शिर्डी के साँई बाबा जी की समाधी और बूटी वाड़ा मंदिर में दर्शनों एंव आरतियों का समय....

"ॐ श्री साँई राम जी
समाधी मंदिर के रोज़ाना के कार्यक्रम

मंदिर के कपाट खुलने का समय प्रात: 4:00 बजे

कांकड़ आरती प्रात: 4:30 बजे

मंगल स्नान प्रात: 5:00 बजे
छोटी आरती प्रात: 5:40 बजे

दर्शन प्रारम्भ प्रात: 6:00 बजे
अभिषेक प्रात: 9:00 बजे
मध्यान आरती दोपहर: 12:00 बजे
धूप आरती साँयकाल: 7:00 बजे
शेज आरती रात्री काल: 10:30 बजे

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निर्देशित आरतियों के समय से आधा घंटा पह्ले से ले कर आधा घंटा बाद तक दर्शनों की कतारे रोक ली जाती है। यदि आप दर्शनों के लिये जा रहे है तो इन समयों को ध्यान में रखें।

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Saturday, 11 January 2014

दया करो भगवान

ॐ सांई राम


भजो  भाई  बहन  गुरु  नाम
भजो  साईं  चरण  सुख  धाम
मुक्ति  प्रदायक  मोह  विदूरका
भक्ता  परायण  साईं  नाम
भजो रे  सदगुरु  साईं  चरणं
पावन  चरणं, पद्मदल  चरणं
मुक्ति  दायक  मोहना  चरणं
पाप  विनाशका  साईं चरणं

भजो रे  मानस  गुरु  चरणं
सदगुरु  चरणं  भाव  भय  हरनाम
सत्चिदानान्दा  परमानंदा
सदगुरु  साईं  गुरु  चरणं
साईं  गुरु  ब्रह्मा,  साईं  गुरु  विष्णु
साईं  गुरु  देवो  महेश्वर
साईं  गुरु  साक्षात  परब्रह्म
सदगुरु  साईं  नाम  जपो

ब्रह्मानंदा  गुरु  प्रेमानान्दा  गुरु
साईं  गुरु  देवा  शरणम
भजो  शंकर  हरी  हरा  शरणम
विश्वनाथ  देवा  गौरी  मनोहर
साईं  नाठा  बाबा  परमेश्वर
भजो  शिव  शम्भो  शिव  शरणम

गुरु  साईं  गुरु  बाबा
चरण  नमोस्तुते  गुरु  बाबा
साईं  बाबा  भोले  बाबा
गुरु  वरा  गुरु  वरा  गुरु  बाबा
विद्या  दायक  गुरु  बाबा
शांत  स्वरूप  गुरु  बाबा
गुरुवरा  गुरुवरा  गुरु बाबा

गुरु  भगवान  श्री  साईं  राम
शिर्डी  निरंजन साईं  भगवान
परम  दयाकर  साईं  भगवान
मंगल  करो  प्रभु  मंगल धाम
मोक्ष  विधायक  साईं  भगवान

गुरु  ब्रह्मा  गुरु  विष्णु
गुरु  देवा  महेश्वर
जय  देवा गुरु  देवा
जय  शिर्डी साईश्वर
जय  जय  जय  करुनाकर
जय जय जय अखिलेश्वर
जय  जय  जय  शिर्डीश्वर
जय  जय  जय  पर्थीश्वर

गुरु  देवा  गुरु  गोविंदा
मंगल  गिरिधर,
शिर्डी  पुरीश्वारा
जय  साईं  शिव
मंगल  रूपा
श्री  साईं  देवा




गुरु  देवा  सदगुरु  देवा
दया  करो  भगवान
शांति  दो, शांति  दो,
शांति दो, मुझे दया  धना
आनंदा  चन्द्र  सत्चिदानान्दा
आनंदा आनंदा साईं
हे  गुरु  देवा  आनंदा
आनंदा साईं
हे  भुवनेशा
दया  करो  भगवान
शांति  दो, शांति  दो,
शांति दो, मुझे  दया  धना 


Friday, 10 January 2014

साईं विभूति मंत्र

ॐ सांई राम


साईं विभूति मंत्र

परमम्  पवित्रम बाबा  विभूतिम
परमम्  विचित्रं  लीला  विभूतिम
परमार्थ  इश्तार्था  मोक्ष  प्रधानम
बाबा  विभूतिम  इद्धम  अस्रयामी


Meaning:
I take refuge in the supremely sacred Vibhuthi of Lord Baba, the wonderful Vibhuthi, which bestows salvation, the sacred state which I desire to attain.


English version:Sacred Ash, Miraculous, Baba's Creation
Flowing From His Blessed Hand, Holy Creation
Granting Us The Greatest Wealth, God's Divine Protection
Beloved Baba, Grant Us Liberation


Click here for Live coverage of Shree Sai Palki Shobha Yatra recorded
dated 09th January 2014.

Thursday, 9 January 2014

श्री साई सच्चरित्र - अध्याय 7

ॐ सांई राम


आप सभी को शिर्डी के साईं बाबा ग्रुप की और से साईं-वार की हार्दिक शुभ कामनाएं |

हम प्रत्येक साईं-वार के दिन आप के समक्ष बाबा जी की जीवनी पर आधारित श्री साईं सच्चित्र का एक अध्याय प्रस्तुत करने के लिए श्री साईं जी से अनुमति चाहते है |

हमें आशा है की हमारा यह कदम घर घर तक श्री साईं सच्चित्र का सन्देश पंहुचा कर हमें सुख और शान्ति का अनुभव करवाएगा| किसी भी प्रकार की त्रुटी के लिए हम सर्वप्रथम श्री साईं चरणों में क्षमा याचना करते है|


श्री साई सच्चरित्र - अध्याय 7
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अदभुत अवतार । श्री साईबाबा की प्रकृति, उनकी यौगिक क्रयाएँ, उनकी सर्वव्यापकता, कुष्ठ रोगी की सेवा, खापर्डे के पुत्र प्लेग, पंढरपुर गमन, अदभुत अवतार
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श्री साईबाबा की समस्त यौगिक क्रियाओं में पारंगत थे । 6 प्रकार की क्रियाओं के तो वे पूर्ण ज्ञाता थे । 6 क्रियायें, जिनमें धौति ( एक 3 चौड़े व 22 ½ लम्बे कपड़े के भीगे हुए टुकड़े से पेट को स्वच्छ करना), खण्ड योग (अर्थात् अपने शरीर के अवयवों को पृथक-पृथक कर उन्हें पुनः पूर्ववत जोड़ना) और समाधि आदि भी सम्मिलित हैं । यदि कहा जाये कि वे हिन्दू थे तो आकृति से वे यवन-से प्रतीत होते थे । कोई भी यह निश्चयपूर्वक नहीं कह सकता था कि वे हिन्दू थे या यवन । वे हिन्दुओं का रामनवमी उत्सव यथाविधि मनाते थे और साथ ही मुसलमानों का चन्दनोत्सव भी । वे उत्सव में दंगलों को प्रोत्साहन तथा विजेताओं को पर्याप्त पुरस्कार देते थे । गोकुल अष्टमी को वे गोपाल-काला उत्सव भी बड़ी धूमधाम से मनाते थे । ईद के दिन वे मुसलमानों को मसजिदमें नमाज पढ़ने के लिये आमंत्रित किया करते थे । एक समय मुहर्रम के अवसर पर मुसलमानों ने मसजिद में ताजिये बनाने तथा कुछ दिन वहाँ रखकर फिर जुलूस बनाकर गाँव से निकालने का कार्यक्रम रचा । श्री साईबाबा ने केवल चार दिन ताजियों को वहाँ रखने दिया और बिना किसी राग-देष के पाँचवे दिन वहाँ से हटवा दिया ।

Wednesday, 8 January 2014

मेरा इक तू साईं|

ॐ सांई राम


सगरे जगत में दूजा नहीं, मेरा इक तू साईं
रहना  मुझको, संग संग तेरे, बनके तेरी परछाई

लेके उमीदें तेरे दर पे आते
है  सारे सवाली
मांगे मुरादें लेके जाएं
भर भर दामन खाली
मेरे मालिक मेरे दाता
भाग बना दे भाग्य विधाता
अब दुख सहा न जाता

सगरे जगत में दूजा नहीं, मेरा इक तू साईं
रहना  मुझको, संग संग तेरे, बनके तेरी परछाई

तेरे चरणों की धुल उठाके,
माथे पर मैं लगाऊं
तेरी मिट्टी में जन्म लिया है,
तुझ में हे मिल जाऊं
चाहे बना दे चाहे मिटा दे,
जो चाहे वोह मुझको सज़ा दे
जीवन पार लगादे.

सगरे जगत में दूजा नहीं,
मेरा इक तू साईं
रहना  मुझको, संग संग तेरे,


बनके तेरी परछाई

Tuesday, 7 January 2014

मनुष्य को कभी भी अपना अच्छा स्वभाव नहीं भूलना चाहिए।


ॐ सांई राम


एक बार एक भला आदमी नदी किनारे बैठा था। तभी उसने देखा एक बिच्छू पानी में गिर गया है। भले आदमी ने जल्दी से बिच्छू को हाथ में उठा लिया। बिच्छू ने उस भले आदमी को डंक मार दिया। बेचारे भले आदमी का हाथ काँपा और बिच्छू पानी में गिर गया।

भले आदमी ने बिच्छू को डूबने से बचाने के लिए दुबारा उठा लिया। बिच्छू ने दुबारा उस भले आदमी
को डंक मार दिया। भले आदमी का हाथ दुबारा काँपा और बिच्छू पानी में गिर गया।

भले आदमी ने बिच्छू को डूबने से बचाने के लिए एक बार फिर उठा लिया। वहाँ एक लड़का उस आदमी का बार-बार बिच्छू को पानी से निकालना और बार-बार बिच्छू का डंक मारना देख रहा था। उसने आदमी से कहा, "आपको यह बिच्छू बार-बार डंक मार रहा है फिर भी आप उसे डूबने से क्यों बचाना चाहते हैं?"
भले आदमी ने कहा, "बात यह है बेटा कि बिच्छू का स्वभाव है डंक मारना और मेरा स्वभाव है बचाना। जब बिच्छू एक कीड़ा होते हुए भी अपना स्वभाव नहीं छोड़ता तो मैं मनुष्य होकर अपना स्वभाव क्यों छोड़ूँ?"

मनुष्य को कभी भी अपना अच्छा स्वभाव नहीं भूलना चाहिए।

Sunday, 5 January 2014

साईं हमारे आओ

ॐ सांई राम



आओ  आओ  साईंनाथ
आओ  आओ  हे  जगन्नाथ
आओ  आओ  साईंनाथ
दर्शन  के  लिए  तरस  रहे  है
नयन  हमारे  ओ  साईं
दर्ष  दिखाओ  दया  के  सागर
आओ  शंकर  हे  परमेश्वर



Please come, Sai, Lord of the Universe, our eyes are eager to see Your divine form. O Lord Shankara, the ocean of compassion, grant us Your vision.


आओ  आओ  साईंनाथ
आओ  आओ  साईं  प्यारे
कीर्तन  करू   मैं साईं  तुम्हारे
आओ  आओ  साईं  प्यारे
तुम  हो  मेरे  नयनो  के  तारे
दर्शन  दो  जीवन  के  सहारे 


Please come, beloved Sai, let me sing your glory.
O Supreme Lord, You are the support of my life and the
shining star of my eyes.

 

आओ  गोपाला  गिरिधारी
आओ  आओ  अंतर्यामी
आओ  आओ  आनंदा  साईं
आओ  गोपाला  गिरिधारी
आओ  आओ  आत्मानिवासी
आओ  आओ  शांति  निवासी


Come, O Gopala! You held up the mountain Govardhana
to save Your devotees. We welcome You the indweller of our
hearts. Lord Sai, You reside in the abode of peace and grant bliss.
आओ  प्यारे  नयन  हमारे  
साईं  हमारे  आओ
तुम  बिन  कोई  नहीं  रखवाले
तुम  बिन  कौन  सहारे  (बाबा)
आओ  साईं  प्यारे
साईं  हमारे  आओ  


Please come our beloved Lord Sai! You are as precious
as our eyes. Without You, there is no one to
protect us. Who but You can support us, O Beloved Sai?




आओ  साईं  नारायण  दर्शन  दीजो
तुम  हो  जगत  विधाता
तुम्ही  हो  ब्रह्मा  तुम्ही  हो  विष्णु
तुम्ही  हो  शंकर  रूप
तुम्ही  हो  राम  तुम्ही  हो  कृष्ण
तुम्ही  हो  विश्व  विधाता



Welcome Sai Narayana, Creator of the Universe.
Grant us your Darshan. You are none other than Lord Rama,
Krishna, Vishnu, Brahma and Shankara.

For Donation

For donation of Fund/ Food/ Clothes (New/ Used), for needy people specially leprosy patients' society and for the marriage of orphan girls, as they are totally depended on us.

For Donations, Our bank Details are as follows :

A/c - Title -Shirdi Ke Sai Baba Group

A/c. No - 200003513754 / IFSC - INDB0000036

IndusInd Bank Ltd, N - 10 / 11, Sec - 18, Noida - 201301,

Gautam Budh Nagar, Uttar Pradesh. INDIA.