शिर्डी के साँई बाबा जी की समाधी और बूटी वाड़ा मंदिर में दर्शनों एंव आरतियों का समय....

"ॐ श्री साँई राम जी
समाधी मंदिर के रोज़ाना के कार्यक्रम

मंदिर के कपाट खुलने का समय प्रात: 4:00 बजे

कांकड़ आरती प्रात: 4:30 बजे

मंगल स्नान प्रात: 5:00 बजे
छोटी आरती प्रात: 5:40 बजे

दर्शन प्रारम्भ प्रात: 6:00 बजे
अभिषेक प्रात: 9:00 बजे
मध्यान आरती दोपहर: 12:00 बजे
धूप आरती साँयकाल: 7:00 बजे
शेज आरती रात्री काल: 10:30 बजे

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निर्देशित आरतियों के समय से आधा घंटा पह्ले से ले कर आधा घंटा बाद तक दर्शनों की कतारे रोक ली जाती है। यदि आप दर्शनों के लिये जा रहे है तो इन समयों को ध्यान में रखें।

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Saturday, 15 April 2017

श्री साईं लीलाएं- बांद्रा गया भूखा ही रह गया

ॐ सांई राम



कल हमने पढ़ा था.. बाबा की आज्ञा का पालन अवश्य हो      

श्री साईं लीलाएं
बांद्रा गया भूखा ही रह गया

बाबा के एक भक्त रामचन्द्र आत्माराम तर्खड जिन्हें लोग बाबा साहब के नाम से भी जानते थेबांद्रा में रहते थेवैसे वो प्रार्थना समाजी थे परन्तु साईं बाबा के अनन्य भक्त थेउनकी पत्नी और पुत्र तो साईं बाबा के प्रति पूर्णतया समर्पित थेउनका पुत्र तो साईं बाबा की तस्वीर को बिना भोग लगाये खाना भी नहीं खाता था|
एक बार गर्मियों की छुट्टियों में उनके मन में विचार आया कि उनकी पत्नी और पुत्र छुट्टियां शिरडी में ही बितायेंलेकिन उनका पुत्र उनकी इस बात से सहमत नहीं थावह छुट्टियां बांद्रा में ही बिताना चाहता थाक्योंकि उसके मन में यह शंका थी कि उसके घर में न रहने की वजह से साईं बाबा की पूजा और भोग में व्यवधान पड़ेगाशायद उसके पिता प्रार्थना समाजी होने के कारण इस पर पूरा ध्यान न दे पाएंलेकिन जब उसके पिता ने उसे इस बारे में पूरी तरह से आश्वस्त कर दियाफिर वह लड़का अपनी माँ को साथ लेकर शिरडी रवाना हो गया|
अपने बेटे से किये गये वायदे के अनुसार बाबा साहब रोजाना पूजन करते और बाबा की तस्वीर को भोग भी चढ़ातेएक दिन वह पूजा करके अपने ऑफिस चले गएजब दोपहर को भोजन करने लगे तो उनकी थाली में प्रसाद नहीं थाप्रसाद थाली में न देखकर उन्हें अपनी भूल का अहसास हुआ और वे शीघ्र उठे और बाबा की तस्वीर के आगे दंडवत् होकर क्षमा मांगने लगे और फिर सारी बातें पत्र में लिखकर अपने पुत्र को अपनी ओर से बाबा से क्षमा मांगने को भी कहा|
यह घटना दोपहर को बांद्रा में घटी थीयह वह समय था जब दोपहर को शिरडी में आरती होने वाली थीजब वे माँ-बेटा बाबा के दर्शन करने बाबा के पास गये तो तभी बाबा श्रीमती तर्खड से बोले - "माँ ! मैं आज हमेशा की तरह भोजन के लिए बांद्रा गया थापर खाना न मिलने के कारण दोपहर को भूखा ही लौट आया|"
साईं बाबा की इन बातों का अर्थ वहां उपस्थित कोई भी भक्त नहीं समझ पायापर वहीं पर खड़ा तर्खड का पुत्र तुरंत समझ गया कि बांद्रा में पूजा के दौरान कोई न कोई भूल अवश्य ही हुई हैवह बाबा से भोग के लिए भोजन लाने की आज्ञा मांगने लगातो बाबा ने उसे मना कर दिया और वहीं पूजन करने को कहाबाद में पुत्र ने अपने पिता तर्खड को पत्र में सारी बातें विस्तार से लिखकर भविष्य में उन्हें पूजन के दौरान सावधानी बरतने को कहा|पत्र को पढ़कर उसके पिता को इस बात का बहुत दुःख हुआ कि उसकी भूल के कारण बाबा को भूखा रहना पड़ाऔर वे रो पड़े|


कल चर्चा करेंगे..प्यार की रोटी से मन तृप्त हुआ 

ॐ सांई राम
===ॐ साईं श्री साईं जय जय साईं ===
बाबा के श्री चरणों में विनती है कि बाबा अपनी कृपा की वर्षा सदा सब पर बरसाते रहें ।

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