शिर्डी के साँई बाबा जी की समाधी और बूटी वाड़ा मंदिर में दर्शनों एंव आरतियों का समय....

"ॐ श्री साँई राम जी
समाधी मंदिर के रोज़ाना के कार्यक्रम

मंदिर के कपाट खुलने का समय प्रात: 4:00 बजे

कांकड़ आरती प्रात: 4:30 बजे

मंगल स्नान प्रात: 5:00 बजे
छोटी आरती प्रात: 5:40 बजे

दर्शन प्रारम्भ प्रात: 6:00 बजे
अभिषेक प्रात: 9:00 बजे
मध्यान आरती दोपहर: 12:00 बजे
धूप आरती साँयकाल: 5:45 बजे
शेज आरती रात्री काल: 10:30 बजे

************************************

निर्देशित आरतियों के समय से आधा घंटा पह्ले से ले कर आधा घंटा बाद तक दर्शनों की कतारे रोक ली जाती है। यदि आप दर्शनों के लिये जा रहे है तो इन समयों को ध्यान में रखें।

************************************

Saturday, 6 November 2021

मेरे बाबा सुन लो, मन की पुकार को।

ॐ सांई राम



मेरे बाबा सुन लो, मन की पुकार को।
शरण अपनी ले लो, ठुकरा दूँगा संसार को।

ठुकराया है दुनिया ने, देकर खूब भरोसा
अब न खाने वाला, इस दुनिया से धोखा
करो कृपा न भूलूँ मैं, तेरे इस उपकार को।
शरण अपनी ले लो, ठुकरा दूँगा संसार को।

जीवन बन गया बाबा , सचमुच एक पहेली
जाने कब सुलझेगी, मेरे जीवन की पहेली
राह दिखाना भोले, अपने भक्त लाचार को।
शरण अपनी ले लो, ठुकरा दूँगा संसार को।

तेरे सिवा न कोई है, जिसको कहूँ मैं अपना
लगता होगा पूरा न , जो भी देखा है सपना
तुम्ही जानो कैसे, मिलेगा चैन बेकरार को।
शरण अपनी ले लो, ठुकरा दूँगा संसार को।


Friday, 5 November 2021

हमें हर ख़ुशी दुनिया की, देते है साईं |

ॐ सांई राम



हमें हर ख़ुशी दुनिया की, देते है साईं |
दुःख पड़े तो बाँट लेते है साईं |
मुशीबत आये तो, टाल देते है साईं |
अपने भक्तो के सदा, साथ रहते है साईं...||


एक रात एक आदमी ने एक सपना देखा । उसने सपने में देखा कि वह और बाबा सांई समुद्र तट पर साथ-साथ टहल रहे हैं । आकाश में उसकी बीती जिंद़गी के दृश्य चलचित्र की तरह चल रहे थे । उसने देखा कि उसकी जिंद़गी के हर पल में रेत में दो जोड़ी पैरों के निशान थे, एक उसके पैरों के और दूसरे बाबा सांई के पैरों के । जब उसकी जिंद़गी का आखिरी दृश्य उसके सामने आया तो उसने पीछे मुड़कर रेत में पैरों के निशानों को देखा। उसने पाया कि उसकी जिंद़गी के कई पलों में रेत में केवल एक जोड़ी पैरों के निशान थे। उसने महसूस किया कि ये उसकी जिंद़गी के सबसे बुरे और दुख-भरे पल थे । इस बात से वह बहुत परेशान हुआ और उसने बाबा से पूछा कि “बाबा आपने तो कहा था कि जब मैंने एक बार आपका अनुसरण करने का निश्चय कर लिया तो उसके बाद आप जिंद़गी की राह पर मेरा साथ नहीं छोड़ेंगे । पर मैंने पाया है कि मेरी जिंद़गी के सबसे मुश्किल पलों में रेत में केवल एक जोड़ी पैरों के निशान हैं । मैं समझ नहीं पा रहा कि जब मुझे आपकी सबसे ज्यादा ज़रुरत थी तब आपने मुझे अकेला क्यों छोड़ दिया ?” बाबा ने उत्तर दिया कि “मेरे बच्चे, मैंने तुम्हें कभी अकेला नहीं छोड़ा । तुम्हारे बुरे और मुश्किल पलों में तुम केवल एक जोड़ी पैरों के निशान इसलिए देख रहे हो क्योंकि उस समय मैंने तुम्हें गोद में उठाया हुआ था 
 

मत देख कि कोई शख्स गुनहगार कितना है...
ये देख कि तेरे साथ व़फादार कितना है...
ये मत सोच कि उससे कुछ लोगों को नफरत भी है...
ये देख कि उसको तुझ से प्यार कितना है!

|| अपना सांई, प्यारा सांई, सबसे न्यारा अपना सांई||


।।ॐसांई राम।।



प्रीत लगी साईं तोहे नाम की
मोहे मिलो तो सांई राम जी ||

Thursday, 4 November 2021

बाबा ने दिवाली पर पानी से दिए जलाए

ॐ सांई राम





बाबा ने दिवाली पर पानी से दिए जलाए


श्री साईं बाबा संध्या समय गाँव में जा कर दुकानदारों से भिक्षा में तेल मांगते और मस्जिद में दिए जलाया करते थे| सन 1892  दिवाली के दिन बाबा गाँव के दुकानदारों से तेल मांगने गए लेकिन वाणी (तेल देने वालों) ने तेल देने से मना कर दिया| सभी दुकानदारों ने आपस में यह निश्चित किया था की वह बाबा को भिक्षा में तेल न दे कर अपना महत्व दर्शाएंगे|अहंकार से भरकर उन्होंने यह भी कहा की देखते है बाबा! आज किस प्रकार मस्जिद में दिए जलाते है ? अत: बाबा को खाली हाथ ही मस्जिद में लौटना पड़ा| कुछ समय पश्चात ही सभी दुकानदार एवं गाँव के कुछ लोग मस्जिद में गए और उन्होंने देखा :-


"बाबा के टीन में पिछले दिन का कुछ तेल था| उन्होंने मस्जिद में रखे घड़े से पानी टीन में डाला और तेल में मिला दिया| उन्होंने वह तेल - मिश्रित पानी अपने मुहं में पीया और पुन: टीन में उलट दिया| वह पानी उन्होंने मस्जिद में रखे दीयों में दाल दिया और बातीं लगा कर दियें जला दिए|



आश्चर्य! पानी के दिए सारी रात जले| यह देख कर सभी दुकानदारों ने बाबा से क्षमा - याचना की एवं प्रतिदिन उन्हें स्वयं ही तेल देने लगे|"


Wednesday, 3 November 2021

चिन्ता से भरा दिल साँईं को दे दे तुझे दोनों जहां का सुख-चैन मिलेगा

ॐ सांई राम



चिन्ता से भरा दिल साँईं को दे दे
तुझे दोनों जहां का सुख-चैन मिलेगा 
चिन्ता से भरा दिल साँईं को दे दे.....
कभी दिन उजियारा कभी रैन अंधेरी
कभी मन हरियाली कभी झोली खाली
वो सब कुछ जाने कब क्या देना है
हर पग पे करेगा तेरी रखवाली
तू पकड़ के रखियो विशवास कि डोरी
वो जहां मिला था फिर वहीं मिलेगा
चिन्ता से भरा दिल साँईं को दे दे.....
स्वीकार किया है हमें साँईं ने जब से
ख़ुद को पहचाना जग को पहचाना
मुश्किल से मिली है सदगुरू कि चौखट
मुश्किल से मिला है हमें एक ठिकाना
लगता है सभी हम किस्मत के धनी हैं
अब एसी जगह से कहो कौन हिलेगा
चिन्ता से भरा दिल साँईं को दे दे.....
हो सकता है इक दिन तुम्हे नींद आ जाये
तुम रोम-रोम को ज़रा बोल के रखना
बंद भी हो जाएं जग के दरवाज़े
तुम मन की खिड़की सदा खोल के रखना
किस रात में साँईं कब चुपके-चुपके
अपने भक्तों से ख़ुद आन मिलेगा
चिन्ता से भरा दिल साँईं को दे दे...
तुझे दोनों जहां का सुख-चैन मिलेगा
फिर पतझड़ में भी तेरी बगिया में
साँईं रहमत का ही फूल खिलेगा
चिन्ता से भरा दिल साँईं को दे दे...
॥ ॐ शिरडी वासाय विधमहे सच्चिदानन्दाय धीमही तन्नो साईं प्रचोदयात 

Tuesday, 2 November 2021

साँईं जी तुम्हे मेरा शाष्टांग प्रणाम ||

ॐ सांई राम


साँईं जी तुम्हे मेरा शाष्टांग प्रणाम ||

करते हो तुम सबका कल्याण,
द्वार पे तेरे जो भी आए खाली हाथ नही जाए,
बनाते हो तुम सबके बिगडे काम,
साईं तुम्हे मेरा शाष्टांग प्रणाम ||


अपने मन मन्दिर में जिसने तुम्हे बैठाया,
उन सभी को तुमने गले लगाया,
कर दिया उनका कल्याण साईं,
साईं तुम्हे मेरा शाष्टांग प्रणाम ||


तुम हो दीन दुखियों के सहाई,
सबकी पीड़ा तुमने अपनाई,
सबकी बिगड़ी तुने ही बनाई,
साईं तुम्हे मेरा शाष्टांग प्रणाम ||

पनाह दे दो हमे भी अपनी शरण में,
जीवन भर रहेंगे तुम्हारी चरण में,
देखकर तुम्हे हम जी लेंगे,
साईं तुम्हे मेरा शाष्टांग प्रणाम ||


कुविचारों को हमारे आप,
मिटा दो अपने आप,
बुरे पथ से हम बचे,
सच्चाई के पथ पर हम चले,
ऐसा कर दो हमारा कल्याण,
साईं तुम्हे मेरा शाष्टांग प्रणाम ||



"तीनों लोको में गुरु के समान दाता कोई ओर अन्य नहीं है,
इसलिए अनन्य भाव से समर्पण कर उनकी परम शरण में जाना चाहिए" ||

Monday, 1 November 2021

साईं का रूप बना के, आया है डमरू वाला ||

ॐ सांई राम





दु:ख को बोझ समझने वाले कौन तुझे समझाए,
साँई तेरी ख़ातिर ख़ुद पर,
कितना बोझ उठाए कितना बोझ उठाए ||

वो ही तेरे प्यार का मालिक,
वो ही तेरे संसार का मालिक,
हैरत से तू क्या तकता है,
दीया बुझ कर जल सकता है,
वो चाहे तो रात को दिन,
और दिन को रात बनाए,
साँई तेरी ख़ातिर ख़ुद पर,
कितना बोझ उठाए कितना बोझ उठाए ||

तन में तेरा कुछ भी नहीं है,
शाम सवेरा कुछ भी नहीं है,
दुनिया की हर चीज़ उधारी,
सब जाएंगे बारी-बारी,
चार दिन के चोले पर काहे इतना इतराए,
साँई तेरी ख़ातिर ख़ुद पर,
कितना बोझ उठाए कितना बोझ उठाए ||

देख खुला है इक दरवाज़ा,
अंदर आकर ले अंदाज़ा,
पोथी-पोथी खटकने वाले,
पड़े हैं तेरी अक्ल पे ताले,
कब लगते हैं हाथ किसी के चलते फिरते साए,
साँई तेरी ख़ातिर ख़ुद पर
कितना बोझ उठाए कितना बोझ उठाए ||


!! हर हर महादेव !!
साईं का रूप बना के,
आया है डमरू वाला ||
गंगा में विसर्जित कर दी,
शिव ने सर्पो की माला ||
साईं का रूप बना के,
आया है डमरू वाला ||
माँ अन्नपूर्णा का सदा आपके घर पर वास रहे ||

Sunday, 31 October 2021

जबसे बढ़ा सांई से रिश्ता दुनियां छूटी जाय

ॐ सांई राम



जबसे बढ़ा सांई से रिश्ता
दुनियां छूटी जाय
हम आऐ सांई के द्वारे
धरती कहीं भी जाय

चहूं ओर तूफ़ान के धारे,
मैली हवा वीरान किनारे
जीवन नैया सांई सहारे
फिर भी चलती जाय
जबसे बढ़ा सांई से रिश्ता
दुनिया छूटी जाय

नाम सिमर ले जब तक दम है,
बोझ ज़ियादा वक्त भी कम है
याद रहे दो दिन की उमरिया
पल पल घटती जाय
जबसे बढ़ा………………

मेरे बाबा सुन लो, मन की पुकार को।
शरण अपनी ले लो, ठुकरा दूँगा संसार को।

ठुकराया है दुनिया ने, देकर खूब भरोसा
अब न खाने वाला, इस दुनिया से धोखा
करो कृपा न भूलूँ मैं, तेरे इस उपकार को।
शरण अपनी ले लो, ठुकरा दूँगा संसार को।

जीवन बन गया बाबा, सचमुच एक पहेली
जाने कब सुलझेगी, मेरे जीवन की पहेली
राह दिखाना भोले, अपने भक्त लाचार को।
शरण अपनी ले लो, ठुकरा दूँगा संसार को।

तेरे सिवा न कोई है, जिसको कहूँ मैं अपना
लगता होगा पूरा न , जो भी देखा है सपना
तुम्ही जानो कैसे, मिलेगा चैन बेकरार को।
शरण अपनी ले लो, ठुकरा दूँगा संसार को।

For Donation

For donation of Fund/ Food/ Clothes (New/ Used), for needy people specially leprosy patients' society and for the marriage of orphan girls, as they are totally depended on us.

For Donations, Our bank Details are as follows :

A/c - Title -Shirdi Ke Sai Baba Group

A/c. No - 200003513754 / IFSC - INDB0000036

IndusInd Bank Ltd, N - 10 / 11, Sec - 18, Noida - 201301,

Gautam Budh Nagar, Uttar Pradesh. INDIA.