शिर्डी के साँई बाबा जी की समाधी और बूटी वाड़ा मंदिर में दर्शनों एंव आरतियों का समय....

"ॐ श्री साँई राम जी
समाधी मंदिर के रोज़ाना के कार्यक्रम

मंदिर के कपाट खुलने का समय प्रात: 4:00 बजे

कांकड़ आरती प्रात: 4:30 बजे

मंगल स्नान प्रात: 5:00 बजे
छोटी आरती प्रात: 5:40 बजे

दर्शन प्रारम्भ प्रात: 6:00 बजे
अभिषेक प्रात: 9:00 बजे
मध्यान आरती दोपहर: 12:00 बजे
धूप आरती साँयकाल: 7:00 बजे
शेज आरती रात्री काल: 10:30 बजे

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निर्देशित आरतियों के समय से आधा घंटा पह्ले से ले कर आधा घंटा बाद तक दर्शनों की कतारे रोक ली जाती है। यदि आप दर्शनों के लिये जा रहे है तो इन समयों को ध्यान में रखें।

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Wednesday, 24 May 2017

श्री साईं लीलाएं - सबका रखवाला साईं

ॐ सांई राम



कल हमने पढ़ा था.. अम्मीर शक्कर की प्राण रक्षा     

श्री साईं लीलाएं
सबका रखवाला साईं
साईं बाबा लोगों को उपदेश भी देते और उनसे विभिन्न धर्मग्रंथों का अध्ययन भी करवातेसाईं बाबा के कहने पर काका साहब दीक्षित दिन में एकनामी भागवत और रात में भावार्थ रामायण पढ़ते थेउसका यह नियम और समय कभी नहीं चूकता था|
एक दिन काका साहब दीक्षित जब रामायण पाठ कर रहे थे तब हेमाडंपत भी वहां पर उपस्थित थावहां उपस्थित सभी श्रोता पूरी तन्मयता के साथ प्रसंग का श्रवण कर रहे थेहेमाडंपत भी प्रसंग सुनने में पूरी तरह से मग्न थे|
लेकिन तब ही न जाने कहां से एक बिच्छू आकर हेमाडंपत पर आकर गिरा और उनके दायें कंधे पर बैठ गयाहेमाडंपत को इसका पता न चलाकुछ देर बाद जब बाबा की नजर अचानक हेमाडंपत के कंधे पर पड़ी तो उन्होंने देखा कि बिच्छू उनके कंधे पर मरने जैसी अवस्था में पड़ा थालेकिन बाबा ने बड़ी शांति के साथ बिच्छू को धोती के दोनों किनारे मिलाकर उसमें लपेटा और दूर जाकर छोड़ आयेबाबा की प्रेरणा से ही वह बिच्छू से बचे और कथा भी बिना बाधा के चलती रही|
इसी तरह एक बार शाम के समय काका साहब दीक्षित बाड़े के ऊपरी हिस्से में बैठे हुए थेउसी समय एक सांप खिड़की की चौखट से छोटे-से छेद में से होकर अंदर आकर कुंडली मारकर बैठ गयाअंधेरे में तो वह दिखाई नहीं दियालेकिन लालटेन की रोशनी में वह स्पष्ट दिखाई पड़ावह बैठा हुआ फन हिला रहा था|
तभी कुछ लोग लाठी लेकर वहां दौड़ेउसी हड़बड़ाहट में वह सांप वहां से जान बचाने के लिए उसी छेद में से निकलकर भाग गयालोगों ने उसके भाग जाने पर चैन की सांस लीजब सांप भाग गया तो वहां उपस्थित लोग आपस में वाद-विवाद करने लगेएक भक्त मुक्ताराम का कहना था - "कि अच्छा हुआ जो एक जीव के प्राण जाने से बच गए|" लेकिन हेमाडंपत को गुस्सा आ गया और वे मुक्ताराम का प्रतिरोध करते हुए बोले - "ऐसे खतरनाक जीवों के बारे में दया दिखायेंगे तो यह दुनिया कैसे चलेगीसांप को तो मार डालना ही अच्छा था|" इस बारे में दोनों में बहुत देर तक बहस होती रहीदोनों ही अपनी-अपनी बातों पर अड़े रहेआखिर में जब रात काफी हो गयी तोतब कहीं जाकर बहस रुकीसब लोग सोने के लिये चले गये|
अगले दिन प्रात: जब सब लोग बाबा के दर्शन करने के लिए मस्जिद में गयेतब बाबा ने पूछा - "कल रात दीक्षित के घर में क्या बहस हो रही थी?" तब हेमाडंपत ने बाबा को सारी बात बताते हुए पूछा कि सांप को मारा जाये या नहींतब बाबा अपना निर्णय सुनाते हुए बोले - "सभी जीवों में ईश्वर का वास हैवह जीव चाहे सांप हो या बिच्छूईश्वर ही सबके नियंता हैंईश्वर की इच्छा के बिना कोई भी किसी को हानि नहीं पहुंचा सकताइसलिए सबसे प्यार करना चाहिएसारा संसार ईश्वर के आधीन है और इस संसार में रहनेवाले किसी का भी अलग अस्तित्व नहीं हैइसलिए सब जीवों पर दया करनी चाहिएजहां तक संभव हो हिंसा न करेंहिंसा से क्रूरता बढ़ती हैधैर्य रखना चाहिएअहिंसा में शांति और संतोष होता हैइसलिए शत्रुता त्यागकर शांत मन से जीवन जीना चाहिएईश्वर की सबका रक्षक है|" बाबा के इस अनमोल उपदेश को हेमाडंपत कभी नहीं भूलेबाबा ने हेमाडंपत ही नहीं अपने सम्पर्क में आये हजारों लोगों का जीवन सुधारावे सन्मार्ग पर चलने लगे|


परसों चर्चा करेंगे... योगी का आत्मसमर्पण       

ॐ सांई राम
===ॐ साईं श्री साईं जय जय साईं ===
बाबा के श्री चरणों में विनती है कि बाबा अपनी कृपा की वर्षा सदा सब पर बरसाते रहें ।

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