शिर्डी के साँई बाबा जी की समाधी और बूटी वाड़ा मंदिर में दर्शनों एंव आरतियों का समय....

"ॐ श्री साँई राम जी
समाधी मंदिर के रोज़ाना के कार्यक्रम

मंदिर के कपाट खुलने का समय प्रात: 4:00 बजे

कांकड़ आरती प्रात: 4:30 बजे

मंगल स्नान प्रात: 5:00 बजे
छोटी आरती प्रात: 5:40 बजे

दर्शन प्रारम्भ प्रात: 6:00 बजे
अभिषेक प्रात: 9:00 बजे
मध्यान आरती दोपहर: 12:00 बजे
धूप आरती साँयकाल: 7:00 बजे
शेज आरती रात्री काल: 10:30 बजे

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निर्देशित आरतियों के समय से आधा घंटा पह्ले से ले कर आधा घंटा बाद तक दर्शनों की कतारे रोक ली जाती है। यदि आप दर्शनों के लिये जा रहे है तो इन समयों को ध्यान में रखें।

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Monday, 10 April 2017

श्री साईं लीलाएं- बाइजाबाई द्वारा साईं सेवा

ॐ सांई राम



कल हमने पढ़ा था.. साईं बाबा द्वारा भिक्षा माँगना        

श्री साईं लीलाएं
बाइजाबाई द्वारा साईं सेवा           

साईं बाबा पूर्ण सिद्धपुरुष थे और उनका कार्य-व्यवहार भी बिल्कुल सिद्धों जैसा ही थाउनके इस व्यवहार को देखकर शुरू-शुरू में शिरडी को लोग उन्हें पागल समझते थे और पागल फकीर कहते थेबाद में बाबा इसी पागल सम्बोधन से प्रसिद्ध भी हो गएजबकि साईं बाबा बाह्य दृष्टि से जैसे दिखाई देते थेवास्तव में वे वैसे थे ही नहींबाबा उदार हृदयऔर त्याग की साक्षात् मूर्ति थेउनका हृदय महासागर की तरह बिल्कुल शांत थालेकिन शिरडी में कुछ लोग ऐसे भी थेजो बाबा को ईश्वर मानते थेउनमे एक थी वाइजाबाई|
वाइजाबाई एक भद्र महिला वे तात्या कोते पाटिल की माता थींउन्होंने अपने पूरे जीवन में साईं बाबा की बहुत सेवा की थीरोजाना दोपहर को वे एक टोकरी में रोटी और भाजी लेकर बाबा को ढूंढती-फिरतींकड़ी धूप में भी दो-चार मील घूमतींजहां पर भी उन्हें बाबा मिलतेउन्हें बड़े प्यार से अपने हाथों से खिलातींजब कभी बाबा अपनी ध्यानावस्था में मग्न बैठे रहतेतो वह घंटों बैठे उनके होश में आने का इंतजार करतींआंख खुलने पर उन्हें जबरन खिलातींसाईं बाबा भी वाइजाबाई की इस सेवा को अपने अंतिम समय तक नहीं भुला पाएवाइजाबाई और उसके पुत्र तात्या कोते की भी साईं बाबा के प्रति गहन निष्ठा और श्रद्धा थीवाइजाबाई की सेवा का प्रतिफल बाद में उसके पुत्र तात्या कोते को भी दिया|
साईं बाबा वाइजाबाई और तात्या कोते से यही कहा करते थे कि फकीरी ही सच्ची अमीरी हैवह अनंत हैजिसे अमीरी कहते हैं वह तो एक दिन समाप्त हो जाने वाली हैवाइजाबाई की सेवा को साईं बाबा ने समझ लिया और फिर उन्होंने भटकना छोड़ दिया और मस्जिद में रहकर ही भोजन करने लगेवाइजाबाई की मृत्यु के पश्चात् उसके बेटे ने भी यह सिलसिला जारी रखावह भी बाबा के लिए भोजन लाता|



कल चर्चा करेंगे..तात्या और म्हालसापति को बाबा का सानिध्य    
ॐ सांई राम
===ॐ साईं श्री साईं जय जय साईं ===
बाबा के श्री चरणों में विनती है कि बाबा अपनी कृपा की वर्षा सदा सब पर बरसाते रहें ।

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