शिर्डी के साँई बाबा जी की समाधी और बूटी वाड़ा मंदिर में दर्शनों एंव आरतियों का समय....

"ॐ श्री साँई राम जी
समाधी मंदिर के रोज़ाना के कार्यक्रम

मंदिर के कपाट खुलने का समय प्रात: 4:00 बजे

कांकड़ आरती प्रात: 4:30 बजे

मंगल स्नान प्रात: 5:00 बजे
छोटी आरती प्रात: 5:40 बजे

दर्शन प्रारम्भ प्रात: 6:00 बजे
अभिषेक प्रात: 9:00 बजे
मध्यान आरती दोपहर: 12:00 बजे
धूप आरती साँयकाल: 7:00 बजे
शेज आरती रात्री काल: 10:30 बजे

************************************

निर्देशित आरतियों के समय से आधा घंटा पह्ले से ले कर आधा घंटा बाद तक दर्शनों की कतारे रोक ली जाती है। यदि आप दर्शनों के लिये जा रहे है तो इन समयों को ध्यान में रखें।

************************************

Saturday, 12 September 2015

मेरे बाबा सुन लो


ॐ सांई राम


मेरे बाबा सुन लो, मन की पुकार को।

शरण अपनी ले लो, ठुकरा दूँगा संसार को।



ठुकराया है दुनिया ने, देकर खूब भरोसा
अब न खाने वाला, इस दुनिया से धोखा
करो कृपा न भूलूँ मैं, तेरे इस उपकार को।
शरण अपनी ले लो, ठुकरा दूँगा संसार को।



जीवन बन गया बाबा , सचमुच एक पहेली
जाने कब सुलझेगी, मेरे जीवन की पहेली
राह दिखाना भोले, अपने भक्त लाचार को।
शरण अपनी ले लो, ठुकरा दूँगा संसार को।



तेरे सिवा न कोई है, जिसको कहूँ मैं अपना
लगता होगा पूरा न , जो भी देखा है सपना
तुम्ही जानो कैसे, मिलेगा चैन बेकरार को।
शरण अपनी ले लो, ठुकरा दूँगा संसार को।


Friday, 11 September 2015

अपने भक्तो के सदा, साथ रहते है साईं...

 ॐ सांई राम




हमें हर ख़ुशी दुनिया की, देते है साईं |
दुःख पड़े तो बाँट लेते है साईं |
मुशीबत आये तो, टाल देते है साईं |
अपने भक्तो के सदा, साथ रहते है साईं...||


एक रात एक आदमी ने एक सपना देखा । उसने सपने में देखा कि वह और बाबा सांई समुद्र तट पर साथ-साथ टहल रहे हैं । आकाश में उसकी बीती जिंद़गी के दृश्य चलचित्र की तरह चल रहे थे । उसने देखा कि उसकी जिंद़गी के हर पल में रेत में दो जोड़ी पैरों के निशान थे, एक उसके पैरों के और दूसरे बाबा सांई के पैरों के । जब उसकी जिंद़गी का आखिरी दृश्य उसके सामने आया तो उसने पीछे मुड़कर रेत में पैरों के निशानों को देखा। उसने पाया कि उसकी जिंद़गी के कई पलों में रेत में केवल एक जोड़ी पैरों के निशान थे। उसने महसूस किया कि ये उसकी जिंद़गी के सबसे बुरे और दुख-भरे पल थे । इस बात से वह बहुत परेशान हुआ और उसने बाबा से पूछा कि “बाबा आपने तो कहा था कि जब मैंने एक बार आपका अनुसरण करने का निश्चय कर लिया तो उसके बाद आप जिंद़गी की राह पर मेरा साथ नहीं छोड़ेंगे । पर मैंने पाया है कि मेरी जिंद़गी के सबसे मुश्किल पलों में रेत में केवल एक जोड़ी पैरों के निशान हैं । मैं समझ नहीं पा रहा कि जब मुझे आपकी सबसे ज्यादा ज़रुरत थी तब आपने मुझे अकेला क्यों छोड़ दिया ?” बाबा ने उत्तर दिया कि “मेरे बच्चे, मैंने तुम्हें कभी अकेला नहीं छोड़ा । तुम्हारे बुरे और मुश्किल पलों में तुम केवल एक जोड़ी पैरों के निशान इसलिए देख रहे हो क्योंकि उस समय मैंने तुम्हें गोद में उठाया हुआ था 
 

मत देख कि कोई शख्स गुनहगार कितना है...
ये देख कि तेरे साथ व़फादार कितना है...
ये मत सोच कि उससे कुछ लोगों को नफरत भी है...
ये देख कि उसको तुझ से प्यार कितना है!

|| अपना सांई, प्यारा सांई, सबसे न्यारा अपना सांई ||


ॐ सांई राम।।।
 

प्रीत लगी साईं तोहे नाम की
मोहे मिलो तो सांई राम जी ||

Thursday, 10 September 2015

श्री साँई सच्चरित्र - अध्याय 49

ॐ सांई राम





आप सभी को शिर्डी के साँई बाबा ग्रुप की ओर साईं-वार की हार्दिक शुभ कामनाएं , हम प्रत्येक साईं-वार के दिन आप के समक्ष बाबा जी की जीवनी पर आधारित श्री साईं सच्चित्र का एक अध्याय प्रस्तुत करने के लिए श्री साईं जी से अनुमति चाहते है , हमें आशा है की हमारा यह कदम  घर घर तक श्री साईं सच्चित्र का सन्देश पंहुचा कर हमें सुख और शान्ति का अनुभव करवाएगा, किसी भी प्रकार की त्रुटी के लिए हम सर्वप्रथम श्री साईं चरणों में क्षमा याचना करते है...

श्री साँई सच्चरित्र - अध्याय 49

हरि कानोबा, सोमदेव स्वामी, नानासाहेब चाँदोरकर की कथाएँ ।
---------------------------------------

Wednesday, 9 September 2015

कैसे कहूँ बाबा तुमसे कितना प्यार है ||

ॐ साँई राम



तेरे कदमों की आहट का मुझे इन्तजार है
तेरे कदमों की आहट का मुझे इन्तजार है

कैसे कहूँ बाबा तुमसे कितना प्यार है
 
कैसे कहूँ बाबा तुमसे कितना प्यार है

श्रद्वा सुमन से अपना आँगन मैंने सजा लिया,
साथ में सबुरी का दीपक भी जला लिया |
तेरे चिमटे की खन खन का मुझे इन्तजार है,
कैसे कहूँ बाबा तुमसे कितना प्यार है ||

Tuesday, 8 September 2015

मैं क्या हूँ. ......

मैं हूँ पापी, अधर्मी, दूराचारी
देख ली साँईं मैंने तेरी भी यारी
लीलाओं का सागर हैं बाबा तू तो
ये क्या लीला रची तूने अब की बारी

क्यों हो जाता हूँ मैं इतना मजबूर
क्या है मेरी खता क्या है मेरा कसूर
खो कर सब कुछ दर पे तेरे आया
खोया भी वही जो कभी तुझ से था पाया

तुझे दोनों जहां का सुख-चैन मिलेगा, चिन्ता से भरा दिल साँईं को दे दे.....

ॐ सांई राम



चिन्ता से भरा दिल साँईं को दे दे
तुझे दोनों जहां का सुख-चैन मिलेगा 
चिन्ता से भरा दिल साँईं को दे दे.....

कभी दिन उजियारा कभी रैन अंधेरी
कभी मन हरियाली कभी झोली खाली
वो सब कुछ जाने कब क्या देना है
हर पग पे करेगा तेरी रखवाली
तू पकड़ के रखियो विशवास कि डोरी
वो जहां मिला था फिर वहीं मिलेगा
चिन्ता से भरा दिल साँईं को दे दे.....

स्वीकार किया है हमें साँईं ने जब से
ख़ुद को पहचाना जग को पहचाना
मुश्किल से मिली है सदगुरू कि चौखट
मुश्किल से मिला है हमें एक ठिकाना
लगता है सभी हम किस्मत के धनी हैं
अब एसी जगह से कहो कौन हिलेगा
चिन्ता से भरा दिल साँईं को दे दे.....

हो सकता है इक दिन तुम्हे नींद आ जाये
तुम रोम-रोम को ज़रा बोल के रखना
बंद भी हो जाएं जग के दरवाज़े
तुम मन की खिड़की सदा खोल के रखना
किस रात में साँईं कब चुपके-चुपके
अपने भक्तों से ख़ुद आन मिलेगा
चिन्ता से भरा दिल साँईं को दे दे...

तुझे दोनों जहां का सुख-चैन मिलेगा
फिर पतझड़ में भी तेरी बगिया में
साँईं रहमत का ही फूल खिलेगा
चिन्ता से भरा दिल साँईं को दे दे...
॥ ॐ शिरडी वासाय विधमहे सच्चिदानन्दाय धीमही तन्नो साईं प्रचोदयात 

Monday, 7 September 2015

ऐसा करो हमारा कल्याण साँईं जी तुम्हे मेरा शाष्टांग प्रणाम ||

ॐ सांई राम



साँईं जी तुम्हे मेरा शाष्टांग प्रणाम,
करते हो तुम सबका कल्याण |
द्वार पे तेरे जो भी आए खाली हाथ कभी ना जाए,
बनाते हो तुम सबके बिगड़े काम ||
साँईं जी तुम्हे मेरा शाष्टांग प्रणाम,
अपने मन मन्दिर में जिसने तुम्हे बिठाया |
उन सभी को तुमने गले लगाया,
कर दिया उन सब का कल्याण ||
साँईं जी तुम्हे मेरा शाष्टांग प्रणाम,
तुम्ही तो हो दीन दुखियों के सहाई |
सबकी पीड़ा तुमने अपनाई,
सबकी बिगड़ी तुमने बनाई ||
साँईं जी तुम्हे मेरा शाष्टांग प्रणाम,
पनाह दे दो हमे भी अपने शरण में |
जीवन भर रहें तुम्हारे चरण में,
खुशियाँ भर दो अंत:करण में ||

साँईं जी तुम्हे मेरा शाष्टांग प्रणाम,
कुविचारों को हमारे आप, मिटा दो अपने आप |
बुरे पथ से हम बचे, सचाई के पथ पर हम चले |
ऐसा करो हमारा कल्याण
साँईं जी तुम्हे मेरा शाष्टांग प्रणाम ||
साँईं जी तुम्हे मेरा शाष्टांग प्रणाम,
करते हो तुम सबका कल्याण |
द्वार पे तेरे जो भी आए खाली हाथ कभी ना जाए,
बनाते हो तुम सबके बिगड़े काम ||
साँईं जी तुम्हे मेरा शाष्टांग प्रणाम,
अपने मन मन्दिर में जिसने तुम्हे बिठाया |
उन सभी को तुमने गले लगाया,
कर दिया उन सब का कल्याण ||
साँईं जी तुम्हे मेरा शाष्टांग प्रणाम,
तुम्ही तो हो दीन दुखियों के सहाई |
सबकी पीड़ा तुमने अपनाई,
सबकी बिगड़ी तुमने बनाई ||
साँईं जी तुम्हे मेरा शाष्टांग प्रणाम,
पनाह दे दो हमे भी अपने शरण में |
जीवन भर रहें तुम्हारे चरण में,
खुशियाँ भर दो अंत:करण में ||

साँईं जी तुम्हे मेरा शाष्टांग प्रणाम,
कुविचारों को हमारे आप, मिटा दो अपने आप |
बुरे पथ से हम बचे, सचाई के पथ पर हम चले |

ऐसा करो हमारा कल्याण
साँईं जी तुम्हे मेरा शाष्टांग प्रणाम ||

Sunday, 6 September 2015

तुम ही तो आओगे मेरे साँईं

ॐ सांई राम


मयंक आनन्द (15/05/1997 - 20/07/2015)
 

आओ साँईं आओ साँईं
प्रीत की रीत निबाओ साँईं
कहती है ये दुनिया मुजको
तेरा प्यार है इतना साचा
तो क्यूँ नहीं आते मेरे साँईं
मै जानु तुम साथ हो मेरे
सबको तुम दिखला दो ये साँईं
तेरे आगे ही सर ये झुका था
दुनिया ने भी अब झुका दिया है
वो समझे मै पागल हु
मुझको दर्द न होता होगा
वो न जाने इससे ज्यादा
दर्द तो तुमको साँईं होता होगा
है भरोसा मुझको तुम पे
जो सर दुनिया ने है झुकाया
उसको ऊंचा करने के लिए भी

तुम ही तो आओगे मेरे साँईं

For Donation

For donation of Fund/ Food/ Clothes (New/ Used), for needy people specially leprosy patients' society and for the marriage of orphan girls, as they are totally depended on us.

For Donations, Our bank Details are as follows :

A/c - Title -Shirdi Ke Sai Baba Group

A/c. No - 200003513754 / IFSC - INDB0000036

IndusInd Bank Ltd, N - 10 / 11, Sec - 18, Noida - 201301,

Gautam Budh Nagar, Uttar Pradesh. INDIA.