शिर्डी के साँई बाबा जी की समाधी और बूटी वाड़ा मंदिर में दर्शनों एंव आरतियों का समय....

"ॐ श्री साँई राम जी
समाधी मंदिर के रोज़ाना के कार्यक्रम

मंदिर के कपाट खुलने का समय प्रात: 4:00 बजे

कांकड़ आरती प्रात: 4:30 बजे

मंगल स्नान प्रात: 5:00 बजे
छोटी आरती प्रात: 5:40 बजे

दर्शन प्रारम्भ प्रात: 6:00 बजे
अभिषेक प्रात: 9:00 बजे
मध्यान आरती दोपहर: 12:00 बजे
धूप आरती साँयकाल: 5:45 बजे
शेज आरती रात्री काल: 10:30 बजे

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निर्देशित आरतियों के समय से आधा घंटा पह्ले से ले कर आधा घंटा बाद तक दर्शनों की कतारे रोक ली जाती है। यदि आप दर्शनों के लिये जा रहे है तो इन समयों को ध्यान में रखें।

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Saturday, 9 April 2022

दो हमको फूल या पत्थर तुम्हारे गीत गायेंगे

ॐ सांई राम


दो हमको फूल या पत्थर तुम्हारे गीत गायेंगे
तुम्हारा नाम ले लेकर तुम्हारे गीत गायेंगे


लगन तुमसे जो लग जाये तो कोई रो नहीं सकता
इलाजे ग़म तुम्हारे बिन किसी से हो नहीं सकता
इस कारण से हम घर घर तुम्हारे गीत गायेंगे
दो हमको फूल या पत्थर तुम्हारे गीत गायेंगे

अँधेरा हो सवेरा हो किसी आफ़त ने घेरा हो
हमेशा साईं धुन गायें कहीं भी अपना डेरा हो
ये मत समझो के हम पल भर तुम्हारे गीत गायेंगे
दो हमको फूल या पत्थर तुम्हारे गीत गायेंगे

अगर चाहो तो धरती का नसीबा जाग जायेगा
हमारी जिंदगी में एक दिन ऐसा भी आयेगा
सभी सेहरा सभी सागर तुम्हारे गीत गायेंगे
दो हमको फूल या पत्थर तुम्हारे गीत गायेंगे

तुम्हारी याद में खो कर मिले तन मन से छुटकारा
दिला तो हमको ऐ साईं हर इक बन्धन से छुटकारा
दिखा दो आख़िरी मंज़र तुम्हारे गीत गायेंगे
दो हमको फूल या पत्थर तुम्हारे गीत गायेंगे

दो हमको फूल या पत्थर तुम्हारे गीत गायेंगे
तुम्हारा नाम ले लेकर तुम्हारे गीत गायेंगे




-: आज का साईं सन्देश :-

साईं लीला जो लिखे,
नष्ट कुबुधि होय ।
ध्यान भक्ति से श्रवणकर,
 लहर प्रेम की होय ।।

लीला का तल खोजिये,
गहराई तक जाय,
ज्ञान रूप सारे रतन,
भक्तन को मिल जाय ।।
   
 
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Friday, 8 April 2022

कोई तेरा नहीं बस एक साईं आसरा होगा

ॐ सांई राम


 कोई तेरा नहीं बस एक साईं आसरा होगा,
पर उसको ढूंढना है अपने अन्दर झांकना होगा,


तू दर उस वक़्त से जब दूर तक तू भागता होगा,
तेरे कर्मों का साया तेरा पीछा कर रहा होगा,
कोई तेरा नहीं बस एक साईं आसरा होगा,

किसी के लब पे जब भी जिंदगी से कुछ गिला होगा,
तो साईं और उसके दरमियाँ इक फासला होगा,
कोई तेरा नहीं बस एक साईं आसरा होगा,

उधर दुनियाँ की भट्टी है इधर साईं की ठंडक है,
उधर जाओ इधर आओ तुझे ये सोचना होगा
कोई तेरा नहीं बस एक साईं आसरा होगा,

तेरे रब से कोई नेकी बुराई छुप नहीं सकती,
कोई देखे न देखे पर वो सब कुछ देखता होगा,
कोई तेरा नहीं बस एक साईं आसरा होगा,

न जाने कब कहाँ वो खोल दे रहमत के दरवाज़े,
मगर इसके लिये दिन रात तुझको जागना होगा,
कोई तेरा नहीं बस एक साईं आसरा होगा,
मुक़मल ज़ात है उसकी मुक़मल आस रख उस पर,
उसी ने दर्द बांटे हैं वो ही तेरी दवा होगा,
कोई तेरा नहीं बस एक साईं आसरा होगा,

कोई तेरा नहीं बस एक साईं आसरा होगा,
पर उसको ढूंढना है अपने अन्दर झांकना होगा,

 -: आज का साईं सन्देश :-

यदि तू चाहे गुरु शरण,
उन्नत चाहे राह ।
श्रद्धा, धीरज साध ले,
बाबा पकडे बांह ।।

ख़ुशी मन हेमांड जी,
बाबा अनुमत पाय ।
मन श्रद्धा से साधकर,
साईं चरित लिखाय ।।
 
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Thursday, 7 April 2022

श्री साई सच्चरित्र - अध्याय 51 - उपसंहार

 ॐ सांई राम



आप सभी को शिर्डी के साँई बाबा ग्रुप की ओर से श्री साईं-वार की हार्दिक शुभ कामनाएं, हम प्रत्येक साईं-वार के दिन आप के समक्ष बाबा जी की जीवनी पर आधारित श्री साईं सच्चित्र का एक अध्याय प्रस्तुत करने के लिए श्री साईं जी से अनुमति चाहते है , हमें आशा है की हमारा यह कदम  घर घर तक श्री साईं सच्चित्र का सन्देश पंहुचा कर हमें सुख और शान्ति का अनुभव करवाएगा, किसी भी प्रकार की त्रुटी के लिए हम सर्वप्रथम श्री साईं चरणों में क्षमा याचना करते है...


श्री साई सच्चरित्र - अध्याय 51 - उपसंहार 

अध्याय – 51 पूर्ण हो चुका है और अब अन्तिम अध्याय (मूल ग्रन्थ का 52 वां अध्याय) लिखा जा रहा है और उसी प्रकार सूची लिखने का वचन दिया है, जिस प्रकार की अन्य मराठी धार्मिक काव्यग्रन्थों में विषय की सूची अन्त में लिखी जाती है । अभाग्यवश हेमाडपंत के कागजपत्रों की छानबीन करने पर भी वह सूची प्राप्त न हो सकी । तब बाब के एक योग्य तथा धार्मि भक्त ठाणे के अवकाशप्राप्त मामलतदार श्री. बी. व्ही. देव ने उसे रचकर प्रस्तुत किया । पुस्तक के प्रारम्भ में ही विषयसूची देने तथा प्रत्येक अध्याय में विषय का संकेत शीर्षक स्वरुप लिखना ही आधुनिक प्रथा है, इसलिये यहाँ अनुक्रमाणिका नहीं दी जा रही है । अतः इस अध्याय को उपसंहार समझना ही उपयुक्त होगा । अभाग्यवश हेमा़डपंत उस समय तक जीवित न रहे कि वे अपने लिखे हुए इस अध्याय की प्रति में संशोधन करके उसे छपने योग्य बनाते ।

श्री सदगुरु साई की महानता
............................

हे साई, मैं आपकी चरण वन्दना कर आपसे शरण की याचना करता हूँ, क्योकि आप ही इस अखिल विश्व के एकमात्र आधार है । यदि ऐसी ही धारणा लेकर हम उनका भजन-पूजन करें तो यह निश्चित है कि हमारी समस्त इच्छाएं शीघ्र ही पूर्ण होंगी और हमें अपने परम लक्ष्य की प्राप्ति हो जायेगी । आज निन्दित विचारों के तट पर माया-मोह के झंझावात से धैर्य रुपी वृक्ष की जड़ें उखड़ गई है । अहंकार रुपी वायु की प्रबलता से हृदय रुपी समुद्र में तूफान उठ खड़ा हुआ है, जिसमें क्रोध और घृणा रुपी घड़ियाल तैरते है और अहंभाव एवं सन्देह रुपी नाना संकल्प-विकल्पों की संतत भँवरों में निन्दा, घृणा और ईर्ष्या रुपी अगणित मछलियाँ विहार कर रही है । यघपि यह समुद्र इतना भयानक है तो भी हमारे सदगुरु साई महाराज उसमें अगस्त्य स्वरुप ही है । इसलिये भक्तों को किंचितमात्र भी भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है । हमारे सदगुरु तो जहाज है और वे हमें कुशलतापूर्वक इस भयानक भव-समुद्र से पार उतार देंगे ।

प्रार्थना

श्री सच्चिदानंद साई महाराज को साष्टांग नमस्कार करके उनके चरण पकड़ कर हम सब भक्तों के कल्याणार्थ उनसे प्रार्थना करते है कि हे साई । हमारे मन की चंचलता और वासनाओं को दूर करो । हे प्रभु । तुम्हारे श्रीचरणों के अतिरिक्त हममें किसी अन्य वस्तु की लालसा न रहे । तुम्हारा यह चरित्र घर-घर पहुँचे और इसका नित्य पठन-पाठन हो और जो भक्त इसका प्रेमपूर्वक अध्ययन करें, उनके समस्त संकट दूर हो ।


फलश्रुति (अध्ययन का पुरस्कार)

अब इस पुस्तक के अध्ययन से प्राप्त होने वाले फल के सम्बन्ध में कुछ शब्द लिखूँगा । इस ग्रन्थ के पठन-पठन से मनोवांछित फल की प्राप्ति होगी । पवित्र गोदावरी नदी में स्नान कर, शिरडी के समाधि मन्दिर में श्री साईबाबा की समाधि के दर्शन कर लेने के पश्चात इस ग्रन्थ का पठन-पाठन या श्रवण प्रारम्भ करोगे तो तुम्हारी तिगुनी आपत्तियाँ भी दूर हो जायेंगी । समय-समय पर श्री साईबाबा की कथा-वार्ता करते रहने से तुम्हें आध्यात्मिक जगत् के प्रति अज्ञात रुप से अभिरुचि हो जायेगी और यदि तुम इस प्रकार नियम तथा प्रेमपूर्वक अभ्यास करते रहे तो तुम्हारे समस्त पाप अवश्य नष्ट हो जायेंगें । यदि सचमुच ही तुम आवागमन से मुक्ति चाहते हो तो तुम्हें साई कथाओं का नित्य पठन-पाठन, स्मरण और उनके चरणों में प्रगाढ़ प्रीति रखनी चाहिये । साई कथारुपी समुद्र का मंथन कर ुसमें से प्राप्त रत्नों का दूसरों को वितरण करो, जिससे तुम्हें नित्य नूतन आनन्द का अनुभव होगा और श्रोतागण अधःपतन से बच जायेंगे । यदि भक्तगण अनन्य भाव से उनकी शरण आयें तो उनका ममत्व नष्ट होकर बाबा से अभिन्नता प्राप्त हो जायेगी, जैसे कि नदी समुद्र में मिल जाती है । यदि तुम तीन अवस्थाओं (अर्थात्- जागृति, स्वप्न और निद्रा) में से किसी एक में भी साई-चिन्तन में लीन हो जाओ तो तुम्हारा सांसारिक चक्र से छुटकारा हो जायेगा । स्नान कर प्रेम और श्रद्घयुक्त होकर जो इस ग्रन्थ का एक सप्ताह में पठन समाप्त करेंगे, उनके सारे कष्ट दूर हो जायेंगे या जो इसका नित्य पठन या श्रवण करेंगे, उन्हें सब भयों से तुरन्त छुटकारा मिल जायेगा । इसके अध्ययन से हर एक को अपनी श्रद्घा और भक्ति के अनुसार फल मिलेगा । परन्तु इन दोनों के अभाव में किसी भी फल की प्राप्ति होना संभव नहीं है । यदि तुम इस ग्रन्थ का आदरपूर्वक पठन करोगे तो श्री साई प्रसन्न होकर तुम्हें अज्ञान और दरिद्रता के पाश से मुक्त कर, ज्ञान, धन और समृद्घि प्रदान करेंगे । यदि एकाग्रचित होकर नित्य एक अध्याय ही पढ़ोगे तो तुम्हें अपरिमित सुख की प्राप्ति होगी । इस ग्रन्थ को अपने घर पर गुरु-पूर्णिमा, गोकुल अष्टमी, रामनवमी, विजयादशमी और दीपावली के दिन अवश्य पढ़ना चाहिये । यदि ध्यानपूर्वक तुम केवल इसी ग्रन्थ का अध्ययन करते रहोगे तो तुम्हें सुख और सन्तोष प्राप्त होगा और सदैव श्री साई चरणारविंदो का स्मरण बना रहेगा और इस प्रकार तुम भवसागर से सहज ही पार हो जाओगे । इसके अध्ययन से रोगियों को स्वास्थ्य, निर्धनों को धन, दुःखित और पीड़ितों को सम्पन्नता मिलेगी तथा मन के समस्त विकार दूर होकर मानसिक शान्ति प्राप्त होगी ।
मेरे प्रिय भक्त और श्रोतागण । आपको प्रणाम करते हुए मेरा आपसे एक विशेष निवेदन है कि जिनकी कथा आपने इतने दिनों और महीनों से सुनी है, उनके कलिमलहारी और मनोहर चरणों को कभी विस्मृत न होने दें । जिस उत्साह, श्रद्गा और लगन के साथ आप इन कथाओं का पठन या श्रवण करेंगे, श्री साईबाबा वैसे ही सेवा करने की बुद्घि हमें प्रदान करेंगे । लेखक और पाठक इस कार्य में परस्पर सहयोग देकर सुखी होवें ।

प्रसाद - याचना

अन्त में हम इ
स पुस्तक को समाप्त करते हुए सर्वशक्तिमान परमात्मा से निम्नलिखित कृपा या प्रसादयाचना करते है –

हे ईश्वर । पाठकों और भक्तों को श्री साई-चरणों में पूर्ण और अनन्य भक्ति दो । श्री साई का मनोहर स्वरुप ही उनकी आँखों में सदा बसा रहे और वे समस्त प्राणियों में देवाधिदेव साई भगवान् का ही दर्शन करें । एवमस्तु ।


।। श्री सद्रगुरु साईनाथार्पणमस्तु । शुभं भवतु ।।
।। ऊँ श्री साई यशःकाय शिरडीवासिने नमः ।।

आप सभी को शिर्डी के साँई बाबा ग्रुप की ओर से हार्दिक धन्यवाद, हम प्रत्येक साईं-वार के दिन आप के समक्ष बाबा जी की जीवनी पर आधारित श्री साईं सच्चित्र का एक अध्याय प्रस्तुत करने के लिए श्री साईं जी के श्री चरणों में अनुग्रह करते है की वह हमें इसे पुन: आरम्भ (दिनांक 14 अप्रैल 2022 से) करने हेतु आज्ञा प्रदान करें एवं हम अपने सभी पाठको से इस बात की भी क्षमा चाहते है की यदि अनजाने में हम से कोई भूल हो गयी हो तो बाबा श्री साईं जी हमें क्षमा प्रदान करने की कृपा करें, हम आपका इस सहयोग के लिए हृदय से आभार व्यक्त करते है एवं आपको आश्वासन देते है की अगले साईं-वार से श्री साईं सचरित्र का पुन: प्रसारण किया जायेगा, हमें आशा है की हमारा यह कदम घर घर तक श्री साईं सच्चित्र का सन्देश पंहुचा कर सभी को सुख और शान्ति का अनुभव करवाएगा, किसी भी प्रकार की त्रुटी के लिए हम सर्वप्रथम श्री साईं चरणों में क्षमा याचना करते है... एवं सभी पाठको का एक बार फिर से आभार व्यक्त करते है ...!!

ॐ सांई राम जी  

Wednesday, 6 April 2022

जीवन बीत गया सपनों में, शेष बचे दिन चार

ॐ सांई राम



 जीवन बीत गया सपनों में, शेष बचे दिन चार
भोर अब तो होने लगी है, साईं नाम पुकार,


सूरज कितनी बार ही निकला, लेकर अपनी ही धूप,
कितनी बार ये बदले ये मौसम, बदला समय का रूप,
अंत समय है नीद से जागो, कर लो साईं से प्यार,
जीवन बीत गया सपनों में, शेष बचे दिन चार

क्या है तेरा किसपर पगले, करता है अभिमान,
ये जग तो है रैन बसेरा, तू है यहाँ मेहमान,
एक है ईश्वर साईं तेरा, उसको तू न बिसार,
जीवन बीत गया सपनों में, शेष बचे दिन चार,

लेकर जा तू साईं के द्वारे, श्रद्धा के ये फूल,
माथे पर तू अपने लगा ले,  साईं चरण की धूल,
वो है दयालु, वो ही करेंगे, तेरा बेड़ा पार,
जीवन बीत गया सपनों में, शेष बचे दिन चार,
जीवन बीत गया सपनों में, शेष बचे दिन चार,

जीवन बीत गया सपनों में, शेष बचे दिन चार
भोर अब तो होने लगी है, साईं नाम पुकार,
जीवन बीत गया सपनों में, शेष बचे दिन चार
भोर अब तो होने लगी है, साईं नाम पुकार,

-: आज का साईं सन्देश :-

बात न कोई बहस की,
मंजिल पाना होय ।
समझ गए दाभोलकर,
गुरु ज़रूरी होय ।।

गुरु कृष्ण के भी रहे,
गुरु राम के होय ।
इसी तरह साईं सदा,
सद्गुरु तेरे होय ।।

Tuesday, 5 April 2022

जला सको तो दीप जलाओ,

ॐ सांई राम



ॐ सांई नमो नमः
शिर्डी निवासी नमो नमः
करूणा मूर्ति नमो नमः
सद्गुरू सांई नमो नमः

जला सको तो दीप जलाओ,
ह्रदये जलाना मत सीखो!
बिछा सको तो फूल बिछाओ,
शूल बिछाना मत सीखो!
मिटा सको तो क्रौध मिटाओ,
स्नेह मिटाना मत सीखो!
कमा सको तो पुन्य कमाओ,
पाप कमाना मत सीखो!
कर सको तो भला करो,
बुरा करना मत सीखो!
जुटा सको तो राह जुटाओ,
प्रेम मिटाना मत सीखो!
लगा सको तो बाग़ लगाओ,
आग लगाना मत सीखो!

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Monday, 4 April 2022

साईंयां साईंयां ओ मेरे साईंयां, तेरे नाल ही मैं प्रीतां लाइयाँ,

ॐ सांई राम



साईंयां  साईंयां  ओ  मेरे साईंयां,
तेरे  नाल  ही  मैं  प्रीतां लाइयाँ,

 जदों  दे  तेरे  दर्शन  होए,
होर  न  कुछ  मेनू  भावे,
न  लग्गे  भुक्ख  प्यास  मेनू ,
न  ही  मेनू  नींद  आवे,
तेरे  सोहणे मुखडे  नु  वेख,
दिल  नु  मेरे करार  आवे,
 साईंयां साईंयां  ओ  मेरे  साईंयां ,
तेरे  नाल  ही  मैं  प्रीतां  लाइयाँ,
 चरणां  नाल  लगा  लओ मेनू,
चरण  तुहाडे मेनू  स्वर्ग  तो  प्यारे,
चरणां  दे  विच  बाबा  जी,
मेनू  तां सुकून  आवे,
तुहाडे  चरणां  विचाघार  बाबा,
मिटदा  हर  जंजाल  है,
साईंयां  साईंयां  ओ  मेरे साईंयां,
तेरे  नाल  ही  मैं  प्रीतां लाइयाँ,
अहियो  विनती  मेरी  साईं,
चरण  न  तेरे  दूर  होवे,
प्रीत  तेरे  नाल  लाई  ऐ,
ऐ  कदी न  घट होवे,
तू   ते  मेरा  मालक  साईं  तेरे  तों,
है  मेरा  संसार  है,
बिन  तेरे  तो  साईंयां ,
जीवन  वी बेकार  है,
साईंयां  साईंयां  ओ  मेरे साईंयां,
तेरे  नाल  ही  मैं  प्रीतां लाइयाँ,

-: आज का साईं सन्देश :-
साईं बाबा होय खुश,
फिर ऐसा समझाय ।
तेरी रक्षा वही करे,
मंजिल तक पहुंचाय ।।

राह प्रदर्शक साथ हो,
गुरु कृपा मिल जाय ।
शेर, भेड़िये, खन्दकें,
तुझको नहीं सताय ।।

Sunday, 3 April 2022

मैनु रस्ता विखा दे साईयाँ,

ॐ सांई राम



 मैनु रस्ता विखा  दे  साईयाँ,
कोल  अपने  बुला  लै साईयाँ,

दे  रस्ता  मैनु  कोई  तू,
न  भटकां मैं  होर  किते,
मेरी  विनती  सुन  लै  साईयाँ,
कोल  अपने  बुला  लै  साईयाँ,

हुन  न  हो  तू  मेरे तों  दूर,
मेरा  तां  तूं साईयाँ  हुज़ूर,
गलतियाँ  माफ़  कर  वी  दे  साईयाँ,
कोल  अपने  बुला  लै  साईयाँ,

मैं  बंदा  ताँ तेरा  ही  हाँ,
तेरे  तों  दूर  मैं  किवें  रवां,
बस  ऐना  दस दे  साईयाँ,
कोल  अपने  बुला  लै  साईयाँ,

मैनु रस्ता  विखा  दे  साईयाँ,
कोल  अपने  बुला  लै  साईयाँ,

 -: आज का साईं सन्देश :-
कई राह हैं मोक्ष की,
एक यहाँ से जाय ।।
बड़ा कठिन यह मार्ग है,
शेर बाघ मिल जाय ।।

काका साहब पूछते,
बाबा से इक राय ।
राह प्रदर्शक साथ हो,
कैसे उसको खाय ।।

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Gautam Budh Nagar, Uttar Pradesh. INDIA.