शिर्डी के साँई बाबा जी की समाधी और बूटी वाड़ा मंदिर में दर्शनों एंव आरतियों का समय....

"ॐ श्री साँई राम जी
समाधी मंदिर के रोज़ाना के कार्यक्रम

मंदिर के कपाट खुलने का समय प्रात: 4:00 बजे

कांकड़ आरती प्रात: 4:30 बजे

मंगल स्नान प्रात: 5:00 बजे
छोटी आरती प्रात: 5:40 बजे

दर्शन प्रारम्भ प्रात: 6:00 बजे
अभिषेक प्रात: 9:00 बजे
मध्यान आरती दोपहर: 12:00 बजे
धूप आरती साँयकाल: 7:00 बजे
शेज आरती रात्री काल: 10:30 बजे

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निर्देशित आरतियों के समय से आधा घंटा पह्ले से ले कर आधा घंटा बाद तक दर्शनों की कतारे रोक ली जाती है। यदि आप दर्शनों के लिये जा रहे है तो इन समयों को ध्यान में रखें।

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Friday, 7 April 2017

श्री साईं लीलाएं- साईं बाबा की दयालुता


ॐ सांई राम



परसों हमने पढ़ा था.. बालक खापर्डे को प्लेग-मुक्ति     

श्री साईं लीलाएं
साईं बाबा की दयालुता         

साईं बाबा की अद्भुत चिकित्सा की चारों ओर प्रसिद्धि फैल चुकी थीलोग बहुत दूर-दूर से उनसे अपना इलाज कराने के लिए आया करते थेबाबा स्वयं कष्ट उठाकर दूसरों का कल्याण किया करते थेबाबा की दयालुता और सर्वव्यापकता की चारों ओर चर्चा थी|
यह घटना सन् 1910 की हैजब धनतेरस के दिन बाबा अपनी धूनी के पास बैठे आग ताप रहे थे और धूनी को अधिक प्रज्जवलित करने के लिए उसमें लकड़ियां भी डालते जा रहे थेधूनी अपनी पूरी प्रचंडता पर थीकि एकाएक साईं बाबा ने अपने हाथ धूनी में डाल दियेतभी बाबा के भक्त माधवराव देशपांडे (शामा) ने बाबा को धूनी में हाथ डालते देखा तो वह दौड़कर बाबा के पास पहुंचा और बलपूर्वक बाबा को पकड़कर पीछे खींच लियावहां उपस्थित किसी भी भक्त की समझ में बाबा की यह लीला नहीं आयीबाबा के हाथों को देखकर शामा रोता हुआ बोला - "देवा ! यह आपने क्या किया ?" तब बाबा बोले - "यहां से कुछ दूर एक लुहारिन अपनी बच्ची को गोद में लेकर भट्ठी झोंक रही थी तभी पति के बुलाने पर वह उसके पास चली गयीउसकी जरा-सी असावधानी के कारण वह बची फिसलकर भट्ठी में गिर गयीपरमैंने उसे तत्काल भट्ठी में हाथ डालकर निकाल लियाखैरहाथ जला तो मुझे इसकी जरा भी चिंता नहींलेकिन मुझे तसल्ली है कि उस बच्ची के प्राण तो बच गए|" यह सारी घटना शामा ने चाँदोरकर को खत के माध्यम से लिखकर भेजीचाँदोरकर को बाबा के हाथ जलने की घटना का पता चला तो वह मुम्बई के प्रसिद्ध डॉक्टर परमानंद को साईं बाबा की चिकित्सा करने के लिए शिरडी लाएडॉक्टर परमानंद अपने साथ सभी आवश्यक दवाईलेपइंजेक्शन आदि लेकर आये थेमस्जिद पहुंचकर चाँदोरकर ने बाबा के चरण स्पर्श करने के बाद बाबा से विनती की कि वह अपने हाथ का इलाज डॉक्टर परमानंद को करने की अनुमति देंपर बाबा ने स्पष्ट रूप से इलाज कराने से इंकार कर दिया|
फिर भी बाबा के परम भक्त भागोजी शिंदे उनके जले हुए हाथ पर घी लगाकर एक पत्ता रखते और पट्टी बांधते थेजिससे बाबा के घाव जल्दी भर जायें और हाथ ठीक हो जाएइसके लिए चाँदोरकर ने बाबा से कई बार विनती की कि वो डॉक्टर परमानंद से अपनी चिकित्सा करवा लेंस्वयं डॉक्टर परमानंद ने भी बाबा से बार-बार आग्रह कियापर बाबा ने चिकित्सा करवाने से यह कहते हुए इंकार कर दिया कि मेरा डॉक्टर तो अल्लाह ही हैइस तरह डॉक्टर परमानंद को बाबा की चिकित्सा करने का मौका न मिल सका|
लेकिन कुष्ठ रोगी होने पर भी भागोजी शिंदे का यह अहोभाग्य (अत्यन्त सौभाग्य) था कि बाबा ने उन्हें पट्टी बांधने की अनुमति दे रखी थीवे अपने इस कार्य को पूरी श्रद्धा के साथ कर रहे थेकुछ दिनों में जब घाव भर गया और हाथ पूरी तरह से ठीक हो गयातब सभी भक्तों को अत्यन्त प्रसन्नता हुईफिर भी भागोजी शिंदे द्वारा बाबा के उस हाथ पर घी मलने व पट्टी बांधने का सिलसिला बाबा की महासमाधि लेने तक नियमित रूप से जारी रहावैसे साईं बाबा पूर्ण सिद्ध थेउन्हें किसी भी तरह की चिकित्सा की कोई आवश्यकता न थीफिर भी अपने भक्तों की प्रसन्नता और प्रेमवश उन्होंने भागोजी शिंदे को सेवा करने का अवसर दिया
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कल चर्चा करेंगे..मुझे पंढरपुर जा के रहना है       


ॐ सांई राम
===ॐ साईं श्री साईं जय जय साईं ===

बाबा के श्री चरणों में विनती है कि बाबा अपनी कृपा की वर्षा सदा सब पर बरसाते रहें ।

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