकड़ आरती प्रात: 4:30 बजे

मंगल स्नान प्रात: 5:00 बजे
छोटी आरती प्रात: 5:40 बजे

दर्शन प्रारम्भ प्रात: 6:00 बजे
अभिषेक प्रात: 9:00 बजे
मध्यान आरती दोपहर: 12:00 बजे
धूप आरती साँयकाल: 7:00 बजे
शेज आरती रात्री काल: 10:30 बजे

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निर्देशित आरतियों के समय से आधा घंटा पह्ले से ले कर आधा घंटा बाद तक दर्शनों की कतारे रोक ली जाती है। यदि आप दर्शनों के लिये जा रहे है तो इन समयों को ध्यान में रखें।

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Saturday, 18 May 2013

श्री साईं लीलाएं - बाबा के सेवक को कुछ न कहना, बाबा गुस्सा होंगे

ॐ सांई राम

कल हमने पढ़ा था.. माँ का चुम्बन लेने में क्या दोष है?    


श्री साईं लीलाएं



 
बाबा के सेवक को कुछ न कहना, बाबा गुस्सा होंगे 

Friday, 17 May 2013

श्री साईं लीलाएं - माँ का चुम्बन लेने में क्या दोष है?

ॐ सांई राम


कल हमने पढ़ा था.. सब कुछ गुरु को अर्पण करता चल    


श्री साईं लीलाएं


माँ का चुम्बन लेने में क्या दोष है?

साईं बाबा के एक भक्त थे दामोदर घनश्याम बावरे| लोग उन्हें 'अण्णा चिंचणीकर' के नाम से जानते थे| साईं बाबा पर उनकी इतनी आस्था था कि वे कई वर्ष तक शिरडी में आकर रहे| अण्णा स्वभाव से सीधे, निर्भीक और व्यवहार में रूखे थे| कोई भी बात उन्हें सहन न होती थी| पर मन में कोई कपट नहीं था| जो कुछ भी कहना होता था, दो टूक कह देते थे| अंदर से एकदम कोमल दिल और प्यार करने वाले थे| उनके इसी स्वभाव के कारण ही बाबा भी उन्हें विशेष प्रेम करते थे|

एक बार दोपहर के समय बाबा अपना बायां हाथ कट्टे पर रखकर आराम कर रहे थे, सभी भक्त स्वेच्छानुसार बाबा के अंग दबा रहे थे| बाबा के दायीं ओर वेणुबाई कौजलगी नाम की एक विधवा भी बाबा की सेवा कर रही थी| साईं बाबा उन्हें माँ कहकर पुकारते थे, जबकि अन्य सभी भक्त उन्हें 'मौसीबाई' कहा करते थे| मौसीबाई बड़े सरल स्वभाव की थी| उसे भी हँसी-मजाक करने की आदत थी| उस समय वे अपने दोनों हाथों की उंगलियां मिलाकर बाबा का पेट दबा रही थीं| जब वे जोर लगाकर पेट दबातीं तो पेट व कमर एक हो जाते थे| दबाव के कारण बाबा भी इधर-उधर हो जाते थे| अण्णा चिंचणीकर भी बाबा की दूसरी ओर बैठे सेवा कर रहे थे| हाथों को चलाने से मौसीबाई का सिर ऊपर से नीचे हो रहा था| दोनों ही सेवा करने में व्यस्त थे| इतने में अचानक मौसीबाई का हाथ फिसला और वह आगे की तरफ झुक गयी और उनका मुंह अण्णा के मुंह के सामने हो गया|

मौसीबाई मजाकिया स्वभाव की तो थी ही, वह एकदम से बोली - "अण्णा तुम मेरे से पप्पी (चुम्बन) मांगते हो| अपने सफेद बालों का ख्याल तो किया होता| तुम्हें जरा भी शर्म नहीं आती?" इतना सुनते ही अण्णा गुस्से के मारे आगबबूला हो गये और अनाप-शनाप बकने लगे - "क्या मैं मुर्ख हूं? तुम खुद ही मुझसे छेड़छाड़ कर झगड़ा कर रही हो|" अब मौसी का भी दिमाग गरम हो गया| दोनों में तू-तू, मैं-मैं बढ़ गयी| वहां उपस्थित अन्य भक्त इस विवाद का आनंद ले रहे थे| बाबा दोनों से बराबर का प्रेम करते थे| कुछ देर तक तो बाबा इस तमाशे को खामोशी से देखते रहे| फिर इस विवाद को शांत करते हुए बाबा अण्णा से बोले - "अण्णा ! क्यों इतना बिगड़ता है? अरे, अपनी माँ की पप्पी लेने में क्या दोष है?"

बाबा का ऐसा कहते ही दोनों एकदम से चुप हो गये और फिर आपस में हँसने लगे तथा बाबा के भक्तजन भी ठहाका हँसी में शामिल हो गये|

कल चर्चा करेंगे..बाबा के सेवक को कुछ न कहना, बाबा गुस्सा होंगे        

ॐ सांई राम
===ॐ साईं श्री साईं जय जय साईं ===
बाबा के श्री चरणों में विनती है कि बाबा अपनी कृपा की वर्षा सदा सब पर बरसाते रहें ।

Thursday, 16 May 2013

श्री साई सच्चरित्र - अध्याय 23

ॐ सांई राम

आप सभी को शिर्डी के साईं बाबा ग्रुप की और से साईं-वार की हार्दिक शुभ कामनाएं
हम प्रत्येक साईं-वार के दिन आप के समक्ष बाबा जी की जीवनी पर आधारित श्री साईं सच्चित्र का एक अध्याय प्रस्तुत करने के लिए श्री साईं जी से अनुमति चाहते है |

हमें आशा है की हमारा यह कदम घर घर तक श्री साईं सच्चित्र का सन्देश पंहुचा कर हमें सुख और शान्ति का अनुभव करवाएगा, किसी भी प्रकार की त्रुटी के लिए हम सर्वप्रथम श्री साईं चरणों में क्षमा याचना करते है|

श्री साई सच्चरित्र - अध्याय 23
---------------------------------------------------------------------------------------------------------योग और प्याज, शामा का सर्पविष उतारना, विषूचिका (हैजी) निवारणार्थ नियमों का उल्लंघन, गुरु भक्ति की कठिन परीक्षा ।
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Wednesday, 15 May 2013

श्री साईं लीलाएं - सब कुछ गुरु को अर्पण करता चल

ॐ सांई राम
 

कल हमने पढ़ा था.. हैजे की क्या औकात, जब साईं बाबा है साथ
श्री साईं लीलाएं
 
सब कुछ गुरु को अर्पण करता चल

Tuesday, 14 May 2013

श्री साईं लीलाएं - हैजे की क्या औकात, जब साईं बाबा है साथ

ॐ सांई राम

कल हमने पढ़ा था.. सर्प विष-निवारक था
 
श्री साईं लीलाएं
 


हैजे की क्या औकात, जब साईं बाबा है साथ

Monday, 13 May 2013

श्री साईं लीलाएं - सर्प विष-निवारक था

ॐ सांई राम

कल हमने पढ़ा था.. योगी का आत्मसमर्पण
श्री साईं लीलाएं
 
 
 
सर्प विष-निवारक था

Sunday, 12 May 2013

"ॐ साँई राम जी"


 "ॐ साँई राम जी"

हर इंसान को सपने आते है और टूट भी जाते है,

इस दुनिया में हम जिनको अपना कहते है, वो अपने भी कभी ना कभी हम से रूठ जाते है,

इस ज़िन्दगी में कैसे कैसे मोड़ आते है और आ कर चले भी जाते है,

मगर जिसके सर पर श्री साँई जी की नज़रें करम हो तो, उसके लिये राह में बिछे काँटे भी फूल बन जाते है,


"तो बोलियें श्री सदगुरू साँईनाथ महाराज की जय"

"अगर आप बोलेंगे 'श्री सदगुरू साँईनाथ महाराज की जय' तो इस छल कपट से भरी दुनिया में कभी भी आप को ना रहेगा किसी का भय, अब बोलियें मेरे साथ श्री सदगुरू साँईनाथ महाराज की जय"

"साँई-साँई बोलियें और अपना मुक्कदर खोलियें, हर दिन हर पल बस साँई-साँई ही बोलियें"
   
  
www.shirdikesaibabaji.blogspot.com

श्री साईं लीलाएं - योगी का आत्मसमर्पण

ॐ सांई राम


कल हमने पढ़ा था.. सबका रखवाला साईं    


श्री साईं लीलाएं


योगी का आत्मसमर्पण

एक बार चाँदोरकर के साथ एक सज्जन साईं बाबा से मिलने के लिए शिरडी आये थे| उन्होंने योग साधना के अतिरिक्त अनेक ग्रंथों का भी अध्ययन किया था, लेकिन उन्हें जरा भी व्यावहारिक ज्ञान नहीं था| पलमात्र भी वे समाधि लगाने में सफल नहीं हो पाते थे| उनके समाधि साधने में बाधा आती थी| उन्होंने विचार किया कि यदि साईं बाबा उन पर कृपा कर देंगे तो उनकी समाधि लगाने के समय आने वाली बाधा समाप्त हो जाएगी| अपने इसी उद्देश्य से वे चाँदोरकर के साथ शिरडी आये थे|

चाँदोरकर के साथ जब वे साईं बाबा के दर्शन करने के लिए मस्जिद पहुंचे तो उस समय साईं बाबा जुआर की बासी रोटी और कच्ची प्याज खा रहे थे| यह देखकर वह सज्जन सोचने लगे कि जो व्यक्ति कच्ची प्याज के संग बासी रोटी खाता हो, वह मेरी समस्या को कैसे दूर कर सकेगा? साईं बाबा तो अंतर्यामी थे| किसके मन में क्या विचार पैदा हो रहे हैं, यह उनसे छिपा न था| बाबा उन सज्जन के मन की बात जानकर नाना चाँदोरकर से बोले - "नाना ! जो प्याज को हजम करने की ताकत रखता है, प्याज भी उसी को खाना चाहिए, दूसरे को नहीं|"

वह सज्जन जो स्वयं को योगी समझते थे, बाबा के शब्दों को सुनकर अवाकू रह गये और उसी पल बाबा के श्रीचरणों में नतमस्तक हो गये| बाबा ने उसकी सारी समस्यायें जान लीं और उसे उनका समाधान भी बता दिया|

बाद में वे सज्जन बाबा के दर्शन कर जब वापस लौटने लगे तो बाबा ने उन्हें आशीर्वाद और ऊदी प्रसाद के साथ विदा किया|

कल चर्चा करेंगे..सर्प विष-निवारक था        

ॐ सांई राम
===ॐ साईं श्री साईं जय जय साईं ===
बाबा के श्री चरणों में विनती है कि बाबा अपनी कृपा की वर्षा सदा सब पर बरसाते रहें ।

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